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वैशाली जिले की पुलिसिंग:शहर की सुरक्षा कूड़े में, लूट की रकम बोरे में

हाजीपुर5 दिन पहले
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बैंक लूट के बाद बोरे में भरकर रुपए लेकर जाते अपराधी। - Dainik Bhaskar
बैंक लूट के बाद बोरे में भरकर रुपए लेकर जाते अपराधी।
  • हाजीपुर में दिनदहाड़े बैंक के भीतर से बिहार की सबसे बड़ी लूट की घटना को अपराधियों ने दिया अंजाम

बीते एक साल से वैशाली जिले में अगर अपराध की बड़ी घटनाएं कम हुई है तो आप ये न समझें की पुलिस अपना काम अच्छे से कर रही है। बल्कि इसकी हकीकत यह है कि लगातार चल रहे लॉकडाउन की वजह से बाजार बंद है और अपराधियों को एक जगह ज्यादा कैश नहीं मिल पा रहा है। इस बात की सच्चाई इससे भी पता चलती है कि बीते 8 जून को ही पूर्ण लॉकडाउन हटाया गया और उसके मात्र दो दिन बाद ही हाजीपुर में 1.19 करोड़ की लूट नगर थाना क्षेत्र के बैंक से हो गई। बस आप फिर से इतना ही समझें कि अपना शहर अपराधियों के गन प्वाइंट पर है।

यहां शहर की सुरक्षा कूड़े में और लूट की रकम बोरे में है। अपराधियों के हौसले वैशाली जिले में टूट ही नहीं पा रहे। हालांकि इसका एक कारण नहीं है। एसपी ऑफिस, डीआईओ और थानों में लगातार 5 से 10 साल तक के अधिकारी और पुलिसकर्मी इसी जिले में जमे हैं। कइयों का अपराधियों के साथ गठजोड़ हो इससे इनकार नहीं किया जा सकता। जयंत हत्याकांड, प्रमुख हत्याकांड, इंडस्ट्रीयल एरिया दोहरा हत्याकांड, शराब कांड सहित कई ऐसे मामले हैं जिसमें पुलिस का भी नाम उछाला गया। कई गैंग को संरक्षण देने से लेकर उसे पालने तक के आरोप लगते आए हैं।

बीते कुछ सालों से जिले में बीट पुलिसिंग तो छोड़िए साधारण पुलिसिंग भी नहीं हो रही। कोरोना का कहर कम होने के साथ ही एक बार फिर मांद से बाहर आकर अपराधियों ने लूटपाट की घटना को अंजाम देना शुरू कर दिया है। गुरुवार की सुबह करीब सवा दस बजे भीड़भाड़ व हमेशा व्यस्त हाजीपुर-महनार रोड में जढुआ स्थित एचडीएफसी बैंक शाखा से, पांच की संख्या में हथियारबंद अपराधियों ने 01 करोड़ 19 लाख 60 हजार की बड़ी रकम आसानी से लूटकर फरार हो गए।

गन पॉइंट पर सभी को किया कवर
डे शिफ्ट में ड्यूटी पर प्राइवेट सेक्युरिटी गार्ड सोनपुर के रहने वाले रंजन कुमार तैनात था। वे पांचों अपराधी गार्ड को धक्का दे अंदर दाखिल होने के साथ ही पिस्टल निकाल लिया। चार लुटेरे शाखा-कर्मियों को गन पॉइंट पर लेकर कवर किया। पांचवां गेट पर कब्जा जमाया। वह बाहर की गतिविधियों पर नजर रख रहा था। कोई अंदर आए तो गन पॉइंट पर लेकर उसे कवर किया जा सके। बताया गया कि उस वक्त शाखा का रेगुलर कस्टमर मगुराही निवासी विपिन कुमार डिपॉजिट करने कैश काउंटर पर खड़ा था। 47500 की रकम उसने काउंटर पर रखी थी। लुटेरों ने सबसे पहले विपिन की रकम पर कब्जा जमाया। चारों लुटेरे बैंककर्मियों के शीशे के बने केबिन में जाकर कब्जा जमाया। बैंक मैनेजर श्वेता व कैशियर को कवर कर कैश रूम खुलवाया। बताया गया कि दो लड़के पिट्ठू बैग के साथ थे। दोनों ने बैग से प्लास्टिक की बोरी निकाली और रकम भर लिया।

घटनास्थल पर पुलिस के पहुंचने में लगे 22 मिनट
10.22 से 10.38 के बीच लुटेरे अपना काम कर निकल चुके थे। बैंक मैनेजर या कोई स्टाफ तत्काल पुलिस को जरूर सूचना दी होगी, बावजूद पुलिस को पहुंचने में 22 मिनट का समय लगा। नगर थाना ने अपनी पेट्रोलिंग टीम को पहले मौके पर भेजा। उसके काफी देर बाद इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष पीओ पर पहुंचे। मिले 22 मिनट लुटेरों के फरार होने के लिए काफी था। बताया गया कि लूट की घटना को अंजाम देने के बाद लुटेरे बिदुपुर-महनार की ओर ही भागे थे।

एक घंटे के भीतर पुलिस उच्चाधिकारियों का जमावड़ा
नगर थाना पुलिस के मौके पर पहुंचने के अगले 08 मिनट के भीतर ही एसपी मनीष, एसडीपीओ राघव दयाल मौके पर पहुंचकर अपने स्तर से जांच-पड़ताल की। एसपी ने अपने सीनियर कमिश्नरी और राज्य पुलिस मुख्यालय को भी बड़ी लूट की वारदात की सूचना दी। उनकी पहल का नतीजा रहा कि अगले एक से डेढ़ घंटे के भीतर करीब 12.32 बजे तिरहुत जोन के आईजी गणेश कुमार घटनास्थल पर पहुंच गए। इसके बाद सीआईडी के एसपी शैलेश कुमार सिन्हा, रत्नमणि आदि पहुंचे थे। कमिश्नरी मुख्यालय से फॉरेंसिक विभाग की टीम भी पहुंची।

एक बार फिर जिले में पुलिस नाकाबंदी की खुली पोल
कोई डेढ़ साल पहले ही नगर व सदर थाना के नाक के नीचे से हाजीपुर यादव चौक स्थित मुथूट फाइनेंस के ब्रांच से दिनदहाड़े करीब 30 किलो सोना लूट की घटना राष्ट्रीय सुर्खियां बनी थी। वह अबतक के देश की सबसे बड़ी सोना लूट की घटना थी। सोना लूट की घटना को अंजाम देने वाले लुटेरे बाइक सवार ही थे। पिस्टल और कट्टे के बल पर ही उनलोगों ने देश की सबसे बड़ी सोना लूटकांड को अंजाम दिया था। तब पुलिस की नाकाबंदी व्यवस्था पर खुद पुलिस डिपार्टमेंट में ही सवाल उठे थे। पुलिस को अत्याधुनिक संचार व्यवस्था से लैस करने के बाद भी जिले की सीमाओं को तत्काल सील करने की बात तो दूर रही शहर की नाकाबंदी तक नहीं हो पा रहा है। सांप के बिल में समा जाने के बाद लकीर पीटने की तर्ज पर पुलिस जांच-छापामारी करने का उपक्रम करती नजर आती है। बताएं कि लूट व बड़ी वारदातों की शुरू हुई श्रृंखला के बाद उसे काबू जिला स्तर पर क्यूआरटी, डीआईयू, मोबाइल सर्विलांस टीम ऐसे कई टीम गठित किए गए।

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