पटना के डॉ. रजनीकांत बिना दवा के करते हैं इलाज:लाइफ स्टाइल से परेशान हैं 50% लोग, तेजस्वी से लेकर काजल रघवानी का कर चुके हैं इलाज

पटना7 महीने पहलेलेखक: प्रणय प्रियंवद

लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों से खास तौर से शहरी लोग परेशान हैं। बड़े शहरों में परेशानी ज्यादा है। कई सेलिब्रेटी भी परेशान हैं। कुर्सी पर बैठ कंप्यूटर पर काम करने वाले 50 फीसदी लोग इस बीमारी से परेशान हैं।पटना में भास्कर ने उस काइरोप्रैक्टिक विशेषज्ञ डॉ. रजनीश कांत से बात की, जिन्होंने हाल ही में पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव सहित भोजपुरी अभिनेत्री काजल रघवानी का भी इलाज किया। तेजस्वी को बैक, नेक और नी यानी घुटने में परेशानी थी।

भोजपुरी एक्ट्रेस काजल रघवानी का इलाज करते डॉ. रजनीश कांत।
भोजपुरी एक्ट्रेस काजल रघवानी का इलाज करते डॉ. रजनीश कांत।

ज्यादातर मरीज कमर का नस दब जाने, पैरों में दर्द की शिकायत लेकर आते हैं

डॉ. रजनीश कांत ने भास्कर से बातचीत में बताया, 'कमर का नस दब जाने, पैरों में दर्द होने, झंझनाहट होने, सूनापन होने और सिर में दर्द होने की शिकायत के साथ ज्यादातर मरीज आ रहे हैं। वैसे लोगों में यह शिकायत ज्यादा दिख रही है जो 8-10 घंटे कुर्सी पर बैठ कर काम करते हैं।

नेक पेन, बैक पेन ऐसे लोगों में आम बीमारी है। मोटे गद्दे पर सोने से और ऊंचा तकिया लेने से भी परेशानी होती है। सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब पेनकीलर हर दिन खाना पड़ता है। पेन कीलर का असर हमारी आंतों पर पड़ता है।'

15 वर्षों से परेशान जर्मनी के जावेद इलाज कराने पटना आए

हम जब पटना के बेऊर स्थित डॉ. रजनीश कांत के सेंटर पर पहुंचे तो जर्मनी के जावेद इलाज कराने पहुंचे हुए थे। उन्होंने भास्कर को बताया, 'वे 15 वर्षों से बैक पेन और गर्दन में दर्द से परेशान हैं। कई बार दोनों हाथ शून्य हो जाते हैं। काफी पेनकीलर भी उन्होंने अब तक खाया है।

डॉ. रजनीश कांत ने गर्दन की हड्डियां कई जगह से बोन सेटिंग की। रीढ़ की कई हड्डियों को भी कई जगहों से बोन सेटिंग की। कमर, घुटने, एड़ी के पास बोन सेटिंग की।' जावेद ने बताया कि उन्हें थोड़ी राहत तो मिल रही है, लेकिन देखना यह होगा कि स्थायी रुप से दर्द खत्म होता है कि नहीं।

राबड़ी आवास में तेजस्वी यादव का इलाज करते डॉक्टर रजनीश
राबड़ी आवास में तेजस्वी यादव का इलाज करते डॉक्टर रजनीश

मसल्स को ठीक कर बोन को रिएलाइन्मेंट करते हैं

डॉ. रजनीश कांत बताते हैं, 'मसल्स को ठीक कर बोन को रिएलाइन्मेंट करते हैं। यह कम से कम तीन सीटिंग में करते हैं। मरीज को सलाह दी जाती है कि एक सप्ताह तक कोई दूसरी एक्सरसाइज नहीं करें। हम अपनी तरफ से मरीज को किसी तरह की दवा नहीं खिलाते हैं। कुछ मरीजों को तो जल्दी राहत मिल जाती है पर कुछ को थोड़ा लंबा इलाज करना पड़ता है।'

भास्कर ने डॉक्टर से पूछा कि लोगों को कैसे बैठना, कैसे चलना और कैसे सोना चाहिए ?

वे बताते हैं, 'स्पाइन को लगातार स्ट्रेट कर नहीं बैठें। एक पोस्चर में लगातार एक घंटे से ज्यादा नहीं बैठें। एक घंटे लगातार बैठ गए तो जरा सा चल लें। न हैवी न ज्यादा कड़ा गद्दा लें। ऊंचा तकिया नहीं लें। सात से आठ घंटे तक ऊंचे तकिए पर सोने से नेक पर काफी प्रेशर हो जाता है। वे सलाह देते हैं कि सोते समय तकिया नहीं लें तो ज्यादा अच्छा है। लेना ही चाहते हैं तो बहुत पतला तकिया लें। लांग ड्राइव में बीच में थोड़ा आराम लें। बैक सपोर्ट भी ले सकते हैं।'

जनवरी के अंत में लगेगा कैंप!

भास्कर से उन्होंने बताया कि हैदराबाद, मुंबई और पटना में महीने के अंत में कैंप लगाते हैं। यहां मरीजों का फ्री इलाज किया जाता है। उन्होंने कहा कि बहुत गरीब मरीज हो तो उनका फ्री इलाज करते हैं। कोरोना की स्थिति ठीक रही तो पटना में जनवरी के अंत में कैंप लगाया जाएगा।