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आवास बोर्ड जमीन मामला :आईएएस, आईपीएस, पत्रकार व वकील के बीच हाउसिंग फेडरेशन ने बांटी आवास बोर्ड की जमीन

पटना15 दिन पहले
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  • फेडरेशन के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों पर केस दर्ज कराने के बाद खुला मामला
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सुप्रीम कोर्ट ने जिस जमीन पर आवास बोर्ड का मालिकाना हक कायम रखा है, उस जमीन को बिहार स्टेट कॉपरेटिव हाउसिंग फेडरेशन ने कौड़ियों के भाव यहां के आईएएस, आईपीएस, पत्रकारों, वकीलों में बांटने की तैयारी कर ली है। बिहार स्टेट कॉपरेटिव हाउसिंग फेडरेशन ने आवास बोर्ड की 23 एकड़ जमीन काे अपना बताया है।

जमीन पर कब्जा कायम करने के लिए फेडरेशन ने ऐसे लोगों के बीच इसके वितरण की योजना बनाई, जिससे आवास बोर्ड भी इस पर सवाल खड़ा नहीं कर सके। फेडरेशन ने आवास बोर्ड का मुंह बंद करने के लिए अपने सदस्य के रूप में यहां के कई आईएएस, आईपीएस, वकीलों व पत्रकारों को जोड़ा। अब उन्हें इस विवादित जमीन को आवंटित करने की तैयारी भी कर ली है।  इधर, आवास बोर्ड ने इसका विरोध शुरू किया है। उसका कहना है कि इस जमीन पर फेडरेशन का कोई हक ही नहीं है, तो फिर वह इसका बंदरबांट कैसे कर सकता है। इधर, फेडरेशन का कहना है कि 1981-82 में यह दीघा के रैयती किसानों से खरीदी गई है, जिसकी रजिस्ट्री पटना में ही हुई है। जबकि आवास बोर्ड इस जमीन पर अपना अधिकार जमाता है।

इसका खुलासा पिछले दिनों तब हुआ, जब बिहार राज्य आवास बोर्ड के दीघा कैंप कार्यालय के कार्यपालक अभियंता ने फेडरेशन के अध्यक्ष सहित अन्य पदाधिकारियों पर कोतवाली थाना में केस दर्ज करा दिया।

फेडरेशन का दावा बिहार स्टेट हाउसिंग फेडरेशन के अध्यक्ष विजय सिंह व सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी मानवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि 23 एकड़ जमीन हमारी है। मैंने फेडरेशन के सदस्य बनने वाले आईएएस, आईपीएस, वकील और पत्रकारों को घर बनाने के लिए जमीन आवंटित करने की तैयारी की है। आवास बोर्ड के कर्मियों ने झूठा केस दर्ज कराया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गयी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संज्ञान में पूरी जानकारी दी गयी है। जमीन हमारी नहीं है तो वर्तमान भूमि अधिग्रहण कानून के अनुसार फेडरेशन को मुआवजा मिलनी चाहिए।

आवास बोर्ड का दावा
बिहार राज्य आवास बोर्ड के सचिव अजीत कुमार ने कहा कि दीघा की 1024.52 एकड़ जमीन हमारी है। सर्वोच्च न्यायालय ने दीघा के जमीन का अधिग्रहण वैध ठहराया है। बिहार राज्य आवास बोर्ड को कानून अधिकार मिला हुआ है। ऐसे में 1024.52 एकड़ जमीन पर दूसरे किसी का दावा पूरी तरह अवैध है। जमीन पर दखल-कब्जा करने वालों के खिलाफ आवास बोर्ड द्वारा प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाती है। अपने जमीन की रक्षा करना बोर्ड का अधिकार है। इसी अधिकार के तहत फेडरेशन सहित अन्य लोगों पर कार्रवाई की गयी है।
क्या है मामला : 1982 में अधिगृहित हुई थी जमीन

बिहार राज्य आवास बोर्ड ने दीघा के 1024.52 एकड़ जमीन अधिग्रहण 1974 से शुरू कर 1982 में पूरा किया था। इसी अधिगृहित जमीन में 23 एकड़ जमीन बिहार स्टेट हाउसिंग फेडरेशन ने 1981-82 में विभिन्न रैयती किसानों से अलग-अलग सेल डीड के माध्यम से खरीद ली। जमीन की रजिस्ट्री पटना निबंधन कार्यालय में हुई। जबकि, बिहार राज्य आवास के द्वारा उक्त सभी जमीन का अधिग्रहण कर 1982 में आवास बोर्ड के द्वारा मुआवजे की करीब 8.50 करोड़ की रकम पटना समाहरणालय में जमा कराकर 1983 में कागजी दखल कब्जा प्राप्त किया था।

