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पटना के 2 छात्रों का आविष्कार:नींबू के रस से थर्माकोल को गलाकर बनाया हार्ड स्लैब; घर की छत से लेकर बन सकती है रोड

पटना5 महीने पहले
स्लैब को दिखाते बच्चे।

पटना के दो स्टूडेंट्स अभिरुक और सागर ने थर्माकोल को गलाकर ऐसा स्लैब तैयार कर दिया है, जो पत्थर जैसा सख्त है। इसका इस्तेमाल घर की छत से लेकर रोड बनाने में किया जा सकता है। पानी, आग और दबाव में भी खराब नहीं होने वाले इस स्लैब में ऐसे सामानों का इस्तेमाल किया गया है जो उपयोग के बाद फेंक दिया जाता है, और आसानी से नष्ट नहीं होता। क्लास 8 और 9 के स्टूडेंट्स के इस आविष्कार का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा सकता है।

मां के अचार से आया आइडिया
मनेर के बलुआ के प्रारंभिक स्कूल में क्लास 8 में पढ़ाई करने वाले छात्र अभिरुक ने बताया कि एक बार उनकी मां नीबू का अचार बना रही थी। उसने खेल-खेल में नींबू का रस पास में रखे थर्माकोल पर डाल दिया। इस रिएक्शन को देख वह दंग रह गए। नीबू के रस से थर्माकोल गलने लगा। थर्माकोल ऐसा गला कि उससे दो प्लास्टिक जुड़ गई। इसके बाद उन्हें यह आइडिया आया कि और उसने स्कूल के प्रोजेक्ट में क्लास 9 के छात्र सागर मिश्रा के साथ मिलकर बड़ा प्रोजेक्ट तैयार कर दिया। पटना में आयोजित बाल विज्ञान कांग्रेस 2021 में उनके प्रोजेक्ट के प्रजेंटेशन को काफी सराहा गया।

ऐसे मिनटों में तैयार कर ली हार्ड शीट
सबसे पहले लेमन और ऑरेंज का रस को डिस्टेलेशन के मैथेड से तेल बनाया। इसके बाद थर्माकोल को डिग्रेट करने का काम किया गया। इसके बाद बेहार प्लास्टिक बैग को जिसकी बंदी को लेकर पूरे देश में तैयारी चल रही है उसे छोटे छोटे टुकड़ों में काटकर उसे स्वेटर की तरह बुनकर दो शीट तैयार की। इसके बाद उस पर कैल्शियम ऑक्साइड पाउडर व लेमन लिक्विड के साथ थर्माकोल को पिघलाकर बनाया गया ग्लू डाल दिया गया। इसके बाद दो घंटे तक इसे सुखाया इसके बाद स्लैब तैयार कर लिया गया है। सागर ने बताया कि यह स्लैब ऐसा है कि इसका इस्तेमाल हम घर की छत और पाथ वे के लिए कर सकते हैं।

लोड देने पर भी नहीं होगा खतरा
अभिरुक ने बताया कि यह इतना मजबूत है कि 100 न्यूटन के दबाव के बाद भी नहीं टूटा। यह होम मेड है और कुछ खरीदने की जरूरत नहीं है। सह प्लास्टिक की सीट से भी मजबूत इसका इस्तेमाल बाजार की रेडीमेड सीट की जगी किया जा सकता है। यह कम खर्च और खराब सामान से तैयार होने के कारण पैसा तो बचाएगी ही इससे वेस्ट का भी अच्छे से मैनेजमेंट हो सकेगा। अभिरुक का कहना है कि इसका मॉडल बनाकर बाल विज्ञान कांग्रेस 2021 में प्रजेंटेशन किया गया है, इसकी काफी सराहना है। उनका कहना है कि इसकी बाइंडिंग पावर काफी स्ट्रांग। नीबू के छिलका से थर्माकोल गला और ग्लू बना जिसके बाद से यह आइडिया आ गया।

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