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अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक:संघ की बैठक में लिया गया सभी तरह के भेदभाव को खत्म करने का फैसला, कहा- अतिपिछड़े वर्गों को वंचित रखने से देश के प्रगति, एकता, संविधान व लोकतंत्र को होगा भारी खतरा

पटना2 महीने पहले
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अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक। - Dainik Bhaskar
अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक।

अखिल भारतीय पिछड़ा वर्ग संघ की कार्यकारिणी समिति की बैठक में संघ तथा विभिन्न सामाजिक व बौद्धिक संगठनों के प्रमुख संचालकों ने बैठक आयोजित किया। जहां देशोत्थान हेतु पिछड़ी- अतिपिछड़ी जातियों की जातिगत जनगणना व मंडल आयोग को पूर्णतः उनके आबादी के अनुसार लागू कराने के लिए सभी भेदभाव को खत्म कर व्यवस्था परिवर्तन की दूसरी लड़ाई शुरू करने का फैसला किया गया।

इस बैठक में स्थानीय महात्मा फुले संस्थान में संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंद्र कुमार सिंह चंदापुरी की अध्यक्षता में आयोजित कार्यकारिणी समिति के प्रस्ताव में जातीय चेतना को वर्गीय चेतना में बदलने हेतु महात्मा फूले, पेरियार, डॉ. अंबेडकर व त्यागमूर्ति चंदापुरी के विचारधारा पर चलने के लिए आम राय बनी।

प्रस्ताव में न्यायपालिका ,कार्यपालिका, विधायिका सहित सभी प्राइवेट सेक्टरों में भी जनसंख्या के अनुसार पिछड़ी- अतिपिछड़ी जातियों को आरक्षण दिए जाने के लिए बड़ी लड़ाई शुरू करने की जोरदार हिमायत हुई।

अध्यक्षीय संबोधन में चंदापुरी ने कहा कि आरक्षण का मुद्दा इसलिए नहीं है कि यह एक आर्थिक उत्थान का साधन है बल्कि यह मौजूदा सामाजिक व्यवस्था में परिवर्तन और आबादी के अनुसार सभी क्षेत्रों में हिस्सेदारी का मामला है, जिससे पिछड़े- अतिपिछड़े वर्गों को वंचित रखने का प्रयास देश के प्रगति, एकता संविधान व लोकतंत्र के लिए भारी खतरा है। एनडीए 1 की केंद्रीय सरकार द्वारा 2021 की जनगणना में पिछड़े-अगड़े व अन्य सभी धर्मों के जातियों की गणना कराने के आदेश के बाद भी जातिगत जनगणना ना होना घोर चिंता का विषय है।

उन्होंने आगे कहा कि 'संघ ने विगत 14 फरवरी 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ओबीसी के 27% अनुपातिक आरक्षण को बढ़ाकर आबादी के अनुसार 52% आरक्षण देने हेतु संविधान के अनुच्छेद 15(4) व 16(4) में संशोधन करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित कराने एवं कानून बनाने संबंधित 8 सूत्री प्रस्ताव को भेजकर उनसे शीघ्र नीतिगत फैसले लेने का आग्रह करते हुए कहा गया था जिस प्रकार आपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर आबादी के अनुसार 10% आरक्षण अगड़ी जातियों को देने के वक्त लिया था वैसे ही मंडल आयोग को पूर्णत लागू करने के संदर्भ में लिया जाए। अब तक इस संदर्भ में कुछ नहीं किया जाना- अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक कदम है।'

प्रारंभ में संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहन भगत मालाकार उर्फ भंते जी ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संघ के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु एकजुट होकर संघर्ष करनी पड़ेगी। मंच संचालन संघ के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव पवनदेव चंद्रवंशी ने की। बैठक में संघ के झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष बसंत चौहान, महिला अध्यक्षा श्रीमती शांति शाह,प्रदेश महासचिव शंभू कुशवाहा, महासचिव शशि भूषण पासवान, युवा अध्यक्ष ओम प्रकाश यादव आदि उपस्थित रहे।

बैठक को बौद्धिक चिंतक डॉ दिलीप कुमार, डॉ एम पाल, डॉ धर्मेंद्र ,डॉ दयानंद गुप्ता, कर्पूरी सेना के प्रधान महासचिव मुन्ना निषाद व महासचिव शिव शंकर निषाद ,नोनिया सेवा समिति बिहार प्रदेश के अध्यक्ष दर्शन कुमार, प्रदेश कुम्हार प्रजापति समन्वय समिति के अध्यक्ष दानी प्रजापति, बढ़ई - विश्वकर्मा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष केशव मिस्त्री व महासचिव महेंद्र शर्मा, कानू महासभा के प्रदेश महासचिव चंद्रिका प्रसाद, पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर नूरहसन आजाद, धानुक उत्थान महासभा के प्रवक्ता विनोद बिहारी मंडल, भारतीय मोमिन फ्रंट के राष्ट्रीय सचिव नसीम अहमद कलाम अंसारी, बिहार प्रदेश कर्मचारी पिछड़ा - अति पिछड़ा पदाधिकारी संघ के प्रोफेसर कामेश्वर पंडित व उपाध्यक्ष वीरेंद्र ठाकुर, कानू विकास संघ के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रिका प्रसाद, कृष्ण नंदन साव सचिव, संयुक्त नाई एकता महासंघ के अध्यक्ष जीवेश कुमार, बिहार प्रदेश सिंदुरिया - कठवानिया महासभा के अध्यक्ष डॉ सुभाष गुप्ता आदि ने संबोधित किया।

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