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IGIMS के डॉक्टरों की इस ट्रिक से हारा कोरोना:कोविड के इलाज में लगे डॉक्टरों की टीम हर 24 घंटे पर साथ बैठ कर करती है मंथन, मरीजों के रिव्यू के लिए नाम दिया- 'कोविड वार रूम'

पटना13 दिन पहले
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वार रूम में मंथन करते IGIMS के डॉक्टर। - Dainik Bhaskar
वार रूम में मंथन करते IGIMS के डॉक्टर।

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) के डॉक्टरों ने कोरोना से जंग जीतने का एक नया ट्रिक तैयार किया है। 15 अप्रैल से ही वह इस पर काम कर रहे हैं, जिससे हर दिन संक्रमित मरीजों को राहत मिली है। ट्रिक है कोरोना के इलाज में लगे डॉक्टरों का हर 24 घंटे में एक साथ होना, जिसे कोविड वार रूम का नाम दिया गया है। इसमें हर विभाग के HOD एक-एक कर मरीजों की रिव्यू करते हैं। इस ट्रिक से संक्रमितों के रिकवरी में रफ्तार आई है।

ऐसे बनाया गया प्लान
IGIMS के चिकित्सा अधीक्षक डॉ मनीष मंडल का कहना है कि कोरोना काल में विभागों और डॉक्टरों के साथ मेडिकल स्टाफ में भी दूरी हो गई। इस कारण इलाज पर थोड़ा असर दिखने लगा। इधर, कोरोना भी पीक पर था और मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही थी। ऐसे में एक प्लान तैयार किया गया, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि अब हर दिन 24 घंटे में एक बार कोरोना मरीजों की पूरी अपडेट लेकर विभागों के HOD एक साथ बैठेंगे और फिर इलाज पर मंथन होगा। IGIMS में 15 अप्रैल से यह व्यवस्था लागू हो गई। इस मंथन में कोरोना पर वार को लेकर हर स्तर से प्लान तैयार होता है।

कोरोना को मात देने में सफल रहा प्लान
पिछले 24 घंटे में क्या और हुआ और आने वाले 24 घंटे में क्या तैयारी है, इस पर मंथन होता है। यह प्लान इतना सफल रहा कि डॉक्टरों का 24 घंटे में एक बार मंथन कोरोना को तेजी से मात दिया। डॉ मनीष मंडल का कहना है कि जब हर विभाग के डॉक्टर एक साथ बैठते हैं तो इलाज आसान होता है। हर पहलू से मंथन होता है। 15 अप्रैल से लगातार कोरोना वार रूम में मरीजों को वायरस के चंगुल से मुक्त करने के लिए मंथन हो रहा है।

सीरियस मरीजों पर होता है मंथन
IGIMS के कोविड वार रूम में प्रतिदिन दोपहर 12 से दोपहर 1 बजे तक बैठक चलती है, जहां सभी वार्ड ड्यूटी फैकल्टी डॉक्टर चिकित्सा अधीक्षक की अध्यक्षता में एक साथ बैठते हैं और अपने वार्ड में भर्ती मरीजों के बारे में चर्चा करते हैं। रोगियों को किसी भी तरह की समस्या होती है तो तत्काल समाधान किया जाता है। हर मुद्दों का तत्काल SMS द्वारा समाधान किया जाता है। यदि कोई जांच में समस्या है या जांच की रिपोर्ट में दिक्कत है तो उसका भी समाधान किया जाता है। कोविड वार रूम में मरीजों से संबंधित सभी समस्याओं का ध्यान एक स्थान पर होता है। इस ट्रिक को शुरू करने के बाद मरीजों के इलाज में आसानी हुई है और रिकवरी का प्रतिशत और मरीजों के कोरोना को मात देने का समय भी घटा है।

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