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  • In 16 Years, Not A Single House Was Given To The People, The Board On Which The Responsibility Of Giving Houses To The Common People Occupied The Same's Residence And Land, Then Why The Expenditure Of 1.20 Crores Every Month On The Salary Of The Workers?

कहानी सपनों के टूटने की:16 साल में लोगों को एक भी घर नहीं दिया,जिस बोर्ड पर आम लोगों को घर देने का जिम्मा उसी के आवास-जमीन पर कब्जा, फिर कर्मियों के वेतन पर हर माह 1.20 करोड़ का खर्च क्यों?

पटनाएक महीने पहलेलेखक: मधुरेश
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पटना के बहादुरपुर में जर्जर हालत में हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट। अधिकतर पर अवैध कब्जा। - Dainik Bhaskar
पटना के बहादुरपुर में जर्जर हालत में हाउसिंग बोर्ड के फ्लैट। अधिकतर पर अवैध कब्जा।
  • बड़ा सवाल: बिहार में सिर्फ 13% शहरी आबादी, फिर भी बोर्ड का ऐसा ढीला रवैया!

बिहार सरकार ने, पब्लिक को ‘सस्ता-सुंदर घर’ का सबसे बड़ा सपना दिखाकर उसकी गर्दन मरोड़ दी। सरकार ने आदमी के इस सबसे सुनहरे अरमान को पूरा करने के लिए 49 साल पहले, यानी 1972 में बिहार राज्य आवास बोर्ड बनाया। इसे लोगों को किफायती दाम पर घर बनाने को जमीन और बना हुआ मकान देना था।

पटना, आरा, सासाराम, गया, पूर्णिया, भागलपुर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और छपरा में जमीनें ली गईं। बोर्ड के इस जिम्मा में नियोजित शहरीकरण का बड़ा उदेश्य भी शामिल था। शुरू में, जरूरत के मुताबिक बहुत कम ही सही, मगर काम हुए। लेकिन, बीते 16 साल में शायद ही किसी को घर या जमीन मिली है।

जबकि इसे चाहने वालों की बड़ी लंबी कतार है। इन 16 सालों में निर्माण कार्यों का रिकॉर्ड बना, मगर आवास बोर्ड ने अराजक भाव में अपने अस्तित्व के उद्देश्य और कायदे-कानून से कोई मतलब ही नहीं रखा। ऐसे में सवाल उठता है कि आज भी आवास बोर्ड में कार्यरत 150 अफसर व कर्मचारी करते क्या हैं?

जबकि, हर माह इनके वेतन पर 1.20 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। बोर्ड की काहिली, बेपरवाही, भ्रष्टाचार का नतीजा है कि उसकी बहुत सारी संपत्तियों पर शहर दर शहर अवैध कब्जा है। यह नाकामयाबी, शहरों के अराजक फैलाव का बड़ा कारण भी है। राजधानी पटना को ही नमूना माने, तो 10-12 फीट की पतली सी गली में बड़ा सा अपार्टमेंट सामान्य बात है।

राजधानी के इसी बेतरतीब फैलाव के हवाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कई बार कह चुके हैं कि ‘भूकंप या ऐसी कोई बड़ी विपदा आई, तो कम से कम 5 लाख लोग मरेंगे।’ हद तो यह है कि आज भी सपने दिखाने का काम बंद नहीं है। बोर्ड के डिजिटल प्लेटफार्म पर चस्पां बहुमंजिली इमारतों या डिजायनर अपार्टमेंट की सिरीज, विदेशी कॉलोनी का लुक देती है, ललचाती है। वैसे बोर्ड ने अपनी संपत्तियों के को संरक्षित करने के लिए कुछ समय पहले सर्वे कराया है।

विधायकों के लिए बने फ्लैट पर भी अवैध कब्जा... फिर दूसरी संपत्ति की कौन कहे
राजधानी पटना में जहां बोर्ड का मुख्यालय है, वहां बोर्ड 16 साल में कोई नई योजना जमीन पर नहीं उतार सका। फ्लैट और जमीन देने का काम बंद है। बहादुरपुर में विधायकों को रहने के लिए 62 फ्लैट की मरम्मत कराई गई। विधायक नहीं गए। लोगों ने कब्जा कर लिया।

बोर्ड केवल पुरानी योजनाओं की समीक्षा करने, अतिक्रमण हटाने, फ्री-होल्ड करने जैसे काम में फंसा है। पटना में 2000 के पहले जमीन और फ्लैट का आवंटन किया गया था। इसके बाद आवेदन ही नहीं मांगा गया। कुछ पुराने फ्लैट के लिए आवेदन निकला था। लेकिन एक-दो लोगों को छोड़कर किसी ने फ्लैट लेने में रुचि नहीं दिखाई।

