रूबन में काेराेना की पुष्टि हुई ताे एम्स किया गया:काेराेना की नहीं कराई जांच; 17 दिन बाद बच्चे ने एम्स में तोड़ा दम

मुजफ्फरपुर/पटनाएक महीने पहलेलेखक: धनंजय मिश्र
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मुजफ्फरपुर के लक्ष्मी चाैक वार्ड-3 के लेन नंबर-6 निवासी पेंटर विशुन महताे का 4 वर्षीय पुत्र अभि कुमार अब नहीं रहा। काेराेना की चपेट में आने से 3 जुलाई की सुबह 4 बजे एम्स पटना में उसकी माैत हाे गई। आश्चर्य की बात है कि मुजफ्फरपुर से लेकर पटना तक अभि का 6 दिन तक विभिन्न अस्पतालाें में इलाज हाेता रहा, लेकिन किसी ने भी उसकी काेराेना जांच नहीं कराई।

7वें दिन पीएमसीएच की अव्यवस्था से परेशान हाेकर परिजनों ने पटना के रूबन अस्पताल में भर्ती कराया। वहां जांच में काेराेना की पुष्टि हुई। इसके बाद फिर एम्स में इलाज के 9 दिन बाद माैत हाे गई। मुजफ्फरपुर जिले में इस सीजन में कोरोना से यह पहली माैत है। लेकिन, स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। नाेडल अधिकारी से लेकर सिविल सर्जन तक काे अभि की माैत की जानकारी नहीं है। दैनिक भास्कर ने अभि के परिजनाें के पास मंगलवार काे पहुंचकर यह जाना कि आखिर अभि की माैत कैसे हुई। परिजनाें ने जो बताया, पढ़िए हू-ब-हू...

पैर में खुजली से शुरू हुआ था इन्फेक्शन, जाे माैत के बाद थमा, प्राेटाेकाॅल का पालन हाेता ताे बच जाती जान

मासूम के पिता विशुन महताे ने बताया कि 16 जून काे खेलने के क्रम में उसके पैर में खुजली हाेने लगी। पैर फूल गया। 17 काे जूरन छपरा स्थिति निजी चिकित्सक डाॅ. सत्यानंद चाैधरी से दिखाया। लेकिन स्थिति गंभीर हाेती गई। 18 काे केजरीवाल में भर्ती कराया। वहां डाॅ. राजीव कुमार ने इलाज शुरू कर बच्चे काे भर्ती कर लिया। 19 काे रविवार हाेने के कारण वे अस्पताल नहीं आए। राउंड में आए डाॅक्टर ने दाेपहर में स्थिति गंभीर देखकर आईजीआईएमएस रेफर कर दिया।

लेकिन, स्टाफ ने इसकी जानकारी नहीं दी। रात में जब फिर डाॅक्टर राउंड पर आए तब रेफर की जानकारी दी गई। फिर रात में ही अभि काे लेकर आईजीआईएमएस ले गए। वहां बेड नहीं मिला तो पीएमसीएच की इमरजेंसी में भर्ती कराया। स्थिति गंभीर हाेती जा रही थी। फिर रूबन अस्पताल में भर्ती कराया। तीन दिन तक वहां इलाज चला। बच्चे के गंभीर हाेने पर वहां काेराेना आरटीपीसीआर जांच कराई गई।

इसके बाद काेराेना की पुष्टि हाेने पर एम्स रेफर कर दिया गया। 23 जून काे जब एम्स पहुंचा ताे काफी गंभीर हालत हाेने पर भर्ती लेने से मना कर दिया। फिर एक डॉक्टर ने अपने स्तर से प्रबंधन से बात कर किसी तरह भर्ती कराया। वहां 9 दिन तक इलाज हुआ। 3 जुलाई की सुबह 4 बजे अभि ने दम ताेड़ दिया।

जिले में कोरोना से मौत की कोई जानकारी नहीं मिली है। यदि पटना में जिले के बच्चे की मौत हुई है, तो परिजनों की कोरोना जांच के लिए मेडिकल टीम भेजी जाएगी।

-डॉ. उपेंद्र चौधरी, नोडल अधिकारी, कोरोना

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