JDU का 10-11 दिसंबर को राष्ट्रीय अधिवेशन:9 राज्यों में चुनाव का ब्लूप्रिंट होगा पेश, भाजपा के खिलाफ विकल्प तैयार करने की मुहिम में नीतीश

पटना2 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष तौर पर ललन सिंह दोबारा चुन लिए गए हो। लेकिन, इसकी आधिकारिक घोषणा 10 दिसंबर को राष्ट्रीय अधिवेशन में की जाएगी। 2 दिनों के राष्ट्रीय कार्यक्रम में 10 दिसंबर को राष्ट्रीय अधिवेशन जेडीयू के पटना कार्यालय के कर्पूरी सभागार में करेगा। वहीं, दूसरे दिन खुला अधिवेशन पटना के कृष्ण मेमोरियल हॉल में किया जाएगा।

इन दोनों मौकों पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मौजूद रहेंगे। जदयू की राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। दैनिक भास्कर आपको इस अधिवेशन में किन-किन मसलों पर चर्चा होगी, वह बताएगा। जाहिर सी बात है जब राष्ट्रीय अधिवेशन होता है तो पार्टी को कैसे मजबूत करना है और आगे के राष्ट्रीय कार्यक्रम को किस तरह से बनाया जाए और उसे कैसे क्रियान्वित किया जाए, इस पर ब्लू प्रिंट तैयार किया जाता है। जदयू के तमाम नेता इस पूरे खाके को अपने राष्ट्रीय पदाधिकारियों के सामने साझा करेंगे।

संगठन को मजबूत करने की तैयारी

राष्ट्रीय अधिवेशन में जदयू राष्ट्रीय स्तर पर देश की राजनीतिक स्थिति क्या है? इसमें जदयू की क्या भूमिका होगी? इस पर चर्चा करेगा। जदयू के राष्ट्रीय सचिव राजीव रंजन प्रसाद बताते हैं कि इस पूरे बैठक में पार्टी का सांगठनिक पुनर्गठन किस तरीके से हो और मजबूत टीम बने, इसको लेकर मंथन होगा। राष्ट्रीय परिपेक्ष में जदयू का विस्तार किस तरह से किया जाए, कौन-कौन से राज्य जदयू के लिए माकूल होंगे, किन राज्यों में संगठन को और मजबूत बनाया जाए।

इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। जदयू के राष्ट्रीय सचिव राजीव रंजन प्रसाद बताते हैं कि पूरे देश में जिस तरह से एकाधिकारवादी प्रवृत्ति भाजपा की है, एक विकल्प के तौर जो रचना की पहल को कैसे खड़ा किया जाए, ताकि देश में भारतीय जनता पार्टी के विपक्ष में सशक्त विकल्प बन सके, जनता दल यूनाइटेड के प्रभावकारी भूमिका का निर्वहन करेगा।

एक विकल्प तैयार करने की कोशिश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर क्या राष्ट्रीय अधिवेशन में प्रस्तुत किया जाएगा? इस सवाल पर राजीव रंजन प्रसाद कहते हैं कि बिल्कुल नहीं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विपक्षी एकता को एकजुट करने में एक सशक्त भूमिका निभाएंगे। एक विकल्प को तैयार करेंगे। भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ एक सशक्त विकल्प बने, इसको लेकर लगातार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले भी भारत के कई दलों के प्रमुख से मिल चुके हैं।

इसी दिशा में जनता दल यूनाइटेड का प्रयास जारी भी रहेगा। जब जदयू के राष्ट्रीय सचिव राजीव रंजन से यह सवाल पूछा गया कि क्या आप राष्ट्रीय अधिवेशन में जदयू और आरजेडी के विलय की कोई बात होगी? तो, उन्होंने इस बात पर कोई भी टिप्पणी करने से मना कर दिया।

जदयू और राजद का विलय खारिज

वहीं, जदयू के दूसरे राष्ट्रीय सचिव अफाक अहमद खान बताते हैं कि राष्ट्रीय अधिवेशन की बैठक दूसरे राज्यों में जदयू के संगठन को कैसे मजबूत करना है। राष्ट्रीय स्तर पर जदयू कैसे काम करें, इसको लेकर होने वाला है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कई राज्यों में विधानसभा का चुनाव है 2023 में कुल 9 राज्यों में चुनाव होने हैं।

इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना, त्रिपुरा, मेघालय, नागालैंड और मिजोरम शामिल है। वहीं, 2024 में लोकसभा चुनाव है। इन सभी चुनाव में जदयू की क्या भूमिका रहने वाली है। इस पर चर्चा होगी। आफाक अहमद खान ने भी जदयू और राजद के विलय को खारिज कर दिया। उन्होंने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है ।

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