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लॉकडाउन पर सख्त अदालत:हाईकोर्ट ने कहा- सरकार आज बताए कि लॉकडाउन लगेगा या नहीं, वरना हम लेंगे फैसला; अस्पतालों में भी ऑक्सीजन सप्लाई का कोई एक्शन प्लान नहीं

पटना11 दिन पहले
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कोरोना महामारी से लड़ने की कार्यशैली से अदालत नाराज (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
कोरोना महामारी से लड़ने की कार्यशैली से अदालत नाराज (फाइल फोटो)

बिहार में कोरोना के कहर से बेकाबू होते हालात और राज्य सरकार की कार्यशैली पर पटना हाईकोर्ट ने सोमवार को कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि महामारी से निपटने में राज्य सरकार फेल हो रही है। जस्टिस चक्रधारी शरण सिंह व जस्टिस मोहित कुमार शाह की खण्डपीठ ने शिवानी कौशिक की जनहित याचिका पर सुनवाई को मंगलवार के लिए स्थगित करते हुए महाधिवक्ता ललित किशोर को अनुरोध किया है कि वे चार मई तक सरकार से बात कर कोर्ट को बताएं कि राज्य में लॉकडाउन लगेगा या नहीं?

कोर्ट की नाराजगी इस बात को लेकर है कि सूबे के अस्पतालों में निर्बाध ऑक्सीजन सप्लाई का अब तक ठोस एक्शन प्लान नहीं दिया गया है। साथ ही केंद्रीय कोटा से मिले रोजाना 194 एमटी ऑक्सीजन की जगह मात्र 160 एमटी ऑक्सीजन का ही उठाव हो रहा है। इसके अलावा बेड व वेंटिलेटर की कमी लगातार जारी है। कोर्ट के निर्देश के बाद भी बिहटा का ईएसआईसी अस्पताल पूरी क्षमता के साथ शुरू नहीं हो पाया है। निर्देशों की अवहेलना और राज्य में कोरोना की बेकाबू रफ्तार पर नाराज खंडपीठ ने कहा कि या तो सरकार बेहतर निर्णय ले या फिर कोर्ट को कड़ा फैसला लेना पड़ सकता है।

रोज 194 एमटी ऑक्सीजन काेटे की जगह 160 एमटी ही उठाव क्याें

  • ​​​​​कोर्ट ने कहा- सरकार के पास कोई ठोस एक्शन प्लान नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के कुछ अफसरों के जरिए कोर्ट को कुछ डाटा सौंप दिया जाता है। सरकार ने अब तक जो भी एक्शन प्लान दिए हैं, वे आधे अधूरे और समस्या से निबटने के लिए अप टू मार्क नहीं हैं। उसके पास डॉक्टर, वैज्ञानिक, नौकरशाह की कोई एडवाइजरी कमेटी तक नहीं है, जो इस कोरोना विस्फोट से निपटे। {अब तक कोई वार रूम तक नहीं है। ऑक्सीजन सप्लाई पर बार-बार आदेश देने के बाद भी कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है।
  • सरकार ने कहा है कि प्रेशर स्विच एब्जॉर्बशन प्रणाली के दो प्लांट दो कोविड अस्पतालों में लग गए और काम भी शुरू हो गया। जबकि एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक आज तक ऑक्सीजन उत्पादन नहीं शुरू हुआ। सरकार के रिपोर्ट भ्रामक थे।
  • खंडपीठ ने कहा कि केंद्रीय कोटे से रोजाना 194 एमटी ऑक्सीजन मिल रहा है लेकिन अभी केवल 160 एमटी ऑक्सीजन का ही रोजाना उठाव क्यों हो रहा है।
  • केंद्र सरकार के वकील ने बताया कि निर्धारित कोटे से 34 एमटी ऑक्सीजन का उठाव नहीं होने पर वह लैप्स हो जाता है।

पूरी क्षमता से नहीं काम कर रहा ईएसआईसी

बिहटा ईएसआईसी अस्पताल को अब तक ऑक्सीजन बेड, लैब व दवाखाना की वजह से पूरी तरह चालू नहीं किया गया है। वीडियो कांफ्रेंसिंग पर मौजूद सेना के एक अधिकारी ने कोर्ट को बताया कि डॉक्टरों की टीम बिहटा में 23 अप्रैल से ही आकर बैठी है, लेकिन बेड ऑक्सीजन और लैब के बगैर काम शुरू नहीं हुआ।

आईजीआईएमएस का नहीं हो रहा पूरा उपयोग

आईजीआईएमएस के डेडिकेटेड कोविड अस्पताल होने पर सवाल उठाते हुए खंडपीठ ने कहा कि कहने भर के लिए ही यह डेडिकेटेड कोविड अस्पताल है। सिर्फ 10 वेंटिलेटर और लगभग 20 आईसीयू बेड हैं जबकि इसके पास हजारों बेड की क्षमता है और बगैर नियमित ऑक्सीजन के सब बेकार है।

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