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आबादी बढ़ी, व्यवस्था घटी:मकान बढ़े, मगर कचरा उठाव गाड़ियां 475 से 400 हो गईं, नतीजा- लोगों ने 400 कूड़ा प्वाइंट बना डाले

पटना3 महीने पहलेलेखक: राजू कुमार
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2017 में माेहल्लों के बड़े डस्टबिन हटाए गए थे, वहां फिर फैल रहा कचरा। - Dainik Bhaskar
2017 में माेहल्लों के बड़े डस्टबिन हटाए गए थे, वहां फिर फैल रहा कचरा।

पंत भवन से राजापुर पुल तक बोरिंग कैनाल रोड में 10 जगहों पर लोग कूड़ा डाल रहे हैं। गाड़ी वाला आया घर से कचरा निकाल... इस आवाज का इंतजार कर साढ़े 9 से 10 बजे के बीच काम पर निकलते हुए लोग यहां कचरा डालते जा रहे हैं। इनमें से चार जगहों पर पहले बड़ा डस्टबिन हुआ करता था। डोर-टू-डोर सेवा शुरू होने के बाद इन्हें हटाया गया।

अब लोग उन पुराने स्थलों के साथ नई जगह पर भी कूड़ा डाल जा रहे हैं। राजेन्द्रनगर, अनीसाबाद, कंकड़बाग, गर्दनीबाग, पाटलिपुत्रा, पटना सिटी, ट्रांसपोर्ट नगर सहित 75 के 75 वार्ड में यही हालत है। पटना नगर निगम के क्षेत्र में करीब 400 ऐसे कूड़ा प्वाइंट लोगों ने मुहल्ले के मोड़, चौराहे या किनारे वाले मकान के पास बना दिया है।

इसके आसपास रहने वाले हजारों लोग और उधर से गुजरने वाले लाखों लोग दुर्गंध से परेशान हैं। भास्कर ने पड़ताल शुरू की तो गड़बड़ी नगर निगम की सामने आई। 2017 से अबतक एक तरफ आबादी बढ़ी, मकान बढ़े और परिवार भी; दूसरी तरफ डोर-टू-डोर के लिए नई गाड़ियां तो दीं नहीं और पुरानी भी खराब होती जा रही हैं। पहले ही मांग के हिसाब से इनकी संख्या कम थी, अब और भी कम है। नतीजा सामने है।

पटना सिटी से अनीसाबाद-बेली रोड तक नगर निगम, गाड़ियां दीं 475
पटना नगर निगम में 75 वार्ड हैं। एक तरफ पटना सिटी का छोर तो दूसरी तरफ बाइपास, अनीसाबाद और बेली रोड तक का इलाका। इतने बड़े क्षेत्र में सुबह-सुबह कचरा उठाने के लिए गाड़ियां पहले ही बहुत कम दी गईं। 2017 में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए 375 बॉक्स टीपर की खरीदारी की गई। इसके अलावा निगम ने अपने 155 ओपन टीपर में से 100 को क्लोज बॉक्स टीपर में कन्वर्ट किया।

बाकी 55 खुली रह गईं, जिनमें कूड़ा उठाना प्रतिबंधित है। इस तरह 75 वार्डों के लिए 375 बॉक्स टीपर को मुख्य रूप से काम पर लगाया गया। प्रत्येक वार्ड पर पांच। 100 क्लोज बॉक्स टीपर अलग से सेवा देती रहीं। मुहल्लों और कॉलोनियों के घरों से कूड़ा लेने की जिम्मेदारी उठाने वाली 375 बॉक्स टीपर में 75 खराब हो चुकी हैं। अब अमूमन 400 गाड़ियां कूड़ा उठा रही हैं। छोटी-संकरी गलियों और बाजार के अंदर से कूड़ा उठाने के लिए मंगाई गई 182 ई-कार्ट टीपर में भी 20 अक्सर खराब रह रही हैं।

अभी 2 बजे तक आ रही गाड़ी, इसलिए संख्या दोगुनी चाहिए
वार्ड पार्षदों का कहना है कि कूड़ा कलेक्शन के लिए वार्ड में पर्याप्त गाड़ी नहीं है। पांच गाड़ियां दी गईं, उनमें भी एक-दो खराब रहती हैं। पहले ही हर घर तक समय पर नहीं पहुंच रही थीं, अब और बुरा हाल है। दूसरी तरफ वार्ड में किराएदारों की संख्या बढ़ रही है। नए मकान बढ़ गए हैं। सुबह 10 बजे तक हर घर को कवर करने के लिए गाड़ियों की संख्या दोगुनी होनी चाहिए।

वार्ड 72 की पार्षद और पूर्व डिप्टी मेयर मीरा देवी कहती हैं कि गाड़ी 12 बजे तक पहुंचे तो लोग कूड़ा फेंकने का इंतजार कैसे करेंगे? वह बताती हैं कि हर दिन उनके वार्ड में 150-200 घरों से कूड़ा नहीं ले पाती हैं गाड़ियां।

गाड़ियां समय पर जाती हैं, लोग सड़क पर कूड़ा फेंक रहे

  • टीपर समय पर कूड़ा लेने पहुंचती हैं। कुछ लोग सड़क पर कूड़ा फेंक निकल जाते हैं, जबकि 2017 में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन प्रोजेक्ट की शुरुआत में ही डस्टबिन हटा दिए गए थे ताकि बाहर कचरा फेंकने की आदत छूटे। वार्डों के लिए गाड़ी की कमी को देखते हुए 150 बैटरी गाड़ी खरीदने का टेंडर किया गया है। 60 टीपर की खरीदारी की प्रक्रिया भी चल रही है। - डॉ. आशीष कुमार सिन्हा, सदस्य, स्थायी समिति, पटना नगर निगम
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