ऐसे कैसे लड़ेंगे कोरोना से / अपनी जान हथेली पर रख मरीजों का इलाज कर पीएमसीएच में डॉक्टरों के लिए सेनेटाइजर नहीं, तो एनएमसीएच में मास्क की कमी

एनएमसीएच में बुधवार को अल्टरनेट डे ड्यूटी समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर अधीक्षक कार्यालय का घेराव करते जूनियर डॉक्टर व नर्स। एनएमसीएच में बुधवार को अल्टरनेट डे ड्यूटी समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर अधीक्षक कार्यालय का घेराव करते जूनियर डॉक्टर व नर्स।
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एनएमसीएच में बुधवार को अल्टरनेट डे ड्यूटी समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर अधीक्षक कार्यालय का घेराव करते जूनियर डॉक्टर व नर्स।एनएमसीएच में बुधवार को अल्टरनेट डे ड्यूटी समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर अधीक्षक कार्यालय का घेराव करते जूनियर डॉक्टर व नर्स।

  • जूनियर डॉक्टरों ने आरोप लगाया कि उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए मास्क सही मात्रा में नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
  • डॉक्टरों का कहना है कि जहां डॉक्टरों के बैठने की जगह निर्धारित की गई है, वहां पर जगह काफी कम है और मरीजों की संख्या अधिक

दैनिक भास्कर

Mar 26, 2020, 02:06 AM IST

पटना. एनएमसीएच के डॉक्टर अपनी जान हथेली पर रख कोरोना के संदिग्धों और मरीजों का इलाज कर रहे हैं। वहां अभी दो पॉजिटिव मरीज भर्ती हैं। इसके बावजूद डाॅक्टराें काे जरूरी सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही हैं। न तो उन्हें सुरक्षा से संबंधित जरूरी चीजें उपलब्ध कराई जा रही हैं और न ही ऐसी जगह मुहैया कराई जा रही, जहां बैठकर वे सोशल डिस्टेंसिंग के तहत मरीजों का इलाज कर सकें। बुधवार को तो डॉक्टरों ने इमरजेंसी वार्ड के बाहर ही पेड़ के नीचे मरीजों का इलाज शुरू कर दिया।

असंतुष्ट जूनियर डॉक्टरों ने अधीक्षक का घेराव भी किया और आरोप लगाया कि उन्हें आइसोलेशन वार्ड में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए पीपीई किट, एन-95 मास्क और हैंड सेनेटाइजर सही मात्रा में नहीं उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि हमारी पढ़ाई में भी अवरोध उत्पन्न हो गया है। ऐसे में हमारा तबादला दूसरे महाविद्यालय में किया जाए। इधर, पीएमसीएच के चिकित्सकों ने भी सेनेटाइजर खत्म होने की बात कही। 

डॉक्टरों का कहना है कि जहां डॉक्टरों के बैठने की जगह निर्धारित की गई है, वहां पर जगह काफी कम है और मरीजों की संख्या अधिक। इस स्थिति में डॉक्टर व मरीजों के बीच की दूरी काफी कम हो जाती है। ऐसे में इमरजेंसी वार्ड के भीतर के बदले उसके गेट के बाहर पेड़ की छांव में टेबुल-कुर्सी लगाकर बैठ गए और मरीजों काे परामर्श दिया। जब धूप अधिक बढ़ी तब रजिस्ट्रेशन काउंटर के शेड के नीचे चले गए। इस संबंध में वरीय उपाध्यक्ष डाॅ. अजय कुमार ने कहा कि कई तरह की सावधानियां बतरने की जरूरत है। इस तरह से इलाज को सही या गलत कहना जल्दबाजी हाेगी। जूनियर डॉक्टरों की आठ सूत्री मांग और उनके द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर अस्पताल के अधीक्षक डाॅ. गाेपाल कृष्ण ने कहा कि अस्पताल में अाज भी पर्याप्त मात्रा में एन 95 मास्क मंगाए गए हैं। ग्लब्स और सेनेटाइजर की कमी नहीं है। डॉक्टर की सुरक्षा से संबंधित किसी तरह की कमी को पूरा करने के लिए हर कोशिश की जा रही है।

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