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वीआरएस क्यों पर गुप्तेश्वर पांडेय बोले:पिछले कुछ दिनों से मेरी निष्पक्षता पर संदेह किया जा रहा था इसलिए पद छोड़ दिया, पांडेय जी ने बजाई राजनीति की सीटी, बोले-पॉलिटिक्स पाप थोडे़े ही है

पटनाएक वर्ष पहले
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  • पांडेय बोले- 34 साल के कॅरियर में 15 साल सीएम नीतीश कुमार के साथ काम किया, उन्होंने किसी मामले में न फोन किया न दबाव डाला

बिहार की राजनीति में ब्यूरोक्रेसी का तड़का नया नहीं है। ताजा मामला गुप्तेश्वर पांडेय का आया है लेकिन पहले भी कई आईएएस और आईपीएस चुनावी राजनीति में किस्मत आजमा चुके हैं। हालिया चुनावी राजनीति की बात करें तो इस बार डीजी रैंक के दो पूर्व अधिकारी किस्मत आजमाने को तैयार हैं। पिछले दिनों रिटायर हुए सुनील कुमार ने जदयू का दामन थामा है।

उनके चुनाव लड़ने की पूरी संभावना है। दूसरी तरफ गुप्तेश्वर पांडेय हैं। उन्होंने वीआरएस ले ली है। माना जा रहा है कि वह भी इस बार के चुनाव में उतर सकते हैं। चर्चा है कि पांडेय वाल्मीकिनगर लोस सीट से उपचुनाव लड़ेंगे। वैद्यनाथ महतो के निधन से यहां उपचुनाव होगा।

जब दागी चुनाव लड़ सकते हैं तो 34 साल का बेदाग कॅरियर वाला क्यों नहीं

गुप्तेश्वर पांडेय ने कहा कि जिनके खिलाफ कई मुकदमे हैं जब वे चुनाव लड़ सकते हैं तो एक किसान का बेटा क्यों नहीं लड़ सकता जिसका 34 साल का कॅरियर बेदाग हो। चुनाव लड़ना कोई पाप है क्या? अनैतिक है क्या? असंवैधानिक है क्या? डीजीपी के पद से वीआरएस लेने बाद गुप्तेश्वर पांडेय ने बुधवार को खुलकर बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी। वे सोशल मीडिया पर लाइव थे। बचपन से लेकर वीआरएस लेने तक की पूरी कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि मैं किसी के लिए चुनौती नहीं, मैं तो जनता की सेवा करना चाहता हूं।

दो पूर्व डीजीपी पहले भी उतर चुके हैं मैदान में

बिहार के पूर्व डीजीपी आशीष रंजन सिन्हा भी नालंदा से चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि वे चुनाव हार गए थे। मोहम्मद शहाबुद्दीन के खिलाफ एक्शन को लेकर सुर्खियों में रहे पूर्व डीजीपी डीपी ओझा भी माले के टिकट पर बेगूसराय से लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं पर हार का सामना करना पड़ा।

आरके सिंह सफल ताे कई दूसरे नाैकरशाह हारे

2014 के लोकसभा चुनाव में बिहार कैडर के दो पूर्व आईएएस अधिकारी आरके सिंह और केपी रमैया भी प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थे। केंद्रीय गृह सचिव रह चुके आरके सिंह ने रिटायरमेंट के बाद आरा लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और वह जीते भी। दूसरी ओर केपी रमैया वीआरएस लेकर चुनावी मैदान में उतरे थे। जदयू ने उन्हें सासाराम लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया था, लेकिन वे चुनाव हार गए। हालांकि आरके सिंह पिछले लोकसभा चुनाव में भी आरा से भाजपा के विजयी उम्मीदवार बने और फिलहाल केंद्र में मंत्री भी हैं।

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