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भास्कर ग्राउंड रिपोर्ट:भू अधिग्रहण और फंड की कमी के कारण ढाई साल में मेट्रो के 8 पिलर ही दिख रहे

पटना2 महीने पहले
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इस रफ्तार से पटना मेट्रो में कम-से-कम 5 साल का वक्त लगना तय है। - Dainik Bhaskar
इस रफ्तार से पटना मेट्रो में कम-से-कम 5 साल का वक्त लगना तय है।

पटना मेट्रो का प्रोजेक्ट वैसे तो करीब तीन साल पिछड़ चुका है, लेकिन अब धीरे-धीरे इसके निर्माण कार्य में तेजी दिखने लगी है। कॉरिडोर-2 का निर्माण कार्य जीरोमाइल से मलाही पकड़ी के बीच 5.6 किमी के दायरे में चल रहा है। इस शुरुआती हिस्से में करीब 40 फीट ऊंचे 8 पिलर खड़े हो गए हैं। इस इलाके में एलिवेटेड मेट्रो का निर्माण होना है। महीनेभर में करीब 24 पिलर बनकर तैयार होने का दावा निर्माण कंपनी के अफसरों ने किया है।

ऐसे में करीब ढाई साल पहले शुरू हुए पटना मेट्रो प्रोजेक्ट में पहली बार शहर के लोगों को बड़े-बड़े पिलर दिखने लगे हैं। परिवहन की इस आधुनिक और सुगम व्यवस्था को देखते हुए राजधानीवासियों की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि जानकारों का कहना है कि जिस रफ्तार से पटना मेट्रो का काम चल रहा है, इसे देखते हुए अभी कम से कम पांच साल का वक्त लगना तय है। जबकि फरवरी-2019 में शुरू हुए मेट्रो प्रोजेक्ट की सुविधा साल 2024 तक मिलने का दावा किया गया था।

केंद्र और राज्य के पैसे से ही काम चल रहा, जायका से फंड नहीं आया

मेट्रो की मुख्य बातें

  • 13 फरवरी, 2019 को केंद्र सरकार ने दी मेट्रो की स्वीकृति
  • 25 सितंबर, 2019 को दिल्ली मेट्रो रेल निगम के साथ एग्रीमेंट
  • 22 सितंबर 2020 को मुख्यमंत्री ने मेट्रो परियोजना का काम शुरू कराया
  • 32.49 किलोमीटर लंबाई होगी मेट्रो के दोनों कॉरिडोर की
  • 17.93 किमी लंबा है दानापुर-मीठापुर तक ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर
  • 14.56 किमी लंबा है पटना स्टेशन-आइएसबीटी तक नार्थ-साउथ कॉरिडोर
  • 24 स्टेशन हैं दोनों कॉरिडोर में, पटना स्टेशन व खेमनीचक इंटरचेंज स्टेशन
  • 13,590 करोड़ की अनुमानित लागत है पटना मेट्रो की
  • 20-20% हिस्सेदारी होगी केंद्र व राज्य सरकार की
  • 60 फीसदी राशि वित्तीय संस्थाओं से लोन के रूप में लिया जाना है।

पर्याप्त फंड नहीं मिलने से रफ्तार धीमी

पर्याप्त फंड नहीं मिलने से निर्माण प्रभावित हो रहा है। दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन के अफसरों की मानें तो जापानी कंपनी जायका से फंड अभी तक नहीं मिल सका है। इसके चलते निर्माण कार्य की रफ्तार धीमी है। बता दें कि 13, 590 करोड़ रुपए की लागत मेट्रो प्रोजेक्ट को पूरा करने में लगनी है। फिलहाल केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाली राशि से ही मेट्रो का काम चल रहा है।

जमीन अधिग्रहण में सक्रियता नहीं
मेट्रो के रूट में 12 स्टेशनों के लिए जमीन अधिग्रहण का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। पटना मेट्रो रेल कारपोरेशन ने जिला प्रशासन को दर्जनभर स्टेशन बनाने के लिए पूरा प्रस्ताव तैयार करके दिया है। सरकारी के साथ ही निजी जमीन का भी अधिग्रहण करना है। मेट्रो डिपो के लिए 76 एकड़ जमीन का अधिग्रहण भी पूरा नहीं हो सका है।

अंडरग्राउंड खुदाई का इंतजार
पटना जंक्शन से गांधी मैदान, अशोक राजपथ होते राजेंद्रनगर स्टेशन तक अंडरग्राउंड मेट्रो का निर्माण होना है। इसका कार्य अभी भी पूर्ण तौर से शुरू नहीं हुआ है। सभी हिस्से में एक साथ काम नहीं होने से प्रोजेक्ट के लंबे समय तक फंसने के भी आसार हैं।

दो कॉरिडोर हाेंगे
कॉरिडोर-1 के तहत दानापुर-मीठापुर-खेमनीचक होगा। इसकी कुल लंबाई 17.933 किमी होगी। वहीं, कॉरिडोर-2 के तहत पटना रेलवे स्टेशन-गांधी मैदान-पाटलिपुत्र बस टर्मिनल होगा। इसकी कुल लंबाई 14.564 किमी होगी। इस रूट मं 7.926 किमी भूमिगत होगा।