पूर्व मंत्री भीम सिंह का किताब के जरिए सामाजिक न्याय:कर्पूरी आरक्षण को बिहार में भाजपा ने करवाया था लागू ,फौजियों पर दिया था विवादित बयान

पटना4 महीने पहले
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पूर्व मंत्री भीम सिंह की किताब का लोकार्पण करते प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल। - Dainik Bhaskar
पूर्व मंत्री भीम सिंह की किताब का लोकार्पण करते प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल।

भाजपा के नेता और पूर्व मंत्री भीम सिंह ने एक किताब लिखी है । इस किताब का लोकार्पण शनिवार को भाजपा के प्रदेश कार्यालय में किया गया है। सामाजिक न्याय भाजपा बनाम कांग्रेस, शीर्षक से प्रकाशित इस छोटी से किताब में पिछड़ी-अतिपिछड़ों जातियों के लिए भाजपा की ओर से किए गए कामों को बताया गया है। भीम सिंह की इस किताब को भाजपा अब पूरे बिहार में बांटेंगी ।

7 साल बाद किताब के जरिए आए हैं सामने

भीम सिंह लगभग 7 सात बाद 16 पन्नों की एक किताब के जरिये सामने आए हैं । सामाजिक न्याय भाजपा बनाम कांग्रेस के नाम से लिखी गई इस किताब में भीम सिंह ने भाजपा के कामों की चर्चा की है । ये चर्चा में खासतौर से उस कर्पूरी फॉर्मूला की चर्चा की गई है, जिसके तहत गरीब सवर्ण को 3 प्रतिशत , महिलाओं को 3 प्रतिशत , पिछड़ी जातियों को 8 प्रतिशत और अत्यंत पिछड़ी जातियों को 12 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है । भीम सिंह की इस किताब के मुताबिक बिहार में कर्पूरी आरक्षण फॉर्मूला को लागू करवाने में भाजपा यानि तब की जनसंघ का ही असल योगदान है ।

विवादित बयान देना भीम सिंह के राजनीतिक करियर पर पड़ा था भारी

2015 में भाजपा आए भीम सिंह, कभी नीतीश कुमार के खास हुआ करते थे । नीतीश कैबिनेट में वो पथ निर्माण मंत्री जैसा महत्वपूर्ण विभाग भी संभाल चुके हैं । लेकिन भीम सिंह का पूरा राजनीतिक करियर उनके एक बयान ने डूबो दिया । दरअसल, भीम सिंह ने साल 2015 में मीडिया से बातचीत में कहा था कि सैनिक शहीद होने लिए ही आर्मी में भर्ती होते हैं। उन्होंने ये बयान जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में हुए हमले में मारे गए सैनिकों के लिए दिया था।

हालांकि, इसके बाद में उन्होंने इस बयान पर माफी मांग ली थी। लेकिन, इस बयान ने उनका पीछा नहीं छोड़ा और अंतत: उनको नीतीश कुमार का साथ छोड़ना पड़ा । 2015 में जब भाजपा-जदयू अलग चुनाव मैदान में थे तो भीम सिंह सम्मान पाने की चाहत में भाजपा में शामिल हो गए । अतिपिछड़ा समाज से आनेवाले भीम सिंह भाजपा में बीते 7 साल से हैं । बावजूद इसके वो आज भी पार्टी में केवल कार्यसमिति सदस्य है । मतलब यह कि भीम सिंह चाहे जदयू में रहे या भाजपा में उनका राजनीतिक करियर उनके विवादित बयान के बाद नीचे ही गिरता रहा ।

पूरे बिहार में बांटी जाएगी भीम सिंह की किताब को

भीम सिंह की लिखी इस किताब को भाजपा के कार्यकर्ता पढ़ेंगे । इसका मकसद ये है कि भाजपा के कार्यकर्ता , भाजपा ने अतिपिछड़ा समाज के लिए किये गए कार्यो को जान सकें और फिर उसे आम लोगों के सामने रख सकें । भीम सिंह की ये किताब भाजपा के विस्तार की एक नीति है, जिसके जरिए वो जदयू के अतिपिछड़ा वोटबैंक में सेंधमारी की कोशिश कर रही है ।