'किंग' की जगह पर 'फक्कड़':पिछले साढ़े 3 साल से दफ्तर में ही रह रहे अनिल हेगड़े, 4250 बार दे चुके हैं गिरफ्तारी

पटना3 महीने पहले
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अनिल हेगडे। - Dainik Bhaskar
अनिल हेगडे।

पिछले साढ़े 3 साल से दफ्तर में रहते हैं, बिहार में अपना आवास नहीं है, इन्होंने शादी भी नहीं की है, सुबह से लेकर शाम तक सिर्फ पार्टी के लिए ही जीते है, अनिल हेगड़े का परिचय इतना ही नहीं है, अनिल हेगड़े समता पार्टी के पुराने और कर्मठ कार्यकर्ता हैं। जब समता पार्टी का गठन हुआ था तो उन्होंने अपनी राजनीतिक जीवन जॉर्ज फर्नांडिस के साथ शुरू किया था। तब से लेकर अब तक अनिल हेगड़े समता पार्टी से लेकर जदयू तक के ही रह गए। आज JDU ने अनिल हेगड़े को राज्यसभा सांसद बनाने का निर्णय लिया है। किंग महेंद्र के निधन के बाद खाली हुई राज्यसभा की सीट पर अनिल हेगडे राज्यसभा के सदस्य बनेंगे।

अनिल हेगड़े पार्टी के लिए ईमानदार रहे

20 मई 1960 में कर्नाटक प्रदेश उडुपी में जन्म लेने वाले अनिल हेगड़े ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस के साथ की थी। जेपी आंदोलन से लेकर जब तक जॉर्ज जीवित रहे तब तक उनके साथ ईमानदारी से रहे। बीच में जॉर्ज फर्नांडिस और नीतीश कुमार के संबंधों में खटास जरूर आई लेकिन, अनिल हेगड़े पार्टी के साथ ईमानदारी से बने रहे थे।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ईमानदारी के साथ रहने का इनाम जेडीयू ने उन्हें दिया है। वजह साफ है कि अनिल हेगड़े पूरी तरह से संगठन के व्यक्ति हैं। संगठन पर उनकी पकड़ काफी ज्यादा है। चुनावी प्रक्रियाओं में माहिर और पार्टी के सभी पेपर वर्क को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी अनिल हेगड़े पर ही है।

मंगलोर के रहने के बावजूद बिहार जैसे राज्य की राजनीति को अनिल हेगड़े बखूबी जानते और समझते हैं।
मंगलोर के रहने के बावजूद बिहार जैसे राज्य की राजनीति को अनिल हेगड़े बखूबी जानते और समझते हैं।

अनिल हेगडे ने 4250 बार गिरफ्तारी दिया था

JDU के राज्यसभा उम्मीदवार अनिल हेगडे ने 1991 में डंकल प्रस्ताव पर हस्ताक्षर के विरोध में 5150 दिन का अभियान चलाया था, जिसमें 14 वर्ष तक हर दिन लगातार 4250 बार पार्लियामेंट थाना में गिरफ्तारी दिए और उस क्रम में 15 दिन तक जेल में रहें। डंकल प्रस्ताव नाम का एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता हुआ था। इसी डंकल प्रस्ताव को अब विश्व व्यापार संगठन के नाम से जाना जाता है। विश्व व्यापार संगठन अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का संगठन है। यही पहले गैट के नाम से जाना जाता था। भारत भी इसका सदस्य है। 1983 में गैट के मंच से एक बहुत खतरनाक दावा किया गया, जिसमें विदेशी सरकारों ने भारत में बीजों पर पेटेंट करने के अधिकार की मांग की। इससे वे भारत के खेतों के बीजों पर विदेशी बीज कंपनियों का एकाधिकार स्थापित करना चाहते थे। ये अधिकार वे पेटेंट के माध्यम से चाहते थे।

दक्षिण के रहने के बावजूद बिहार की राजनीति पर पकड़ रखते है हेगडे

मंगलोर के रहने के बावजूद बिहार जैसे राज्य की राजनीति को अनिल हेगड़े बखूबी जानते और समझते हैं। अनिल हेगड़े जेडीयू के केंद्रीय कार्यालय दिल्ली में रहते थे, लेकिन पिछले साढ़े तीन साल से पटना के जेडीयू कार्यालय में रहते हैं। इन्होंने कोई आवास नहीं लिया है। यह पार्टी में ही एक कमरे में रह लेते हैं। सुबह से ही JDU के लिए काम करते हैं। इसी ईमानदारी और सादगी को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह निर्णय लिया है कि इस बार राज्यसभा सदस्य के लिए अनिल हेगड़े जाएंगे।

अनिल हेगड़े को राज्यसभा भेजने के निर्णय पर कार्यकर्ताओं खुशी की लहर

आज जैसे ही JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने अनिल हेगड़े के नाम की अधिकारिक घोषणा की। उसके बाद JDU के नेताओं में काफी खुशी है। खासकर के उन कार्यकर्ताओं में जो समता पार्टी के समय से लगातार पार्टी के लिए काम कर रहे है। प्रदेश प्रवक्ता निखिल मंडल कहते है कि ये फैसला कार्यकर्ताओं के हित में लिया गया है। नीतीश कुमार ने एक बार फिर साबित किया है कि पार्टी विथ डिफरेंस के लिए जानी जाती है। इस दौर में जब सभी पार्टियां धनपशुओं के पीछे भाग रही है वही, JDU ने महान फैसला लेते हुए पार्टी के एक कर्मठ और ईमानदार व्यक्ति को राज्यसभा भेजकर बड़ी लकीर खींच दी है।

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