डिप्टी सीएम बोले-बहुत जल्द बहुत कुछ बदला दिखेगा, लोगों को मिलेगा सस्ता घर
उपमुख्यमंत्री व नगर विकास एवं आवास मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा-आवास बोर्ड का चेहरा बहुत जल्द बदलेगा। उसकी संपत्तियों से कब्जा या अतिक्रमण हटाया जा रहा है। बोर्ड को एक्शन प्लान बनाने को कहा गया है ताकि लोगों को फ्लैट व जमीन का एलॉटमेंट किफायती दाम व सुविधाजनक तरीके से हो सके।

वहीं आवास बोर्ड के एमडी रमन कुमार ने कहा कि तीन दशक पुराने जर्जर भवनों को अवैध कब्जा से मुक्त कराकर सील किया जा रहा है। छपरा में 168 फ्लैट को सील करने की कार्रवाई की गई है। अन्य जगहों पर भी ऐसा करने को कहा गया है। जर्जर भवनों को ध्वस्त कर नई योजना बनाई जाएगी।

साल 2012-13 में मंजूर ये योजनाएं शुरू नहीं हो सकीं
1. पटना में लोहियानगर सेक्टर एस, टी, यू में रेंटल फ्लैट, वीकर, स्लम व जनता फ्लैट के स्थान पर 32.35 एकड़ पर 2488 फ्लैट व वाणिज्यिक संरचनाओं का निर्माण।
2. बहादुरपुर में 10.10 एकड़ में 1596 फ्लैट का निर्माण
3 लोहियानगर (एल सेक्टर-5) में 1.71 एकड़ जमीन पर कॉमर्शियल कांप्लेक्स का निर्माण।
4. बहादुरपुर में पुराने जर्जर भवन को ध्वस्त कर 74.41 एकड़ जमीन पर 8454 फ्लैट और वाणिज्यिक संरचनाओं का निर्माण करने की योजना।
5. दामोदरपुर (मुजफ्फरपुर) में पुरानी योजनाओं के स्थान पर 21.75 एकड़ जमीन पर 1496 फ्लैट और वाणिज्यिक संरचनाओं का निर्माण।
6. कटारी व मुस्तफाबाद (गया) में पुरानी योजनाओं के स्थान पर 125 एकड़ जमीन पर 12696 फ्लैट और वाणिज्यिक संरचनाओं का निर्माण
7. हनुमान नगर, पटना में 0.55 एकड़ पर कॉमर्शियल कांप्लेक्स(नोट :- ये योजनाएं पीपीपी मोड में पूरी होनी थी।)

...और दफन हो जाएंगे सपने?
आज की तारीख में इन 7 योजनाओं के बारे में बोर्ड कहता है-’2017 में किफायती आवासीय नीति एवं भवन उपविधि के लागू हो जाने के चलते ये योजनाएं अप्रासंगिक हो चुकी हैं। इन सभी योजनाओं को पुन: नई नीति के प्रावधानों के तहत तैयार करना आवश्यक है। ऐसा किया भी गया।

इन योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए आवास बोर्ड की 261 वीं बैठक (दिनांक 2019) हुई। इसमेें प्रथम चरण में बहादुरपुर स्थित सेक्टर 5 में 10.10 एकड़ जमीन पर 1446 फ्लैट तथा दामोदरपुर (मुजफ्फरपुर) स्थित 12.5 एकड़ जमीन पर फ्लैट/व्यावसायिक संरचनाओं के निर्माण संबंधी प्रस्ताव तैयार करने को स्वीकृति दी गई।

इस बारे में मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के लिए संलेख वित्त विभाग को भेजा गया। वित्त विभाग ने कुछ क्वैरी की। इसके आलोक में प्रस्ताव में संशोधन किया जा रहा है। बोर्ड द्वारा बाकी योजनाओं से संबंधित प्रस्ताव बोर्ड की अगली बैठक में लाया जाना है।

किफायती आवास नीति के तहत समस्तीपुर, गया, सासाराम, डालमियानगर व भागलपुर का चयन किया गया है। आईएफसी ने जमीनों का सर्वे किया है, प्रस्ताव बनाया है।’

  • दलपतपुर, आरा में 1054 फ्लैटों के निर्माण के लिए टेंडर निकाला गया। ठेकेदार द्वारा एकरारनामा निष्पादित न कराए जाने से बिड सेक्युरिटी जब्त हुई। नई नीति के अनुसार संशोधन की दरकार।
  • भागलपुर (बरारी) में 272 फ्लैट बनने हैं। 2 बार टेंडर हुआ। मामला हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने फिर टेंडर का आदेश दिया। लेकिन, अब किफायती आवास नीति आने के चलते इस प्रोजेक्ट में संशोधन किया गया है।
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