सरकारी कर्मी अब सिर्फ 3 बार प्रतियोगी परीक्षा दे सकेंगे:सरकारी कर्मियों के लिए परीक्षा देने की तय हुई सीमा, कर्मचारी संघ ने फैसले को बताया गलत

पटना11 दिन पहले
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बिहार सरकार के नए आदेश से बिहार के साढ़े 4 लाख सरकारी कर्मी सकते में हैं। मामला प्रतियोगिता परीक्षा देने के अवसरों की तय हुई सीमा से जुड़ा है । 13 जनवरी को सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक बिहार के सरकारी कर्मचारी केवल 3 बार प्रतियोगिता परीक्षाओं में शामिल हो सकेंगे।

सरकार के इस आदेश को कर्मचारी संघ ने तुगलकी फरमान बताया है, संघों को ये समझ नहीं आ रहा कि इसके पीछे का मामला क्या है। आइए हम समझने की कोशिश करते हैं ।

डेढ़ लाख से अधिक कर्मी आदेश से होंगे प्रभावित

बिहार सरकार के नए आदेश के बाद अब बिहार के सरकारी कर्मचारी 3 बार से ज्यादा प्रतियोगिता परीक्षाएं नही दे पाएंगे । सरकार की इस पाबंदी के पीछे क्या वजह ये सरकार की तरफ से जारी आदेश में नही बताया गया । कहा ये जा रहा है कि कर्मियों के परीक्षा के लिए ली जानेवाली छुटि्टयों से काम प्रभावित होता है । लेकिन कर्मचारी संघ इसे पूरी तरह से खारिज करते हैं । बिहार सचिवालय सेवा संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार के मुताबिक परीक्षा के लिए ली जानेवाली 1 से 2 दिन की छुट्‌टी से काम कैसे प्रभावित हो सकता है , और इतनी छुट्‌टी तो कर्मचारी लेते रहेंगे।

सीएम को भेजा जाएगा ज्ञापन

वहीं, लंबे अवकाश की बात है तो वो स्टडी लीव में ली जाती है, जो इस आदेश से प्रभावित नहीं होगी । संघ ने इस आदेश का विरोध करने का फैसला लिया है और इसके खिलाफ मुख्यमंत्री , मुख्य सचिव और सामान्य प्रशासन विभाग में ज्ञापन देने की बात कही है । संघ से सामने आए आंकड़ो के मुताबिक बिहार में 4.50 लाख सरकारी सेवक हैं , इसमें से डेढ़ लाख से अधिक 45 तक आयु के हैं । यही वह लोग हैं जो इस आदेश से सीधे प्रभावित होंगे । ऐसे में हम इस पर चुप नहीं रह सकते ।

बीपीएससी के लिए आये थे रिकॉर्ड आवेदन

बिहार की प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए बड़ी संख्या में आवेदन आते रहे हैं । बिहार लोक सेवा आयोग की 67 वीं प्री परीक्षा में तो 1 पद के लिए 800 से अधिक आवेदन आ गये थे । रिकॉर्ड संख्या में आई इन आवेदनों की वजह से आयोग ने परीक्षा की तारीख आगे बढ़ा दी थी । विपक्ष ने इसे बेरोजगारी की बिगड़ी स्थिति का बताया था । लेकिन सच है ये कि बीपीएससी की परीक्षाओं में बड़ी संख्या में वैसे परीक्षार्थी भी होते हैं जो पहले से सरकारी नौकरियों में होते हैं और अफसर बनने की चाह में ये परीक्षाएं देते हैं ।

समाजशास्त्रियों के मुताबिक बेहतर पद पाने की चाहत गलत नहीं है। लेकिन यह भी सच है इससे सरकारी सेवक अपने काम के प्रति फोकस नही रहते हैं । समाजशास्त्री एन के चौधरी के मुताबिक सरकार का मकसद असल में शायद यही है कि सरकारी कर्मियों को अपने काम के प्रति समर्पित किया जाए । हालांकि कर्मचारियों की मांग को देखते हुए अवसरों की संख्या सरकार को बढ़ानी चाहिए ।

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