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पटना में फर्जी एक्सचेंज का खुलासा:विदेशी कॉल इस एक्सचेंज में लोकल बन जाती थी, गल्फ- पाकिस्तान से आती थी ज्यादातर कॉल; ATS ने दो भाइयों को पकड़ा

पटना7 दिन पहले
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गिरफ्तार दोनों भाइयों को ले जाती एटीएस की टीम। - Dainik Bhaskar
गिरफ्तार दोनों भाइयों को ले जाती एटीएस की टीम।

राजधानी पटना के अनीसाबाद इलाके में फर्जी एक्सचेंज का खुलासा हुआ है। एटीएस ने छापेमारी कर दो लोगों को गिरफ्तार किया है। सेंट्रल इंटेलिजेंस की इनपुट के आधार पर पुलिस और एटीएस ने यह कार्रवाई की है। इस फर्जी एक्सचेंज से विदेशों में फोन किए जाते थे और दूसरे देशों से फोन आते भी थे। इस मामले में एक्सचेंज संचालक अनिल चौरसिया और सुशील चौरसिया को गिरफ्तार किया गया है। सूत्रों के अनुसार अनिल को पहले भी गांधी मैदान थाना क्षेत्र में फर्जी एक्सचेंज के मामले में गिरफ्तार किया गया था।

चूंकि, मामला विदेशों के फोन कॉल से जुड़ा है इसलिए खुफिया एजेंसियां लंबे समय से इसको ट्रेस करने में लगी थीं। इस मामले में गर्दनीबाग थाने में देर रात इंडियन टेलीग्राफ एक्ट और आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ। मामले की जांच पटना पुलिस के साथ-साथ कई जांच एजेंसियां कर रही हैं।

संचालक अनिल चौरसिया और सुशील चौरसिया दोनों भाई हैं और गोपालगंज के बैकुंठपुर के रहने वाले हैं। एक्सचेंज में काम करने वाली चार लड़कियों और अन्य स्टाफ को पुलिस ने हिरासत में लिया है। एक्सचेंज पर गल्फ देशों और पाकिस्तान से डेटा कॉल आती थी। विशेषज्ञों की माने तो इस तरह के एक्सचेंज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक होते हैं।

VOIP टेक्नोलॉजी पर काम करता है एक्सचेंज

फेक एक्सचेंज VOIP टेक्नोलॉजी पर काम करता है। विदेश में बैठा व्यक्ति इंटरनेट कॉल करता है और यह एक्सचेंज उसे सरकार के गेटवे से बचाते हुए वॉयस कॉल में बदल देता है। इंटरनेशनल कॉल लोकल में तब्दील हो जाती है।

अनिल सबीउल्लाह के लिए करता है काम
साल 2017 में गांधी मैदान से एक फेक एक्सचेंज का भंडाफोड़ किया था। तब सुशील की गिरफ्तारी हुई थी व अनिल फरार हो गया था। जांच में पता चला कि दोनों भाई सिलिगुड़ी में रहने वाले सबीउल्लाह के लिए काम करते हैं।

चार साल में तीन फेक एक्सचेंज पकड़े गए
पिछले चार साल में पटना में यह तीसरा फेक एक्सचेंज पकड़ा गया है। 2017 के बाद पिछले साल 2020 के जनवरी महीने में भी गांधी मैदान के सालिमपुर अहरा से फेक एक्सचेंज चलाते हुए दो लोगों को पुलिस ने पकड़ा था।

गल्फ व पाकिस्तान से आते थे कॉल, एक साथ 64 लोगों से होती थी बात छापेमारी कर टीम ने बीएसएनएल के 64 सिम, दर्जन भर राउटर और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। बरामद उपकरण विदेशी हैं। पूछताछ में दोनों भाईयों ने पुलिस को बताया कि उनका एक्सचेंज इंटरनेशनल कॉल यानी डेटा कॉल को वाॅयस कॉल में बदल देता है। इससे कॉल करने वालों को कम पैसा लगता है। सबसे अहम होता है पीआरआई (प्राइमरी रेट इंटरफेस)। पीआरआई ही डेटा कॉल को वॉयस कॉल में बदलता है। इस एक्सचेंज से एक साथ 64 लोगों को बात करवाई जा सकती है। शुरुआती जांच में यह बात आई है कि अधिकांश फोन गोपालगंज, सीवान, दरभंगा जाते थे।

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