बिहार में खराब सड़कें करियर कर रही खराब:फोर्स की तैयारी करने वाले 10% युवा शिकार, ऑपरेशन में 1.5-2 लाख का खर्च

पटना3 महीने पहलेलेखक: मनीष मिश्रा

बिहार में फोर्स की तैयारी कर रहे 10 प्रतिशत यूथ का घुटना फेल हो रहा है। एंकल स्प्रेन यानी लिगामेंट में चोट का खराब सड़कों पर नौकरी के लिए दौड़ है। प्रैक्टिस के लिए ट्रैक नहीं होने से अधिक संख्या में यूथ का कैरियर चौपट हो रहा है। ऑपरेशन में डेढ़ से दो लाख रुपए का खर्च और एक साल की छुट्‌टी हो रही है। यह चौंकाने वाला खुलासा पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के डिपार्टमेंट ऑफ फिजियोथेरेपी के डॉक्टरों की शोध में हुआ है।

विश्व में पहली बार क्रूसिएट लिगामेंट इंज्युरी में आम मरीजों पर शोध किया गया है। इसके पूर्व लंदन में स्टडी की गई थी, लेकिन उसमे आम लोगों के बजाए 15 फुटबाल खिलाड़ियों को शामिल किया गया था। आंकड़ों की बात करें तो बिहार में क्रूसिएट लिगामेंट इंज्युरी के मरीजों में 10 प्रतिशत नौकरी की तैयारी करने वाले ही हैं।

60 सामान्य मरीजों पर किया गया शोध

इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के फिजियोथेरेपी विभाग के सीनियर डॉक्टर रत्नेश चौधरी का कहना है कि विश्व में पहली बार आम लोगों पर क्रूसिएट लिगामेंट इंज्युरी पर शोध किया गया है। इससे पूर्व लंदन में शोध किया गया था, लेकिन उसमें आम इंसानों के बजाय 15 फुटबाल खिलाड़ियों को शामिल किया गया था।

बिहार में पहली बार ऐसा हुआ है कि आम लोगों पर शोध किया गया है। इसमें जो सबसे बड़ी बात सामने आई है उसके मुताबिक सड़कों पर दौड़कर प्रैक्टिस करने वाले या फिर नौकरी की तैयारी करने वालों में अधिक समस्या देखी गई है। फोर्स की तैयारी करने वाले अधिकतर यूथ सड़कों पर या फिर उबड़ खाबड़ मैदान में दौड़ते हें, इस कारण से उनके घुटने में समस्या आ रही है। शोध में यह बड़ा मामला सामने आया है, इसके साथ ही यह भी शोध में पता चला है कि ऑपरेशन के पहले और ऑपरेशन के बाद फिजियोथेरेपी कराने वाले मरीजों की समस्या जल्दी ठीक हो रही है।

फूल रहा है घुटना।
फूल रहा है घुटना।

1600 से अधिक शोध में बिहार अव्वल

डॉक्टर रत्नेश चौधरी और असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अविनाश कुमार भारती ने बताया कि IGIMS पटना के फिजियोथेरेपी एवं हड्डी विभाग के संयुक्त तत्वाधान में 60 से ज्यादा मरीजों पर किए गए रिसर्च पेपर को हैदराबाद में प्रथम पुरस्कार भी मिला है। रिसर्च पेपर इफेक्टिवनेस ऑफ़ अर्ली मोबलाइजेशन ऑफटर ACL रिपेयर को 2018 में शुरू किया गया जो अभी भी जारी है।

हैदराबाद में मल्ला रेड्डी यूनिवर्सिटी और इंडियन फिजियो फाउंडेशन ने 60 मरीजों पर हुए रिसर्च पेपर को इंटरनेशनल कांफ्रेंस में प्रथम पुरस्कार दिया है। इस कांफ्रेंस में इंडोनेशिया, मलेशिया, बेल्जियम, दुबई, बांग्लादेश, इटली,इंग्लैंड और भारत सहित कई अन्य देशों से आए 1600 से ज्यादा डॉक्टर्स, पीएचडी स्काॅलर ने हिस्सा लिया और रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया था। रिसर्च को IGIMS पटना के वरीय फिजिथेरेपिस्ट और योग इंचार्ज डॉ रत्नेश चौधरी, फिजियो डॉ. अविनाश कुमार और हड्डी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ मनीष कुमार और टीम ने किया है।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में खतरा

शोध करने वाले डॉक्टरों का कहना है कि बिहार में फोर्स की तैयारी करने वाले स्टूडेंट अक्सर गलती करते हैं। सिपाही-दरोगा की तैयारी करने वालों में अधिक मामले हैं। उबड़ खाबड़ सड़कों पर दौड़ने के कारण ही लिगामेंट टूटने के मामले आए हैं। घटने के लिगामेंट टूटने के जो मरीज अस्पताल में आ रहे हैं, उसमें 5 से 10 प्रतिशत मरीज ऐसे ही होते हैं जो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। इसमें फिजियोथेरेपी और ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है।

शोध में यह भी आया है कि जिन मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत पड़ रही है, उन्हें प्री और पोस्ट ऑपरेशन फिजियोथेरेपी कराने से जल्दी लाभ मिलता है। डॉक्टर रत्नेश का कहना है कि सड़क और मैदान के साथ अवेयरनेस नहीं होना भी काफी हद तक जिम्मेदार है। शोध में ऐसे मरीज अधिक पाए गए जो फोर्स की तैयारी कर रहे हैं। एम डी खजामुद्दीन दरोगा की तैयारी कर रहा था, सड़क पर दौड़ने के दौरान लिगामेंट टूटा। वह एक साल तक प्रैक्टिस नहीं कर पाएगा। IGIMS में उसका इलाज चल रहा है।

छात्र अपना इलाज करवा रहा है।
छात्र अपना इलाज करवा रहा है।

संसाधन की गलती यूथ पर भारी

डॉक्टरों का कहना है कि घुटने के लिगामेंट टूटने के बाद कम से कम 6 माह तक स्टूडेंट्स दौड़ नहीं पाता है। अगर फिजियोथेरेपी से काम चला तो 6 माह, अगर ऑपरेशन की जरूरत पड़ी तो 9 से 12 माह तक का समय दौड़ने के लिए लग जाता है। ऑपरेशन वाले केस में डेढ़ से दो लाख रुपए का खर्च आता है, जबकि पॅजियोथेरेपी में IGIMS में 5 हजार का खर्च होता है।

अगर संसाधन हो तो कैंडीडेट्स के लिए ऐसी समस्या नहीं होगी। डॉक्टरों का कहना है कि घुटने की कई नसें, जैसे ACL, PCL, MCL आदि टूटने के बाद जरूरत के अनुसार सर्जरी की जाती है। सर्जरी से पहले और बाद में फिजियोथेरेपी काफी आवश्यक है। अगर ऐसा नहीं किया गया तो मरीजों की मुश्किल बढ़ती जाती है। समय पर सही इलाज नहीं होता है ताे मरीज को जीवन भर व्यायाम और फिजियोथेरेपी करना पड़ता है। मरीज के विकलांग होने की संभावना अधिक होती है। बिहार में नई सरकार में नौकरी की घोषणा के साथ तैयारी तेज हो गई है। ऐसे में स्टूडेंट्स को पूरी तरह से अलर्ट रहकर फिजिकल एक्सरसाइज करना होगा।