इनाम देने की घाेषणा:हेट स्पीच देना किसी तरह नहीं है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता

पटना12 दिन पहलेलेखक: अरविंद उज्ज्वल
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर नफरत फैलाने वालों को कानून का खौफ होना ही चाहिए। आजकल कानून का मजाक उड़ाया जा रहा है। हेट स्पीच देना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं है। अधिवक्ता अंशुल ने गुरुवार को इन बातों की ओर हाईकोर्ट का ध्यान आकृष्ट कराया।

चीफ जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एस कुमार की खंडपीठ ने शहजादा कमर की जनहित याचिका पर सुनवाई की। अंशुल ने कोर्ट को बताया कि कुछ दिन पहले मधुबनी के एक व्यक्ति ने खुलेआम मीडिया को सं‍बोधित करते हुए कहा था कि जो भी पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी की जीभ काटेगा उसे 11 लाख रुपए बतौर इनाम दिया जाएगा। अंशुल ने कहा कि समाज में नफरत फैलाने के उद्देश्य से दिए जाने वाले भाषणों पर लगाम लगाने की जरूरत है। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है।

ऐसी प्रवृत्ति देश के संविधान में निहित कानून का राज की अवधारणा के खिलाफ है। गणतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जरूरी है कि कोर्ट को कड़ा रुख अपनाना चाहिए। अगर कोर्ट ने भी कुछ नहीं किया तो ऐसे समाज विरोधी तत्वों का मन बढ़ता ही जाएगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस एस कुमार ने कहा कि हेट स्पीच देने वाले के खिलाफ पीड़ित व्यक्ति एफआईआर दर्ज करा सकता है।

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