पद्मश्री शारदा सिन्हा से जानिए छठ गीतों के मायने,VIDEO:कहा- परिवार का नाम और मन्नतों को जोड़कर गीत बनाती हूं, परम्परा और माटी की महक इसे जिंदा कर देती हैं

पटना/धनबाद2 महीने पहले
पद्मश्री शारदा सिन्हा। (फाइल)

देशभर में छठ महापर्व की तैयारी शुरू हो चुकी है। विदेशों में भी इसे बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। नहाय खाय के साथ बुधवार और गुरुवार को व्रत करने वाले भगवान सूर्य की आराधना करेंगे।

इस महापर्व में नदी घाटों पर सुंदर सजावट के साथ व्रतियों के द्वारा बनाए जाने वाले प्रसाद का एक अलग ही महत्व है। छठ के गीत इसमें माटी की महक और सालों से चली आ रही परंपरा को जीवित कर देते हैं।

छठ गीत का नाम लेते ही जुबान पर सिर्फ एक शख्स का नाम आता है और वो हैं शारदा सिन्हा। आज की पीढ़ी भी उनके गीतों को खूब पसंद करती है। आइए जानते हैं छठ के 8 गीतों के मायने शारदा सिन्हा के शब्दो में...

1. केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव...

शारदा सिन्हा बताती हैं कि मेरे ससुराल में छठ होता था। बहुएं बैलगाड़ी पर चढ़कर घाट जाती थीं। घाट पर गाए जाने वाले छठ गीतों की उस मिठास को आज भी महसूस करती हूं। भावनाओं में बहकर गाने लगती हूं- केलवा के पात पर उगेलन सूरज देव झांकी-झुकी... इस गीत में भगवान सूर्य की महिमा का बहुत ही खूबसूरत चित्रण है। गाते हुए ऐसा लगता है मानो स्वयं सूर्य देव भक्तों के बीच आ गए हों।

2. पहिले-पहिले छठ मइया...
शारदा सिन्हा बताती हैं कि विदेश में रहने वाले बिहारियों और घर आने की उनकी छटपटाहट छठ गीत में आई। पहिले-पहिले छठ मइया...गीत को लोगों ने खूब पसंद किया। मैं आज भी छठ गीतों के लिए मां की दी हुई उस किताब को जरूर देखती हूं, जिसमें ढेर सारे गीत हैं। मां कहती थी अगर चार लाइन का भी छठ गीत है, तो उसमें परिवार का नाम और मन्नतों को जोड़-जोड़कर बड़ा बना सकती हो।

3. रूनकी-झुनकी बेटी मांगीला पढ़ल पंडितवा दामाद...
वो कहती हैं एक गीत याद आता है... रूनकी झुनकी बेटी मांगीला, पढ़ल पंडितवा दामाद छठी मइया दर्शन दींही ना आपन... एक आदर्श परिवार की परिकल्पना है, परिवार में खेलती कूदती बेटी चाहिए, पर दामाद धनवान नहीं बल्कि पढ़ा-लिखा चाहिए। व्रती समाज में उठने-बैठने लायक बेटे की कामना करते हैं जो कुल का नाम आगे बढ़ाए। छठ ही एक ऐसा त्योहार है, जिसमें बेटियां मांगी जाती हैं।

4. उगिहें सुरुज गोसइयां हे...
छठ का दउरा, सूप, नारियल, ठेकुआ यह सब भगवान सूर्य को अर्पित किए जाने वाले वो प्रसाद हैं, जो ग्रहण करते समय अमृत तुल्य लगते हैं। छठी मइया को यही प्रसाद पसंद आते हैं। इस प्रसाद को अर्पित करते हुए भगवान भास्कर और छठी मइया से संतान का वरदान मांगा जाता है।

पटना के गंगा घाट पर नहाय खाय से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।
पटना के गंगा घाट पर नहाय खाय से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

5. अइसन बिपतिया आएल, बरत लगाईं पार...
शारदा सिन्हा ने कहा कि लोग दो वर्षों से कोरोना की वजह से छठ करने घाटों पर नहीं गए, पर इस वर्ष हर कोई चाहता है कि व्रत अच्छी तरह से गुजर जाए। इसी को बयान करते हुए मैंने गाया... अइसन बिपतिया आएल, बरत लगाईं पार, हे छठी मैया बरत लगाईं ना पार।

6. डोमिन बेटी सूप ले ले ढाड़ छे, अंगना में पोखरी...
समय बदला है, लेकिन प्रकृति का यह पर्व आज तक उसी रूप में चलता आ रहा है। 1978 में एचएमवी में काफी मनुहार के बाद पहला छठ गीत रिकॉर्ड हुआ- डोमिन बेटी सूप ले ले ढाड़ छे...अंगना में पोखरी खनाइब, छठी मइया अइतन आज... आप देखिए इस गीत में ऊंच-नीच, छोटे-बड़े सभी तरह के भेदभाव टूटते हैं। गीत में बताया गया है कि हर जाति का अपना खास महत्व है।

7. शामा खेले चलली भौजी संग सहेली…
छठ संयुक्त परिवार में ही मनाने की परंपरा है। व्रत चाहे कोई करे, पूरा परिवार छठमय हो जाता है। क्या छोटा क्या बड़ा, हर कोई इसमें सहयोग करता है। यह गीत छठ में परिवार के संयुक्त होने का महत्व बतलाता है। ननद-भौजाई के पवित्र रिश्ते को इस गीत बहुत ही सुंदर तरीके से बताया गया है।

8. हे गंगा मैया…
छठ में गंगा मइया के जल से भगवान भास्कर को अर्घ्य दिया जाता है। गंगा मइया की भी छठ में अपरंपार महिमा है। माना जाता है कि छठ में भगवान सूर्य के साथ गंगा माता भी भक्तों की मनोकामना सुनती और उसे पूरा करती हैं।

रिपोर्ट: कन्हैया सिंह।