UP की वजह से बिहार NDA में किचकिच:UP में टूटा समीकरण, अब बिगड़ सकती है बिहार में NDA की सूरत

पटना8 महीने पहले
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सत्ता के साझीदारों के बीच सम्राट अशोक को लेकर शुरू हुई किचकिच अब शराबबंदी के विवाद पर आकर ठहर गई है। भाजपा, जदयू और मांझी की पार्टी इन मुद्दों पर क्यों उलझी है यह समझना मुश्किल भले ही दिख रहा हो, लेकिन यूपी की राजनीति इनसे जुड़े सारे सवालों को जवाब दे रही है।

क्या योगी की जिद बनीं है बिहार के संजय की मुसीबत

जदयू के नेता केसी त्यागी ये UP में भाजपा-जदयू टूटने का बयान जारी कर दिया है। उनके मुताबिक, UP में जदयू अकेले दम पर चुनाव लड़ने जा रही है। जदयू के NDA में शामिल नहीं हो पाने की सबसे बड़ी वजह वहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को माना जा रहा है। कहा यह जा रहा है कि बिहार भाजपा के सहयोगियों को गठबंधन में शामिल नहीं करने का वीटो योगी ने लगा रखा है।

ऐसे में बिहार में भाजपा और जदयू के रिश्ते के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। कभी सम्राट अशोक का मुद्दा तो कभी शराबबंदी कानून। इन मुद्दों पर जदयू के नेता भाजपा पर आक्रामक हैं। इस तल्खी को जीतन राम मांझी की पार्टी हम और बढ़ा रही है। मांझी मौका मिलते ही भाजपा पर बिहार से लेकर यूपी तक बयानी हमले कर रहे हैं। बीते कुछ रोज जदयू और हम की तरफ से भाजपा पर किए गए बयानी हमलों को इस तरह देखिए...

11 जनवरी : जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने सम्राट अशोक पर विवादित टिप्पणी मामले पर आवाज उठाई। उन्होंने लिखा कि लेखक के पुरस्कारों को वापस लेना चाहिए और भाजपा दया प्रकाश सिन्हा को पार्टी से निष्कासित करें।

13 जनवरी : उपेन्द्र कुशवाहा ने कहा कि आई वाश मत कीजिए, संजय जी। जले पर नमक मत छिड़किए। सीधे- सीधे अवार्ड वापसी की मांग का समर्थन कीजिए। वरना ऐसे दिखावटी मुकदमा का अर्थ लोग खूब समझते हैं।

13 जनवरी : जीतन राम मांझी ने कहा कि कुछ लोग सम्राट अशोक का अपमान इसलिए कर रहें हैं कि वह पिछड़ी जाति से हैं ।

14 जनवरी : जीतन राम मांझी ने (योगी के दलित के घर में खाने पर) कहा कि चुनाव आया तो नेता दलितों के घरों पर भोजन करने जाएंगे। कब तक हमारे लोगों का निवाला खाएंगे।

14 जनवरी : जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले दया प्रकाश सिन्हा से सम्मान वापस लेने की मांग की गई है। कुछ भाजपा नेताओं को इस मांग पर मिर्ची लगी है और वे लोग अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। मतलब साफ है- दाल में कुछ काला है।

14 जनवरी : जदयू प्रवक्ता अभिषेक झा ने कहा कि संजय जायसवाल जी आपके लंबे प्रवचन का जवाब देने का कोई अर्थ नहीं है। 12 जनवरी को आपने एक बयान जारी किया था। उस दिन आपने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को कमजोर करने वाली बात कही थी।

15 जनवरी : हम के प्रवक्‍ता दानिश रिजवान ने कहा कि भाजपा के नेता जिस तरह से एनडीए के घटक दलों पर बयान दे रहे हैं इस पर भाजपा का शीर्ष नेतृत्‍व अविलंब हस्‍तक्षेप करे, वरना स्थिति और भयावह हो जाएगी।

भाजपा के नेता भी कर रहे पलटवार

हम और जदयू के इन बयानी हमलों पर भाजपा के कुछ नेता पलटवार कर रहें हैं। खुद प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने भी अभिषेक झा के बयान पर लिखा कि मीडिया से बाहर निकलिए, शराबबंदी की सच्‍चाई पता चल जाएगी। वहीं, भाजपा के नेता और सरकार के मंत्री नितिन नवीन ने भी झा को मर्यादा में रहने की नसीहत दी है। भाजपा भले ही जवाब देने की कोशिश कर रही है, लेकिन खुद उसे भी पता है कि ये गुस्सा बेवजह नहीं है। ऐसा भी नहीं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जदयू की तरफ से हो रही इस बयानबाजी का पता नहीं।

भाजपा प्रवक्ता संतोष पाठक ने अपने सोशल मीडिया के जरिए जदयू नेता ललन सिंह को अपने पुराने बयान की याद दिलाई। उनके मुताबिक ललन सिंह ने 2017 में कहा था हम उस लायक ही नहीं हैं कि हम वहां कोई सीट लें सकें। हमारे मांगने से वोट कहां मिलने वाला है? संतोष पाठक के इस बयान यह साफ है कि बिहार एनडीए में खरमास खत्म होने से पहले जो उथल-पुथल दिख रही है। वो असल में यूपी का ही असर है।