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केंद्र सरकार बदलाव की तैयारी में:उपभोक्ताओं को 24 घंटे क्वालिटी पावर देने पर बिजली कंपनी को मिलेंगे नंबर, फेल हुए तो केंद्र रोक लेगा पैसा

पटना3 महीने पहलेलेखक: ब्रज किशोर दूबे
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केंद्र सरकार ने बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए राशि जारी करने का फॉर्मूला बदला।- प्रतीकात्मक इमेज - Dainik Bhaskar
केंद्र सरकार ने बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए राशि जारी करने का फॉर्मूला बदला।- प्रतीकात्मक इमेज

बिजली के क्षेत्र में सुधार और विकास के लिए केंद्र कई योजनाओं के जरिए राज्य को भारी राशि देता रहा है। लेकिन, अब इस राशि के खर्च का हिसाब नहीं, बल्कि उससे हुए फायदे का मूल्यांकन किया जाएगा।

उपभोक्ताओं को 24 घंटे क्वालिटी पावर देना बिजली कंपनी की मजबूरी होगी, क्योंकि मूल्यांकन के सभी मापदंडों को पूरा करने में यह काम खुद-ब-खुद पूरा हो जाएगा। 31 दिसंबर तक केंद्र को चार साल का पूरा एक्शन प्लान जाएगा। केंद्र से इसपर पहली किस्त राशि जारी होगी। राशि जिस-जिस सुधार मद में मिलेगी, उसके सकारात्मक परिणाम के आधार पर नंबर मिलेंगे।

कुल 100 अंकों में इसे बांटा जाएगा। कुल 60 प्रतिशत नंबर मिले तो आगे राशि मिलेगी, वरना केंद्र सरकार पैसा रोक लेगी। 2016 से अबतक केंद्र से बिजली में सुधार के लिए 8100 करोड़ रुपए आ चुके हैं, इसके बावजूद नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में 28 फीसदी और साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी में 35 प्रतिशत लाइन लॉस है।

रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम से बदलेगा पूरा सिस्टम
यह केंद्र सरकार की रिवेम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम योजना है। इस योजना के तहत साउथ और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को अलग-अलग डीपीआर बनानी है। केंद्र से योजना की मंजूरी के बाद बिजली सुधार मद में 60 फीसदी राशि केंद्र सरकार देगी और 40 फीसदी पैसा राज्य को देना होगा। उस पैसे से हुए काम के मूल्यांकन पर ही आगे का सारा काम निर्भर होगा।

केंद्र सरकार ने बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर 3 लाख करोड़ का बजट रखा है। राज्य के 1.70 करोड़ उपभोक्ताओं को 24 घंटे क्वालिटी पावर दिलाने के लिए बनी डीपीआर की मंजूरी पर बिहार की राशि तय होगी।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक्शन प्लान को मिलेगी मंजूरी
बिजली के क्षेत्र में सुधार के लिए मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण की अध्यक्षता में कमेटी का गठन हुआ है। इसमें विकास आयुक्त आमिर सुबहानी, वन विभाग के सचिव दीपक सिंह, ऊर्जा सचिव संजीव हंस आदि शामिल हैं। यह कमेटी दोनों पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों के एक्शन प्लान की समीक्षा कर कैबिनेट को मंजूरी के लिए भेजेगी। कैबिनेट से मंजूरी के बाद 31 दिसंबर तक ऊर्जा मंत्रालय को भेजा जाएगा।

फोकस-1 : 2025 तक लाइन लॉस को 15% तक उतारना है
योजना में बिहार का सबसे बड़ा फोकस एरिया ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन (टीएंडडी) लॉस को कम करना है। अभी साउथ को 35 और नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी को 28 फीसदी लाइन लॉस है। इसमें सुधार से उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध, बिना फ्लैक्च्वेशन के क्वालिटी बिजली मिलेगी।

हरेक उपभोक्ताओं के घरों के अलावा डिस्ट्रीब्यूशन ट्रांसफॉर्मर और 11 केवी फीडर पर उसकी क्षमता के हिसाब से स्मार्ट मीटर लगेगा, ताकि लाइन लॉस की असल जगह का पता चलता रहे। सारे खुले एलटी तार को कवर्ड वायर में बदला जाएगा।

फोकस- 2: 10 साल आगे की संभावित खपत के मुताबिक तैयारी
अगले 10 साल की संभावित खपत का आकलन कर पावर सब स्टेशन, ग्रिड बनाने या पुराने की क्षमता बढ़ाने का भी काम हो सकेगा, हालांकि इसकी डीपीआर जमीन की उपलब्धता के बाद बनेगी।

फोकस- 3: कृषि फीडर को घरेलू सप्लाई से अलग करना
इस योजना के तहत कृषि फीडर को पूरी तरह से अलग किया जाना है। अभी घरेलू उपभोक्ताओं के साथ कृषि के लिए बिजली सप्लाई एक ही 11 केवी के फीडर से हो रही है। इससे दोनों तरह के उपभोक्ताओं को फायदा होगा।
फोकस-4: उपभोक्ता रहेंगे अपडेट, .. जवाब देंगे अफसर
पूरी योजना लागू होने के बाद एक क्लिक पर उपभोक्ताओं की पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। यदि बिजली बंद रही तो अधिकारियों से कारण पूछा जाएगा। मुख्यालय से मॉनिटरिंग होगी, ताकि मूल्यांकन में गड़बड़ न हो।

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