बड़ों के संपर्क में आकर बच्चे हो रहे कोरोना पॉजिटिव:संक्रमित बच्चों में मिल रहे सर्दी-बुखार के लक्षण; बड़ों की अपेक्षा जल्दी हो रहे ठीक

पटना4 महीने पहले
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कोरोना की तीसरी लहर में बड़ों के संपर्क में आकर बच्चे भी कोरोना संक्रमित हाे रहे हैं। दूसरी लहर में बच्चों में संक्रमण का ग्राफ कम था। लेकिन इस बार काफी मामले आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस बार बड़ों के संपर्क में आने वाले बच्चों में लक्षण भी देखने को मिल रहा है। बिहार में 12 प्रतिशत संक्रमितों की उम्र 0 से 19 वर्ष की है। पटना में बच्चों के संक्रमण के मामले अधिक हैं, लक्षण वाले भी अधिक हैं। हालांकि राहत की बात है कि बच्चों को लेकर जो आशंका थी वैसी स्थिति नहीं है, बच्चे बड़ों से जल्दी कोरोना मुक्त हो रहे हैं।

पटना में बच्चों के संक्रमण का कारण
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर सुमन बताते हैं कि यहां आबादी घनी है और अधिकतर घरों में इतना स्पेस नहीं होता है। अपार्टमेंट कल्चर के कारण पूरा परिवार दो से तीन कमरों में सिमटा रहता है। ऐसे में घर के किसी एक व्यक्ति के संक्रमित होने से पूरे परिवार में खतरा बढ़ जाता है। कोई संक्रमित घर में आ गया तो भी समस्या बढ़ जाती है।

डॉक्टर सुमन बताते हैं कि दूसरी लहर में बच्चे संक्रमितों के संपर्क में आकर भी पॉजिटिव कम होते थे, लेकिन इस बार यह संख्या बढ़ गई है। इस बार संक्रमितों के संपर्क में आने वाले भी संक्रमित होते हैं।

वैक्सीनेशन नहीं होने से बढ़ा खतरा
पटना AIIMS के ट्रामा इमरजेंसी और कम्युनिटी मेडिसिन के HOD डॉ. अनिल कुमार का कहना है कि- 'बच्चों में वैक्सीनेशन नहीं होने से खतरा है। खतरा तब और बढ़ जाता है जब जांच कराने वाला हर चौथा व्यक्ति कोरोना संक्रमित है। बच्चों को लेकर विशेष सावधानी की जरूरत है।' IGIMS (इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान) के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर मनीष मंडल का कहना है कि- 'बच्चों में संक्रमण के मामले आ रहे हैं। लेकिन वह ऐसे नहीं कि उन्हें अस्पताल आना पड़े। वह घर में ही स्वस्थ्य हो रहे हैं।

अधिकतर बच्चों को तो दवाएं भी देने की जरूरत नहीं पड़ रही है।' पटना की सिविल सर्जन डॉ विभा सिंह का कहना है कि पटना में बच्चों में कोरोना संक्रमण के मामले आए लेकिन हॉस्पिटल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं पड़ी है।

दिसंबर और जनवरी में बढ़ा बच्चों में संक्रमण
पटना में दिसंबर और जनवरी माह में बच्चों में संक्रमण का मामला बढ़ा है। 26 दिसंबर को पटना में 5 साल के दो और एक 4 व एक 3 साल के बच्चे संक्रमित मिले थे। एक दिन बाद ही एक दो साल और 5 साल की बच्ची कोरोना पॉजिटिव मिली। इस बीच एक 12 साल की बच्ची भी कोरोना पॉजिटिव पाई गई।

इसके बाद 3 साल और 11 साल दो बच्चे कोरोना पॉजिटिव पाए गए। एक जनवरी को 8 साल, 7 साल, 15 साल, 5 साल, 6 साल, एक जन्मजात में कोरोना का संक्रमण पाया गया। जनवरी में हर दिन आने वाले मामलों में बच्चों की रिपोर्ट अधिक संख्या में पॉजिटिव आ रही है।

बच्चों को लेकर राहत की बात
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमन का कहना है कि तीसरी लहर की सबसे राहत की बात है कि अधिकतर बच्चों में लक्षण आने के बाद भी गंभीर स्थिति नहीं है। बच्चों को इस बार बड़ों के संपर्क में आने के बाद संक्रमण अधिक हो रहा है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में बच्चों में ऐसे ही लक्षण हैं। दूसरी लहर में बच्चे संपर्क में आने के बाद भी संक्रमित नहीं हुए लेकिन तीसरी लहर में बच्चों के संक्रमण की संख्या बढ़ है। 30 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो बड़ों के संपर्क में आने के बाद संक्रमित हो जा रहे हैं।

उम्र के अनुसार संक्रमण का स्तर

  • 0 से 9 वर्ष - 1.9% संक्रमण
  • 10 से 19 वर्ष - 10 %
  • 20 से 29 वर्ष - 28.0%
  • 30 से 39 वर्ष - 23.9%
  • 40 से 49 वर्ष - 15.2%
  • 50 से 59 वर्ष - 12.5%
  • 60 प्लस - 8.6%