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पटना हाईकोर्ट में 20 जून तक गर्मी की छुट्‌टी:इतिहास में पहली बार हाईकोर्ट में गर्मी की छुट्टी में बेल फाइलिंग पर रोक; मी लॉर्ड! अब जमानत के लिए कहां जाएं?

पटना14 दिन पहले
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पटना हाईकोर्ट। - Dainik Bhaskar
पटना हाईकोर्ट।

सेशन कोर्ट से अगर जमानत याचिका खारिज हो जाती है तो हाईकोर्ट ही एकमात्र विकल्प है। लेकिन हाईकोर्ट से भी अभी जमानत नहीं मिल पाएगी। क्योंकि 20 जून तक हाईकोर्ट में गर्मी की छुट्‌टी है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजय करोल के आदेश से रजिस्ट्रार जनरल नवनीत कुमार पांडेय ने ऐसा एक नोटिस जारी किया है। इसमें यह कहा गया है कि गर्मी छुट्‌टी के दौरान जमानत की याचिका दायर नहीं होगी।

मी लार्ड! ऐसे लोग जमानत के लिए कहां जाएं। लोअर कोर्ट से जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद ही हाईकोर्ट में अर्जी फाइल होती है। किसी भी मामले में सीधे हाईकोर्ट में जमानत की अर्जी दायर नहीं होती है। अग्रिम जमानत में भी जब अर्जी लोअर कोर्ट से खारिज होती है, तब ही हाईकोर्ट में आती है और फिर सुनवाई होती है। इसकी सुनवाई पहले दो या तीन अवकाशकालीन जज किया करते थे।

रोज औसतन 300 जमानत अर्जी होती थी दायर, हफ्ते में 4 दिन होती थी सुनवाई

गर्मी छुट्टी के दौरान औसतन तीन सौ जमानत की अर्जियां हर दिन दायर होती थी। इस प्रकार एक महीने में लगभग छह हजार अर्जियां दायर होती थी, जो कि इस बार नहीं हो रही, क्योंकि इस बार लॉक डाउन और कोरोना के कारण हाई कोर्ट ने नए फाइलिंग की इजाजत नहीं दी है। पहले गर्मी छुट्टी के समय दो या तीन अवकाश कालीन जज ही सप्ताह में चार दिन जमानत अर्जियों पर सुनवाई करते थे।

लेकिन इस बार चीफ जस्टिस की खंडपीठ के अलावा आठ एकल पीठ का भी गठन किया गया है जो पहले से लंबित मामलों की ही सुनवाई करते हैं, जिसमें जमानत और रिट याचिकाएं भी शामिल हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि चीफ जस्टिस से जमानत अर्जी दायर करने की इजाजत देने का अनुरोध किया गया है लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। जबतक इजाजत नहीं मिलती तबतक कोई विकल्प नजर नहीं आता।

हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने लिखी चीफ जस्टिस को चिट्‌ठी, ई फाइिलंग की अनुमति दें

पटना हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सह वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा ने चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर गर्मी छुट्टी के दौरान जमानत अर्जी (ई-फाईलिंग) दायर करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि पटना हाई कोर्ट के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि गर्मी छुट्टी के दौरान जमानत की अर्जी दायर करने की अनुमति वकीलों को नहीं दी गई है। पत्र में कहा गया है कि जब निचली अदालतों में जमानत की अर्जियां दायर की जा रही है तो फिर हाई कोर्ट में दायर करने पर रोक क्यों है?

उन्होंने कहा कि विगत 14 महीनों से कोर्ट में सामान्य कामकाज नहीं होने के कारण वकीलों के साथ ही कोर्ट से जुड़े लोगों की हालत बद से बदतर हो गई है। ई-फाइलिंग नहीं होने के कारण वकील और मुवक्किल दोनों को परेशानी हो रही है। वकीलों की आमदनी का जरिया ही समाप्त हो गया है। इसलिए तुरंत ई-फाइलिंग की व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए।

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