  • इस बीच में 1984, 1990 और 2010 में अपने अलग अलग फैसलों में सुप्रीम कोर्ट ने संपूर्ण 1024.52 एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर मुहर लगा दी।
  • 2011 में बिहार सरकार ने फेडरेशन को भंग कर दिया। इसके बाद 23 एकड़ जमीन के अधिकांश भाग को भू-माफियाओं ने पुराने रैयती किसानों के माध्यम से दोबारा बेच दिया।

ताजा विवाद
ताजा विवाद धोखाधड़ी का है। आवास बोर्ड के कार्यपालक अभियंता प्रकाश चंद्र राजू का कहना है कि जमीन हमारी यानी बोर्ड की है। लेकिन, हाउसिंग फेडरेशन के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी मानवेंद्र और अध्यक्ष विजय सिंह अंधेरे में हस्ताक्षर करा कर पुलिस को आवेदन दिया कि आवास बोर्ड और फेडरेशन संयुक्त रूप से अवैध कब्जा करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं और कार्रवाई कर सकते है। जबकि, जमीन आवास बोर्ड का है तो ऐसे में अवैध कब्जा करने वालों पर कार्रवाई करने का अधिकार सिर्फ आवास बोर्ड को है। इस मामलों को लेकर फेडरेशन पर प्राथमिकी दर्ज की गयी है।
सबसे बड़ा सवाल
बिहार राज्य आवास बोर्ड की जमीन पर पूर्व और लोगों ने रैयती किसान के माध्यम से जमीन खरीदी है। दीघा कानून के अनुसार पश्चिम के लोगों को मुआवजा देना है। फेडरेशन का जिस पर दावा है उन जमीन को किसान से ही दोबारा खरीदकर लोग घर बना चुके है। ऐसे में मुआवजा देने की बात उठती है तो किसान से जमीन खरीदकर घर बनाने वालों को मुआवजा मिलेगा या बिहार स्टेट हाउसिंग फेडरेशन को मुआवजा मिलेगा?

मामले की जांच चल रही है। फेडरेशन के लोगों को जल्द ही नोटिस दिया जाएगा। फेडरेशन के संबंधित लोगों से पूछताछ होगी। -रामाशंकर सिंह, कोतवाली थानाध्यक्ष

राजीव नगर थाना अवैध कब्जा रोकने वाली चौकी

दीघा के 1024.52 एकड़ अधिग्रहित जमीन पर अवैध निर्माण व दखल-कब्जा रोकने के लिए दीघा थाना का चौक बनाया गया था। वर्तमान समय में आबादी बढ़ने के साथ ही राजीव नगर थाना बन गया। लेकिन, आज भी मकानों का निर्माण और जमीन की खरीद-विक्री जारी है। 

करीब 20 एकड़ जमीन पर बोर्ड का कब्जा
बिहार राज्य आवास बोर्ड ने 1024.52 एकड़ अधिग्रहित जमीन में से अबतक महज 20 एकड़ जमीन पर दखल-कब्जा किया है। इसमें सीआरपीएफ को 4.27 एकड़, सीपीडब्लूडी को 8.49 एकड़, सीबीएसई 2.50 एकड़, एसएसबी को 2.50 एकड़ जमीन शामिल है।

सरकार ने 2010 में बनाया दीघा कानून
राज्य सरकार ने 2010 में दीघा कानून बनाया। इस कानून के आलोक में  2014 में नियमावली बनी। इसके तहत 1024.52 एकड़ जमीन को दो भाग में बांट दिया गया। आशियाना दीघा रोड से पूरब करीब 600 एकड़ में 27 नवम्बर 2013 के पहले तक घर बनाने वाले लोगों का मकान बंदोबस्ती शुल्क लेकर नियमित किया जाएगा।

लिया गया आवेदन, कार्रवाई पेंडिंग
आशियाना-दीघा रोड के पूरब और पश्चिम के लोगों से आवेदन लिया गया है। इसमें करीब 92 लोगों ने पूरब से मकान को नियमित कराने के लिए आवेदन दिया। इसमें 17 लोगों को मकान नियमित हुआ है।

को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने खरीद-बिक्री की
1980 के दशक से लेकर 2020 तक यानी 40 सालों से 1024.52 एकड़  जमीन में खरीद-बिक्री चल रही है। इसमें दर्जनों निजी कॉपरेटिव सोसाइटी के साथ दर्जनों भू-माफिया आज तक जुटे हुए है।

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