छठ घाट लाइव:जेपी सेतु के पास रहता था समुद्र तट जैसा नजारा, इस बार अभी दलदल; दावा-दाे दिन में तैयार हाे जाएंगे घाट

पटनाएक महीने पहलेलेखक: आलोक कुमार
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ब्रिज के पश्चिम पाटी पुल घाट और उससे लगे मीनार घाट और जनार्दन घाट पर करीब 75 फीसदी काम हो चुका पूरा...अब पीपापुल को जोड़ना मुश्किल - Dainik Bhaskar
ब्रिज के पश्चिम पाटी पुल घाट और उससे लगे मीनार घाट और जनार्दन घाट पर करीब 75 फीसदी काम हो चुका पूरा...अब पीपापुल को जोड़ना मुश्किल

जेपी सेतु के पूरब-पश्चिम कई साल से पटनावासियों के लिए सबसे बड़े छठ घाट के रूप में लोकप्रिय है। यहां वाहन पार्किंग के लिए बेहिसाब जगह है। लेकिन, इसबार जगह-जगह दलदल से लाेग दुविधा में हैं कि इसबार छठ करने किस घाट जाएं? हालांकि प्रशासन का दावा है कि दो दिन के अंदर छठ घाट काे ठीक कर दिया जाएगा।

शनिवार को भास्कर की टीम दीघा 93 नंबर घाट पर पहुंची, तो हर बार छठ में गोवा के सी बीच की तरह दिखने वाले नजारे की जगह दलदल नजर आई। बिंद टोली घाट, 93 नंबर से आगे 88 नंबर घाट, 83 नंबर घाट, कुर्जी बालू पर घाट, कुर्जी घाट और एलसीटी घाट पर भी कमोबेश इसी तरह का नजारा दिखा। वैसे इन घाटों को दुरुस्त करने में प्रशासन की टीम लगी है।

गंगा का पानी लगातार नीचे उतरने की वजह से प्रशासन वेट एंड वॉच की स्थिति में है। लेकिन दीघा ब्रिज के पश्चिम पाटी पुल घाट और उससे लगे मीनार घाट और जनार्दन घाट पर करीब 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है। इन घाटों पर पानी नीचे है, इसलिए मिट्टी काटकर सीढ़ियां बनाई गई हैं और पानी में बैरिकेडिंग लगाने का काम शुरू है।

चेंजिंग रूम बन गया है। वॉच टावर तैयार हो गए हैं। कंट्रोल रूम भी बन गया है। टॉयलेट का काम चल रहा है और घाट पर रुकने वाले व्रतियों के लिए टेंट लगाने की तैयारी चल रही है। आइए जानें अभी किस घाट का क्या है हाल।

दीघा पाटी पुल घाट
जेपी सेतु के एप्रोच से ठीक पहले सर्विस लेन से और ब्रिज के अंडरपास से भी पाटी पुल घाट तक पहुंचने का रास्ता तैयार है। गंगा में बैरिकेडिंग का काम चल रहा है। मिट्टी को काटकर सीढ़ियां बनाई गई हैं। घाट किनारे चेंजिंग रूम और टॉयलेट बनाए जा रहे हैं। वॉच टावर पर लाइट्स लगा दी गई हैं। निगमकर्मी नलीन प्रसाद ने बताया कि 8 तारीख तक काम पूरा हो जाएगा। जो व्रती घाट पर रुकना चाहेंगे, उनके लिए टेंट लगाने और उसमें पुआल डालकर दरी बिछाने की योजना है।

दीघा मीनार घाट
बैरिकेडिंग का काम चल रहा है। चेजिंग रूम बन गया है। वॉच टावर बनाकर लाइट्स लगा दी गई हैं। लेकिन घाट के ऊपरी हिस्से की जमीन को पूरी तरह समतल करने का काम बाकी है। मशीन लगी हुई दिखी पर कोई कर्मी नहीं दिखा।

दीघा जनार्दन घाट
घाट बन गया है। वॉच टावर के लिए लकड़ी के बल्ले गाड़ दिए गए हैं। लेकिन, लाइट्स नहीं लगी हैं और वायरिंग भी कंप्लीट नहीं है। पानी के अंदर बैरिकेडिंग हो गई है और घाट तक पहुंचने के लिए रास्ता भी कंप्लीट है। पर फिनिशिंग का काम अभी बाकी है।

जेपी सेतु बिंद टोली
जेपी सेतु के नीचे पूरब तरफ थोड़ी दूर तक लाल कपड़े से घेर दिया गया है, ताकि ज्यादा पानी रहने से लोग इधर नहीं आएं। थोड़ा और पूरब बढ़ने के बाद जेपी सेतु बिंद टोली घाट है, जहां सुविधाओं को लेकर लकड़ी के बल्ले गिराए हुए हैं। पर काम यहां पूरा नहीं दिखा।

कुर्जी बालू पर घाट
लोकनायक गंगा पथ से नीचे के अंडरपास के रास्ते कुर्जी बालू पर घाट तक पहुंचने का रास्ता तैयार है, लेकिन घाट पर सिर्फ एक जगह लकड़ी के बल्ले से तैयार वॉच टॉवर पर लाल कपड़ा लपेटा हुआ है। और कोई व्यवस्था वहां नहीं दिखी।

कुर्जी घाट
लोकनायक गंगा पथ का एलिवेटेड पुल यहां बन रहा है। पुल के नीचे से रास्ता बना हुआ है। घाट तक पहुंचने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन घाट पर थोड़ा दूर पानी है, उसके बाद टापू सा बना हुआ है और उसके चारो तरफ गीली रेतीली मिट्टी है। इस घाट पर भी पानी लगातार घटने से प्रशासन को दिक्कत हो रही है।

दीघा 83 नंबर घाट
इस घाट पर भी एप्रोच रोड बन गया है, लेकिन फिनिशिंग बाकी है। कनात लगाने से लेकर वॉच टावर का काम हो गया है। लेकिन, वॉच टावर पर लाइट लगाने का काम अभी चल रहा है। इस घाट पर भी गंगा के रूख में लगातार बदलाव को देखते हुए व्रतियों के लिए चेंजिंग रूम, बैरिकेडिंग आदि नहीं बना है।

एलसीटी घाट पर चार फीट दलदल में धंसी जेसीबी
एलसीटी घाट पर चार फीट दलदल में धंसी जेसीबी

​​​​​​एलसीटी घाट तक पहुंचने के लिए अप्रोच रोड तैयार है। गंगा पाथवे से घाट तक अस्थायी पथ बन गया है। अस्थायी पथ की दूरी करीब दो किमी है। घाट तैयार नहीं है। घाट के ऊपरी हिस्से में दलदल है। पैदल चलने पर पैर जहां-तहां धंस रहा है। जेसीबी घाट तैयार करने के लिए लाई गई तो तीन फीट दलदल में धंस गया। देर शाम तक दूसरी जेसीबी से निकाली गई। लगभग 20 फीट दूरी तक दलदल है।

घाट की लंबाई करीब 400 फीट है, जिसमें करीब 20 फीट दलदल है। करीब 280 फीट घाट के लिए जगह है। अभी सीढ़ीनुमा घाट नहीं बना है। बास-बल्ला डाल दिया गया है। घाट के पास मौजूद कर्मी के मुताबिक घाट के गहराई 3-5 फीट है।

एप्रोच रोड तैयार, घाट के ऊपरी हिस्से में 10 फीट तक दलदल
छठ पूजा आयोजन स्थल के आस-पास खतरनाक है। गंगा की तेज धारा से कटाव जारी है। इससे लाल कपड़ा से घेर दिया गया है।