पारिवारिक बंटवारा नहीं कराया है तो करवा लें:विधान परिषद में बिल पर हुई चर्चा, भूमि सुधार मंत्री बोले- जनप्रतिनिधि पहले घर में कराएं बंटवारा

पटना2 महीने पहले
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रामसूरत राय। (फाइल) - Dainik Bhaskar
रामसूरत राय। (फाइल)

बिहार में जमीन से जुड़े तमाम विवादों के निपटारे के लिए बिहार दाखिल खारिज संशोधन बिल 2021 सरकार लेकर आई है। विधानसभा में यह सर्वसम्मति से पास हो चुका है। राज्य में ज्यादातर अपराध जमीन विवाद से जुड़े होते हैं। गुरुवार को बिहार दाखिल खारिज संशोधन विधेयक पर विधान परिषद में चर्चा हुई। इस पर बोलते हुए विधान परिषद में विपक्ष की ओर से पूर्व मंत्री और राजद नेता रामचंद्र पूर्वे ने कहा कि 900000 से ज्यादा दाखिल खारिज के मामले सरकार के पास लंबित हैं।

दाखिल खारिज के लिए लोगों को सबसे ज्यादा परेशान होना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक जमीन का चार-चार बार रजिस्ट्रेशन पटना में देखा गया है। वहीं, कांग्रेस नेता समीर सिंह ने कहा कि कर्मचारी रिश्वत लेकर जमीन दूसरे के नाम पर कर दे रहे हैं।

राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने घर में सही तरीके से भाइयों के बीच बंटवारा करके समाज में मैसेज देना चाहिए कि आपसी बंटवारा कितना आसान है। उन्होंने बताया कि उनके पिता चाहते थे उनके मरने के बाद ही घर में बंटवारा होगा। लेकिन, पिता को समझाया कि बेहतर होगा कि जीतेजी बंटवारा कर लें। पिता तैयार हो गए और साल भर में पहले आपस में बंटवारा किया गया। उसके बाद कागज पर बंटवारा हुआ।

मंत्री रामसूरत राय ने कहा कि डिजिटल मैप तैयार हो रहा है। हम खतियान भी लोगों में बाटेंगे जिन लोगों ने आपसी बंटवारा नहीं कराया है वे सभी आपसी बंटवारा करवा लें। कई बार ऐसा दिख रहा है कि जो चालाक भाई होता है, वह धोखे से जमीन बेच लेता है और इसमें बिचौलिए मजे मार रहे हैं। इससे कई तरह का विवाद सामने आ रहा है और मामला कोर्ट तक जा रहा है।

कई बार भाई-भाई की हत्या भी कर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों का कर्तव्य है कि वह अपने घर में तो बंटवारा करवाएं ही आस-पड़ोस के लोगों में भी बंटवारा करवाएं। संशोधन के तहत अब जमीन की जो रजिस्ट्री होगी, उसमें जमीन का नक्शा भी होगा।

ऐसी होगी प्रक्रिया
नए नियम के तहत सभी अंचल कार्यालयों में सर्वे राजस्व नक्शे को सॉफ्टवेयर के जरिए डिजिटल फार्म में तैयार किया जाएगा। दाखिल खारिज के साथ जमीन के हिस्से का नक्शा भी दिया जाएगा। इससे गलत तरीके से रजिस्ट्री मुश्किल हो जाएगी। क्योंकि रजिस्ट्री के समय ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि जमीन के किस हिस्से की बिक्री की गई है। दाखिल खारिज की याचिका की जांच राजस्व कर्मचारी करेंगे। उन्हीं की सहमति से दाखिल खारिज की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

जमीन का नक्शा बनाने के लिए जिला स्तर पर सिविल इंजीनियरों की एक टीम होगी। शुल्क की वसूली रैयत से की जाएगी। इंजीनियरों या एजेंसियों को जमीन की मापी के लिए ETS (इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन) के अलावा लैपटॉप रखना जरूरी होगा।