युवक की गर्दन से निकल रहा था खाना:एक्सीडेंट में टूट गई थी हड्‌डी, खाना-पानी बाहर निकलने लगा; 6 डॉक्टरों ने 6 घंटे ऑपरेशन कर बचाया

पटनाएक महीने पहले
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युवक के गर्दन का वो हिस्सा जहां से खाना निकल रहा था। - Dainik Bhaskar
युवक के गर्दन का वो हिस्सा जहां से खाना निकल रहा था।

एक 30 साल के युवक की गर्दन में होल हो गया था। वह कुछ भी खाता था, गर्दन में बने होल के रास्ते सब बाहर आ जाता था। उसकी यह हालत एक रोड एक्सीडेंट के बाद हुए गर्दन की हड्‌डी के ऑपरेशन से हुई थी। भागलपुर का रहने वाला युवक इस नई समस्या से परेशान हो गया था। खाना-पानी पेट में जाने की बजाए गर्दन से बाहर आने की इस जटिल समस्या को डॉक्टर भी नहीं समझ पा रहे थे। बिहार में पहली बार ऐसा मामला आया था।

पटना में काफी जांच के बाद डॉक्टरों को टूटी हड्‌डी के ऑपरेशन में लगाए गए इम्प्लांट में बने फेस्टुला की जानकारी हुई और फिर 6 घंटे के ऑपरेशन में फूड पाइप को गर्दन में बने होल से अलग किया गया। पटना के प्रमुख गैस्ट्रो सर्जन डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि युवक 20 दिन पहले रोड एक्सीडेंट में घायल हो गया था। गर्दन की हड्‌डी टूटने के कारण भागलपुर में ही डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर इम्प्लांट लगाया। भागलपुर में स्थानीय अस्पताल में उसकी गर्दन से रीढ़ की हड्डी तक का ऑपरेशन किया गया। इम्प्लांट लगाकर ठीक करने की कोशिश की गई। इस सर्जरी को ACDP ( एनटिरयर सर्वाइकल डिस्क फिक्सेशन) कहा जाता है।

जो भी खाता था गर्दन से बाहर आ जाता था
डॉ. संजीव का कहना है कि मरीज ऑपरेशन के बाद घर चला गया, लेकिन उसके साथ नई समस्या हो गई। वह कुछ भी खाता था तो गर्दन के रास्ते ऑपरेशन वाली जगह से सब बाहर आ जाता था। जहां ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने टाका लगाया था वहां से खाना पानी सब कुछ बाहर आ जाता था। पेट में न तो पानी जाता था और न ही खाना, इस कारण से मरीज की हालत और खराब हो गई थी। भागलपुर से मरीज को पटना के C.N.S. हॉस्पिटल लाया गया। जहां डॉ. सौरभ चौधरी (ऑर्थो एवं स्पाइन स्पेशलिस्ट) की निगरानी में भर्ती कराया गया।

डॉक्टर जिन्होंने सफलतापूर्वक युवक का ऑपरेशन किया।
डॉक्टर जिन्होंने सफलतापूर्वक युवक का ऑपरेशन किया।

जांच में पता चला फूड पाइप का कनेक्शन
CNS हॉस्पिटल में कई जांच कराई गई और फिर सीनियर गैस्ट्रो सर्जन डॉ. संजीव कुमार से परामर्श लिया गया। जांच में यह कंफर्म हो गया कि गर्दन की हड्‌डी के ऑपरेशन में लगे इंप्लांट की वजह से खाने की फूड पाइप (इसोफेगस ) में नेक्रोसिस हो गया है और वहां बड़ा फिस्टुला बना हुआ है। पटना के प्रमुख स्पाइन सर्जन डॉ. सौरभ चौधरी ने इस चौंकाने वाले मामले में मरीज को ठीक करने के लिए डॉक्टरों की एक टीम बनाई और डॉ. संजीव कुमार सीनियर गैस्ट्रो सर्जन से इसे लीड करने काे कहा।

बिहार का पहला केस था, इसलिए डॉक्टर भी परेशान
बिहार में ऐसा मामला पहली बार आया था। इस कारण से सर्जरी को लेकर डॉक्टर भी घबराए थे। टीम ने काफी सावधानी से काम किया। डॉ संजीव का कहना है कि इस तरह का केस बहुत ही कम रिपोर्टेड है, सर्जरी की जटिलता को देखते हुए सीनियर अनास्थेटिस्ट डॉ. अजय कुमार तथा गैस्ट्रो सर्जन डॉ. नसीम अख्तर को भी टीम में लगाया गया। 6 घंटे की सर्जरी में ACDF में जो इम्प्लांट लगाया था, उसे हटाया गया और इसोफेगस फिस्टुला को रिपेयर किया गया तथा स्नोकिलोमैस्टोयाड फलैप से इसे कवर किया गया।

डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी सफल रही और मरीज 10 दिन में सामान्य होकर मुंह से खाना खाने लगेगा। डॉ. संजीव कुमार का कहना है कि यह पहला केस है, जो बिहार में ऑपरेट किया गया।