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सीएम के निर्देश पर कार्रवाई, बदली पॉलिसी:पथ निर्माण विभाग अब खुद करेगा सड़कों की मेंटेनेंस, शुरुआत बांका, गया और मुजफ्फरपुर जिले से

पटना6 दिन पहलेलेखक: इन्द्रभूषण
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सात साल के बाद राज्य में नई पाॅलिसी लागू, अब तक निर्माण एजेंसियों के जरिए किया जा रहा था सड़कों का रखरखाव। - Dainik Bhaskar
सात साल के बाद राज्य में नई पाॅलिसी लागू, अब तक निर्माण एजेंसियों के जरिए किया जा रहा था सड़कों का रखरखाव।

पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर ही अब बड़ी सड़कों के मेंटेनेस की जिम्मेवारी संभालेंगे। निर्णय हो गया है। शुरुआत बांका, गया और मुजफ्फरपुर जिले से होगी। दरअसल मुख्यमंत्री पथ निर्माण के अधिकारियों से लगातार कह रहे हैं कि विभाग ही अपनी बनाई सड़कों के मेंटेनेंस की जिम्मेवारी उठाएं।

पहले, इनपुट आधारित टेंडर प्रणाली यानी सड़क के टूटने के बाद उसके हालात के हिसाब से छोटे-छोटे टुकड़ों में सड़क को दुरुस्त रखना होता था। हर पांच किलोमीटर लंबाई में रोड कुली बहाल रहते थे और उनका काम उतनी दूरी में लगातार नजर रखकर सड़क को मेंटेन करना होता था। पर सड़कों की लंबाई बढ़ती गई और रोड कुली की संख्या कम होते-होते समाप्त हो गई। मशीनों से मेंटेनेंस का काम होने लगा तो इस व्यवस्था को बड़ी-बड़ी सड़कें निर्माण एजेंसियों को सौंप दिया गया।

ओपीआरएमसी फेज-1
दिसंबर 2013 से 2018 तक 9064 किमी/‌‌‌‌ 2579 करोड़ रुपए

ओपीआरएमसी फेज-2
मार्च 2019 से मार्च 2026 तक 13064 किमी/ 6655 करोड़ रुपए

2013 से राज्य में रोड मेंटेनेंस पॉलिसी लागू हुई थी
ओपीआरएमसी (दीर्घकालीन निष्पादन और उपलब्धि आधारित पथ अस्तियां अनुरक्षण संविदा प्रणाली) में अभी 13064 किलोमीटर सड़कें हैं जिनके सात वर्ष के मेंटेनेंस पर 6655 करोड़ रुपए खर्च होना है। पथ निर्माण विभाग ने वर्ष 2013 से राज्य में रोड मेंटेनेंस पॉलिसी लागू की।

इस नीति में इनपुट आधारित टेंडर की जगह आउटपुट आधारित टेंडर प्रणाली (लांग टर्म) विकसित हुई। 5 से 9 वर्ष तक सड़क को दुरुस्त रखने के लिए एजेंसियों को काम सौंप दिया जाता है। वो उस तय अवधि तक सड़क को मेंटेन रखती हैं और एवज में उन्हें भुगतान होता रहता है।

इस प्रणाली में चयनित एजेंसी के इंजीनियर और कर्मी रोड एंबुलेंस के माध्यम से लगातार सड़कों को ठीक करते रहते हैं। संबंधित क्षेत्र के पथ निर्माण विभाग के इंजीनियर नियमित अंतराल पर सड़क का निरीक्षण करते हैं और समय पर क्षतिग्रस्त रोड नहीं बनाने पर एजेंसी के भुगतान में कटौती होती है।

15% तक लागत कम होगी
सड़क मेंटेन करने के लिए इस्टीमेट बनेगा, प्रशासनिक स्वीकृति ली जाएगी और तब मेंटेनेस वर्क शुरू होगा। संभव है कि तब तक डैमेज सड़क का एरिया और बढ़ जाए। वैसे, पथ निर्माण विभाग बांका, गया और मुजफ्फरपुर जिले से छोटे-छोटे टुकड़ों में टेंडर कर सड़क को दुरुस्त रखने का निर्णय ले चुका है। विभाग खुद मेंटेनेंस करेगा तो 15 फीसदी तक लागत कम हो जाएगी पर सड़कों को बनाने में समय लगेगा।

खुद मेंटेनेंस में समय लगेगा
ओपीआरएमसी प्रणाली के नोडल पदाधिकारी रह चुके और रिटायर्ड चीफ इंजीनियर रमेश कुमार सिंह बताते हैं कि विभाग के डिविजनों मे तैनात इंजीनियर रोड टूटने के बाद उसका इस्टीमेट बनाएंगे, फिर ऊपर के अधिकारी से प्रशासनिक स्वीकृत लेंगे। तब तक डैमेज सड़क का एरिया बढ़ता रहेगा। ठेकेदारो का पेमेंट भी डिविजन स्तर पर होगा। अगर एक सड़क दो-तीन डिविजनों में पड़ेगी तो उसकी अलग-अलग प्रक्रिया होगी।

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