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अपील:कोविड-19 के कारण अनाथ हुए बच्चों को गोद लेने के लिए कानूनी प्रक्रिया जरूरी, इच्छुक करें संपर्क

हाजीपुरएक महीने पहले
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  • किसी संस्था, अस्पताल या किसी व्यक्ति का गैर कानूनी तौर पर गोद देना व लेना कानूनी अपराध है

किसी संस्था, अस्पताल या किसी व्यक्ति द्वारा किसी परिवार को बच्चे को गैर कानूनी तौर पर गोद देना व लेना कानूनी अपराध है और जब भी बच्चा गोद लिया जाता है तो उसे कानूनी रूप से गोद लेना चाहिए। ये बातें सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाईं प्रशांत कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि इस समय हम कोरोना काल की स्थिति से गुजर रहे हैं, जिसमें हर परिवार किसी न किसी रूप में कोरोना की चपेट में आया है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अन्य जिलों में यह देखा गया है कि जिन परिवारों के माता-पिता या परिवार के अन्य सदस्यों की मृत्यु कोरोना या किसी अन्य कारण से हुई है। उनके बच्चों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट की जा रही हैं। लोगों को बच्चों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने कहा ऐसे में अगर किसी परिवार को बच्चा गोद लेना है तो उसे कानूनी रूप से लिया जाए। बिना कानूनी प्रक्रिया के बच्चे को गोद लेना भी अपराध है और ऐसा करने पर किशोर न्याय अधिनियम, 2015 की धारा 80 के तहत बिना किसी कानूनी कार्रवाई के बच्चे को गोद लेना और देना कानूनी अपराध है। इसके लिए तीन साल की सजा या एक लाख रुपए का जुर्माने का प्रावधान है या दोनों भी किए जा सकते हैं। उन्होंने जिला के लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी को ऐसे असहाय बच्चे मिलते हैं जिनके परिवार के मुखिया की मृत्यु कोरोना के कारण हो गई है या उनके माता-पिता कोरोना पॉजिटिव हैं और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है और उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है तो बच्चों के संबंध में सूचना चाल्डलाइन आपात कालीन नंबर-1098 पर अथवा विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के संपर्क नंबर - 7644937969 पर दिया जा सकता है। वहीं, अनाथ बच्चों को गोद लेने वाले इच्छुक व्यक्ति चाल्डलाइन हेल्पलाइन नंबर 1098 या जिला बाल संरक्षण इकाई, वैशाली हाजीपुर समाहरणालय कार्यालय से एवं विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान एसडीओ रोड से अथवा केन्द्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (cara.nic.in) पर सम्पर्क कर सकते हैं।

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