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वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज:बेस्ट रिजल्ट देने वाली छात्राएं पढ़ रहीं हैं जर्जर भवन में, नैक नहीं होने से कॉलेज को यूजीसी का कोई फंड नहीं मिलता

पटना22 दिन पहलेलेखक: अमित कुमार
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राज्यभर में शिक्षा(बीएड) की पढ़ाई में अग्रणी पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज की छात्राएं आज जर्जर भवन में पढ़ने को मजबूर हैं। 1940 में उक्त कॉलेज की स्थापना के बाद से ही यहां से बीएड की पढ़ाई करना शिक्षा की छात्राओं के लिए गौरव की बात माना जाता है। कॉलेज का अपना एक अलग क्रेज है। वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज की छात्राएं राज्य स्तर पर होने वाले एंट्रेंस टेस्ट की टॉपर्स होती हैं।

साथ ही पटना विश्वविद्यालय की फाइनल परीक्षा में भी यहीं की छात्राएं टॉप करती रही हैं। यहां की छात्राएं सबसे अधिक सीटेट, पीएचडी आदि करती हैं और पूरे देश में शिक्षा प्रदान कर अलख जगा रही हैं। लेकिन वर्तमान में यहां की छात्राओं को सुविधाओं के अभाव में खतरे मोल लेकर पढ़ाई करनी पड़ रही है।

विवि और सरकार की उपेक्षा की वजह से एक बार भी नहीं करा सका नैक- उक्त कॉलेज पर न तो विवि प्रशासन का ध्यान है और न ही सरकार का, जबकि उसके ठीक सटे मगध महिला कॉलेज दिन दूनी रात चौगुणी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। दूसरी तरफ शिक्षा की पढ़ाई कराने वाला दरियापुर में लड़कों की शिक्षा की पढ़ाई कराने वाले पटना ट्रेनिंग कॉलेज इससे सुविधाओं में काफी आगे है। कॉलेज को नैक की मान्यता भी एक बार प्राप्त हो चुकी है जबकि पटना वीमेंस कॉलेज आज तक एक बार भी नैक मान्यता नहीं प्राप्त कर सका है। नैक नहीं होने से कॉलेज को यूजीसी या केंद्र सरकार का भी कोई फंड नहीं मिल रहा है।

जगह-जगह से टूटकर गिर रही छत की प्लास्टर, इसी में चलता है क्लास
पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज की छत जगह-जगह से टूटकर गिर रहा है। इसी में कक्षाएं आयोजित होती रहती हैं। खतरा लेकर पढ़ना छात्रों की मजबूरी है। कॉलेज का अपना एक छोटा सभागार सह क्लासरूम है लेकिन उसकी हालत भी जर्जर है। यूं कहें कि पूरा भवन ही जर्जर है। कॉलेज की प्राचार्या के द्वारा कई बार सीनेट में भी कॉलेज की खराब स्थिति और इसमें फंड की कमी के संबंध में ध्यान इंगित किया गया था लेकिन अब तक कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाये गये हैं।

वर्षों से नहीं कराया गया रंगरोगन
कॉलेज का एक छोटा स्पोर्ट्स ग्राउंड है लेकिन वहां जंगल-झाड़ हैं। वहीं ऐसा लगता है वर्षों से कॉलेज का रंगरोगन नहीं हुआ है। उक्त ग्राउंड के रेनोवेशन के लिए भी यूनिवर्सिटी इंजीनियर के द्वारा इस्टीमेट बनाकर दिया हुआ है लेकिन अब तक काम शुरू नहीं हुआ है।

कुछ जगहों की मरम्मत हुई है
कॉलेज भवन का अधिकतम भाग जर्जर हो चुका है। जगह से जगह से छत के प्लास्टर टूटकर गिरते हैं। कुछ एक जगह जो ज्यादा खतरनाक थे, उसे मरम्मती कराया गया है लेकिन वह पर्याप्त नहीं है।
प्रो मुनव्वर जहां, प्राचार्या, पटना वीमेंस ट्रेनिंग कॉलेज, पटना विश्वविद्यालय