सेटिंग नहीं तो कैंसिल ही करा दिया:सेटर्स के पास तय समय पर नहीं पहुंचा BPSC का पेपर तो IAS के दोस्त ने किया खेल

पटना8 महीने पहलेलेखक: अमित जायसवाल
IAS अधिकारी रंजीत कुमार सिंह दाएं।

8 मई को बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के C सेट का क्वेश्चन पेपर ऐसे ही वायरल नहीं हुआ था। एक सोची-समझी साजिश के तहत उसे वायरल कराया गया था। ताकि एग्जाम को कैंसिल कराया जा सके। यह बात जानकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा, पर असलियत यही है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस प्वाइंट पर भी जांच कर रही है। EOU की जांच टीम ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, इसके पीछे एक बड़ी वजह सामने आई है।

आशंका है कि सेटर्स ने जिन कैंडिडेट्स से लाखों रुपए लेकर एग्जाम शुरू होने से पहले क्वेश्चन पेपर पहुंचाने का कमिटमेंट किया था, वो फेल हो गया था। क्वेश्चन पेपर तय समय से काफी लेट उन तक पहुंचा था। इस कारण सेटर्स का शातिराना खेल ही बिगड़ गया। तब जाकर क्वेश्चन पेपर को एक प्लान के तहत वायरल करा दिया गया। आश्चर्य वाली बात यह है कि जिन लोगों ने भी पेपर को वायरल किया, वो सभी सेटर्स गैंग के पार्ट निकले। EOU की SIT इनके शातिराना खेल की जांच अभी लगातार कर रही है।

गैंग के लोगों के बीच हुई गड़बड़ी

EOU की जांच टीम वैसे तो कई सवालों के जवाब तलाश रही है। मगर, एक सवाल ऐसा था, जिसका जवाब जानना बेहद जरूरी था। सवाल यह है कि जो लोग खुद सेटर्स गैंग के पार्ट हैं, वही लोग एग्जाम कैंसिल क्यों कराना चाह रहे थे? जांच के दौरान पता चला कि ऐन मौके पर सेटर्स गैंग से जुड़े लोगों के बीच आपस में ही कुछ गड़बड़ी हो गई। तय समय की जगह काफी लेट से क्वेश्चन पेपर इनके पास पहुंचा।

IAS अधिकारी के दोस्त और सरकारी स्कूल के टीचर कृष्ण मोहन सिंह से जब पूछताछ की गई तो उसने टीम को बरगलाने की कोशिश की। लेकिन इस बात के सबूत EOU के हाथ लग चुके थे कि वो सेटर्स गैंग का एक्टिव मेंबर है। टीम ने जब उससे जानना चाहा कि उसने क्वेश्चन पेपर क्यों वायरल किया, तो उसका जवाब था कि वो देश का अच्छा नागरिक है।

जांच के दायरे में IAS

मंगलवार को भास्कर से बातचीत में EOU की जांच टीम ने साफ कर दिया कि IAS अधिकारी रंजीत कुमार सिंह को अभी क्लीन चिट नहीं दिया गया है। जांच के दायरे में वो हैं। हां, ये बात अलग है कि IAS अधिकारी के खिलाफ अभी EOU के पास कोई ठोस सबूत नहीं है। पर सवाल बना हुआ है कि जिस दिन पेपर लीक हुआ, उस दिन कृष्ण मोहन सिंह और IAS अधिकारी के बीच 10 बार फोन पर बात क्यों हुई? बातचीत की टाइमिंग लंबी है। इसलिए सवाल यह भी बरकरार है कि इनके बीच बातें क्या हुई? EOU की SIT इस पर भी जांच कर रही है। इस मामले में अभी बहुत सारी गिरफ्तारियां होनी है। इसमें आगे कौन-कौन लोग आएंगे? यह सब स्पष्ट हो जाएगा।

दोस्त की लगवाई नौकरी

सूत्र बताते हैं कि IAS अधिकारी और गिरफ्तार कर जेल भेजे गए कृष्ण मोहन सिंह की दोस्ती करीब 18 साल पुरानी है। इनकी दोस्ती साल 2004 से ही है। दिल्ली में दोनों एक साथ पढ़ाई कर चुके हैं। आरोप यह भी लग रहे हैं कि करीब 3 साल पहले वैशाली के रहनेवाले कृष्ण मोहन सिंह की सरकारी स्कूल में कांट्रैक्ट पर नौकरी भी IAS अधिकारी के माध्यम से ही लगी है। सूत्रों का दावा है कि यह बात तब की है, जब IAS अधिकारी शिक्षा विभाग में पोस्टेड थे। EOU की जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि IAS के दोस्त का कनेक्शन फरार चल रहे सेटर आनंद गौरव और उसके गैंग में शामिल लोगों से है।