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नवरात्र पर विशेष:बिहार में पहली बार 586 महिलाएं दारोगा बनीं, जानिए क्या है जीवनमंत्र; कमियों को ही प्रगति का औजार बना लिया

पटना11 दिन पहले
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रविता, दारोगा, पूर्णिया। (सीतामढ़ी के रून्नीसैदपुर की रविता गरीबी से जूझते हुए समाज का ताना सुनकर दारोगा बनी हैं।) - Dainik Bhaskar
रविता, दारोगा, पूर्णिया। (सीतामढ़ी के रून्नीसैदपुर की रविता गरीबी से जूझते हुए समाज का ताना सुनकर दारोगा बनी हैं।)

महिलाओं को ईश्वर ने अपने विशेष अंश के साथ गढ़ा है। इसलिए वह ममता की मूरत भी है और संघर्ष का साकार रूप भी। ठान ले तो शिव काे भी पा सकती है। उनका यही रूप एक बार फिर बिहार में दिखा। अपने जज्बे व जूनून से अभावों के शुंभ-निशुंभ और बंदिशों के महिषासुर को जीत कर 586 महिलाएं पहली बार दारोगा बनी हैं।

पिछले माह राजगीर में पासिंग आउट परेड के बाद इनकी तैनाती हुई है। पढ़ाई के लिए सरकारी स्कूल, खाने के लिए मिड डे मील और आवाजाही के लिए सरकारी साइकिल फिर भी तमाम चुनौतियों को पार कर मंजिल पर पहुंचीं।

  • पढ़ने के लिए सरकारी स्कूल, खाने के लिए मिड-डे मील, आवा-जाही के लिए सरकारी साइकिल, फिर भी... अभावों के शुंभ-निशुंभ व बंदिशों के महिषासुर को जीत कर शक्तिरूपा बनीं बिहार की बेटियां

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