पूछताछ के बाद IAS रंजीत ने छोड़ा फेसबुक:BPSC पेपर लीक कांड के बाद 'मिशन 50 IAS' पेज भी गायब; EOU अलर्ट

पटना6 महीने पहले

BPSC पेपर लीक मामले में EOU की पूछताछ के बाद IAS अफसर रंजीत कुमार सिंह ने अपने फेसबुक प्रोफाइल और पेज को डिलीट या डिएक्टिवेट कर दिया है, जिससे यह दिख नहीं रहा है। इससे पेपर लीक मामले की जांच से जुड़े अफसर भी हैरत में हैं। बता दें, EOU इस मामले की गहनता से जांच कर रही है।

EOU उनके फेसबुक प्रोफाइल से कई तरह की जानकारी इकट्ठा करने में लगी हुई थी। फेसबुक पर मोटिवेशनल स्पीच से लेकर अन्य गतिविधियां वे डालते थे। BPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले एक कोचिंग संस्थान से उनका गहरा जुड़ाव माना जाता है। इसलिए फेसबुक प्रोफाइल के साथ ही पेज को डिलीट या डिएक्टिवेट कर देने के बाद चारों तरफ से सवाल उठने लगे हैं।

इस पर कोचिंग संस्थान से जुड़ी कई जानकारियां भी थीं। इसी IAS अफसर ने BPSC को वायरल प्रश्न पत्र भेजकर लीक होने की आशंका जाहिर की थी, उसके बाद इनको बुलाकर जांच टीम ने पूछताछ भी की थी। इनके निकट के सहयोगी से भी काफी पूछताछ की है।

पहले से इसकी आशंका थी

जानकारी है कि EOU को जिन लोगों के बारे में पहले से आशंका थी कि वे अपना फेसबुक पेज या अन्य सोशल मीडिया पेज डिलीट या डिएक्टिवेट कर सकते हैं, उनके बारे में फेसबुक को अलर्ट कर दिया था। IAS मिशन-50 फेसबुक पेज किसने बनाया है, उसकी तहकीकात भी की जा रही है। यह तहकीकात भी की जा रही है कि किस जगह से पेज बना है। जानकारी है कि इस कोचिंग संस्थान से जुड़ी पाठ्य सामग्री या मॉडल प्रश्न पत्रों की जांच भी EOU करेगी और देखेगी की डाली गई जानकारियों और दावों में कितनी सच्चाई है।

सेटिंग नहीं तो कैंसिल ही करा दिया

8 मई को बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के C सेट का क्वेश्चन पेपर ऐसे ही वायरल नहीं हुआ था। एक सोची-समझी साजिश के तहत उसे वायरल कराया गया था। ताकि एग्जाम को कैंसिल कराया जा सके। यह बात जानकर आपको आश्चर्य हो रहा होगा, पर असलियत यही है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) इस प्वाइंट पर भी जांच कर रही है। EOU की जांच टीम ने इसकी पुष्टि की है। दरअसल, इसके पीछे एक बड़ी वजह सामने आई है।

आशंका है कि सेटर्स ने जिन कैंडिडेट्स से लाखों रुपए लेकर एग्जाम शुरू होने से पहले क्वेश्चन पेपर पहुंचाने का कमिटमेंट किया था, वो फेल हो गया था। क्वेश्चन पेपर तय समय से काफी लेट उन तक पहुंचा था। इस कारण सेटर्स का शातिराना खेल ही बिगड़ गया। तब जाकर क्वेश्चन पेपर को एक प्लान के तहत वायरल करा दिया गया। आश्चर्य वाली बात यह है कि जिन लोगों ने भी पेपर को वायरल किया, वो सभी सेटर्स गैंग के पार्ट निकले। EOU की SIT इनके शातिराना खेल की जांच अभी लगातार कर रही है।

गैंग के लोगों के बीच हुई थी गड़बड़ी

EOU की जांच टीम वैसे तो कई सवालों के जवाब तलाश रही है। मगर, एक सवाल ऐसा था, जिसका जवाब जानना बेहद जरूरी था। सवाल यह है कि जो लोग खुद सेटर्स गैंग के पार्ट हैं, वही लोग एग्जाम कैंसिल क्यों कराना चाह रहे थे? जांच के दौरान पता चला कि ऐन मौके पर सेटर्स गैंग से जुड़े लोगों के बीच आपस में ही कुछ गड़बड़ी हो गई। तय समय की जगह काफी लेट से क्वेश्चन पेपर इनके पास पहुंचा।

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