पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कार्यक्रम का आयोजन:दिलीप कुमार ने सिनेमा को बनाया अर्थवान, दर्शकों के दिलों में रहेंगे

पटना20 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार को बिहार के सैंड आर्टिस्ट रूपेश ने बुधवार को किलकारी बिहार बाल भवन में अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी। । - Dainik Bhaskar
दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार को बिहार के सैंड आर्टिस्ट रूपेश ने बुधवार को किलकारी बिहार बाल भवन में अनोखे अंदाज में श्रद्धांजलि दी। ।
  • ट्रेजडी किंग को याद करते हुए राजधानी पटना में हुए कई कार्यक्रम

ट्रेजडी किंग सुपर स्टार दिलीप कुमार के निधन से राजधानी पटना में भी लोगों मर्माहत रहे। उनको याद करते हुए संस्थाओं और संगठनों ने कार्यक्रम किए। जन संस्कृति मंच और प्रतिरोध का सिनेमा की ओर से बुधवार को दिवंगत अभिनेता दिलीप कुमार की याद में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्कृति मंच के राज्य सचिव सुधीर सुमन ने कहा कि जब तक हिंदी सिनेमा रहेगा, तब तक दिलीप कुमार दर्शकों के दिलों में जीवित रहेंगे।

उन्होंने भारतीय सिनेमा को अर्थवान बनाया। वे ऐसे अभिनेता थे, जिन्हें दर्शकों की कई पीढ़ियों ने एक साथ चाहा और पसंद किया। प्रतिरोध का सिनेमा के संतोष झा ने कहा कि वे एक ऐसे अभिनेता थे, जिनसे भारत-पाकिस्तान दोनों की जनता बेहद मोहब्बत करती थी। एक ओर उन्हें यदि भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिला, तो वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान का सर्वोच्च नागरिक सम्मान निशान-ए-इम्तियाज से भी उन्हें सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि दी गई।

लीची के जूस के दीवाने थे ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार

अरविंद कुमार| मुजफ्फरपुर बॉलीवुड अभिनेता ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार का मुजफ्फरपुर की लीची से गहरा लगाव था। मुंबई में उन्होंने अकबर अली डिपार्टमेंटल स्टोर में जूस पीते ही कहा था -यह तो लूची का जूस है। लोगों को लूची का जूस पिलाने के लिए तुम मेरे बांद्रा हिल रोड की जॉनसन दवा दुकान के सामने ऐसा ही एक डिस्पेंसर मशीन लगाओ।

मैं इसका प्रमोशन करूंगा। दिलीप कुमार को याद करते हुए लीची जूस की एक कंपनी के प्रोपराइटर केपी ठाकुर ने बताया कि 1982 में यहां से लीची जूस ले जाकर अकबर अली डिपार्टमेंटल स्टोर के सामने एक डिस्पेंसर मशीन लगवाया। वहां आने वाले लोगों को लीची जूस पिलवाया करता था। एक दिन दिलीप कुमार वहां पहुंचे। उस जमाने में लोग उन्हें देखने तथा अपनी दुकान तक बुलाने के लिए व्याकुल रहते थे। मैं भी एक ग्लास लीची जूस लेकर उनके पास पहुंचा। उनसे जूस पीने का आग्रह किया। लेकिन जूस पीते ही दिलीप कुमार खुश हो गए। उन्होंने एक ग्लास और मंगवाया तथा एक कार्टन का आर्डर दिया।

खबरें और भी हैं...