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ऑनलाइन संगोष्ठी:जीवन संरक्षण में छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर भी प्रत्येक व्यक्ति दे सकता है योगदान

पटना8 दिन पहले
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पारिस्थितिकी तंत्र हमारी रोज़मर्रा की जिंदगी में बहुत सारी ज़रूरतों की पूर्ति करती है। इनका संरक्षण और पुनरुद्धार जरूरी है। इसलिए इसके संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को ज़िम्मेदारी लेनी होगी और रोज़मर्रा की जिंदगी में छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखकर वे योगदान दे सकते हैं। जैसे कि ज़रूरत न होने पर लाइट बंद कर देना। ऐसी आदतें विकसित की जाएं तो यह पर्यावरण संरक्षण की तरफ बड़ा सामूहिक प्रयास हो सकता है। ये बातें पद्मश्री प्रो. आर.के. सिन्हा ने दक्षिण बिहार केन्द्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित विशेष ऑनलाइन संगोष्ठी में कहीं।

जन संपर्क पदाधिकारी मो. मुदस्सीर आलम ने बताया कि विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशानुसार विशेष वेबिनार का आयोजन किया था। मुख्य वक्ता पद्मश्री प्रो. सिन्हा ने अपने संबोधन में पारिस्थितिकी तंत्र के पुनर्स्थापन और सतत विकास पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि पौधरोपण कार्यक्रम के अंतर्गत स्थानीय वृक्ष की प्रजातियों का उपयोग किया जाना चाहिए और यही सही मायने में पुनरुद्धार है। उन्होंने यह सलाह दी कि विश्वविद्यालय को आगे आकर गांवों में पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने के लिए काम करना चाहिए। सीयूएसबी के कुलपति प्रो. हरिश्चंद्र सिंह राठौर ने कहा कि सीयूएसबी पर्यावरण संरक्षण के लिए कटिबद्ध है और कैंपस विकास में पर्यावरण के अनुकूल निर्माण में अनेक पहलुओं का ध्यान रखा गया है। पर्यावरण विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. उमेश कुमार सिंह ने वेबिनार की महत्ता को साझा करते हुए बताया कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा आने वाला दशक इकोसिस्टम रेस्टोरेशन के रूप में क्यों समर्पित किया जाने वाला है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वर्तमान समय चेतने और इस विषय पर गंभीरता से ज़्यादा- से-ज़्यादा काम करने का है। कार्यक्रम का संचालन पर्यावरण विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेश कुमार रंजन के नेतृत्व में विद्यार्थियों ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्राध्यापक प्रो. प्रधान पार्थ सारथी ने किया।

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