NIA की जांच में सामने आया PFI का प्लान B:अलग-अलग नामों से कई संगठन, सोशल वर्क के नाम पर धन जुटा देश विरोधी मुहिम

पटना2 महीने पहले

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) ने अपना प्लान B तैयार कर रखा है। अगर केंद्र सरकार PFI पर प्रतिबंध लगाती है तो इससे जुड़े लोग तैयार किए गए प्लान B को एक्टिवेट कर देंगे। इस प्लान के तहत भी वही काम होंगे, जो PFI अब तक करती आ रही है। मतलब, अलग-अलग नाम से तैयार किए गए संगठनों को एक्टिव किया जाएगा।

सोशल वर्क के नाम पर उन संगठनों की ओर से बड़े स्तर पर रुपए जुटाए जाएंगे। फिर इसका इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, चौंकाने वाली बातें राष्ट्रीय जांच एजेंसी NIA की जांच में सामने आई है। PFI के ऊपर भी देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने का ही गंभीर आरोप लगा है।

PFI का मामला पटना के फुलवारी शरीफ से सामने आया था। शुरुआत में पटना पुलिस ने जांच करते हुए FIR दर्ज कर कार्रवाई की थी। पर बाद में यह केस NIA के हवाले कर दिया गया था। 22 सितंबर को ही NIA ने बड़ी कार्रवाई करते हुए देश के 15 राज्यों में कुल 93 लोकेशन पर छापेमारी की थी। इससे जुड़े 106 सदस्यों को गिरफ्तार भी किया।

जांच में 9 नए संगठनों के नाम आए सामने
जांच के बाद जो बातें सामने आई हैं, उसके अनुसार जांच एजेंसियों की आंख में धूल झोंकने के लिए ही PFI ने अपना प्लान B सेट कर रखा है। इसके लिए 9 अलग-अलग नामों से संगठन बनाए गए हैं। इनके जरिए अपने प्लान को अंजाम तक पहुंचाने की कवायद की जाएगी।

मिशन हिंदुस्तान को किया डिकोड
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जांच के दौरान PFI के मिशन हिंदुस्तान को डिकोड कर लिया है। यह संभव तब हो पाया, जब देश भर के अलग-अलग राज्यों में जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई तेजी से शुरू की। वहां PFI के सक्रिय सदस्यों को अपने कब्जे में लिया। उनसे पूछताछ की। तब जाकर कई खुलासे हुए। जिसमें अलग-अलग नाम से बनाए गए संगठनों की पहचान सामने आई। इन संगठनों के जरिए देश के तमाम शहरों में राष्ट्र विरोधी मुहिम को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाना ही मुख्य मकसद है।

दक्षिण के बाद उत्तर भारत में अपनी जड़ें मजबूत कर रहा था PFI
पटना के फुलवारी शरीफ के बाद तेलंगाना में PFI के सदस्यों की गिरफ्तारी हुई थी। इनके पास से कई डॉक्यूमेंट्स और डिजिटल सबूत बरामद हुए थे। इसके आधार पर एक इंटरनल रिपोर्ट तैयार की गई। जिसके बाद यह बात सामने आई कि देश के अंदर अपनी जड़ों को मजबूत करने के लिए PFI ने पूरा रोडमैप ही तैयार कर रखा है। इसी रोडमैप के तहत उसने पहले केरल व तेलंगाना सहित दक्षिण भारत के राज्यों में खुद को मजबूत स्थिति में लाया।

इसके बाद उत्तर भारत को टारगेट किया। अपनी जड़ें उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में फैलानी शुरू की। कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों, कॉलेजों, मदरसों के साथ ही मुस्लिम बहुल मोहल्लों में बेरोजगार नौजवानों को टारगेट किया गया। ब्रेनवॉश कर उन्हें संगठन से जोड़ा जाने लगा। अपने मकसद के तहत प्रशिक्षण के दौरान संगठन से जुड़े लोगों को कट्टरपंथी बनाने के लिए पैगंबर मोहम्मद के संघर्ष से उनके संघर्ष की तुलना भी की जाती है।

बता दें पटना पुलिस ने देश के खिलाफ साजिश रचने के आरोप में चार संदिग्धों (अतहर परवेज, मो. जलालुद्दीन, अरमान मलिक और एडवोकेट नूरुद्दीन जंगी) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक ये चारों ही PFI से जुड़े हैं।

PFI बिहार में साल 2016 से सक्रिय है। पूर्णिया जिले में संगठन ने हेडक्वार्टर स्थापित करने की तैयारियां की थी। इसके अलावा राज्य के 15 से अधिक जिले में ट्रेनिंग सेंटर भी चलाए हैं। पटना में गिरफ्तारियों के बाद अब जांच NIA कर रही है। NIA ने PFI का नेटवर्क तलाशने के लिए बिहार के कई शहरों में छापेमारी भी की है।

पटना में जांच से जुड़े अधिकारियों ने भास्कर को बताया है कि PFI अनपढ़, बेरोजगार मुस्लिम युवाओं को टारगेट करके अपने साथ जोड़ रहा है। पुलिस जांच में सामने आया है कि युवाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग भी दी गई है। PFI के तार विदेशों से जुड़े होने और बाहर से फंडिंग की भी जांच की जा रही है। पुलिस को PFI के अकाउंट में 90 लाख रुपए मिले हैं।

क्या इतिहास है PFI का

PFI की जड़ें 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुसलमानों के हितों की रक्षा के लिए खड़े हुए आंदोलनों से जुड़ती हैं। 1994 में केरल में मुसलमानों ने नेशनल डेवलपमेंट फंड (NDF) की स्थापना की थी। स्थापना के बाद से ही NDF ने केरल में अपनी जड़ें मजबूत की और इसकी लोकप्रियता बढ़ती गई और इस संगठन की सांप्रदायिक गतिविधियों में संलिप्तता भी सामने आती गई। साल 2003 में कोझिकोड के मराड बीच पर 8 हिंदुओं की हत्या में NDF के कार्यकर्ता गिरफ्तार हुए। इस घटना के बाद BJP ने NDF के ISI से संबंध होने के आरोप लगाए, जिन्हें साबित नहीं किया जा सका।

केरल के अलावा दक्षिण भारतीय राज्यों, तमिलनाडु और कर्नाटक में भी मुसलमानों के लिए काम कर रहे संगठन सक्रिय थे। कर्नाटक में कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी यानी KFD और तमिलनाडु में मनिथा नीति पसाराई (MNP) नाम के संगठन जमीनी स्तर पर मुसलमानों के लिए काम कर रहे थे।

इन संगठनों का भी हिंसक गतिविधियों में नाम आता रहा था। नवंबर 2006 में दिल्ली में हुई एक बैठक के बाद NDF और ये संगठन एक होकर PFI बन गए। इस तरह साल 2007 में PFI अस्तित्व में आया और आज 20 राज्यों में ये संगठन काम कर रहा है।

अब PFI एक संगठित नेटवर्क है जिसकी देश के बीस से अधिक राज्यों में मौजूदगी है। PFI की एक राष्ट्रीय समिति होती है और राज्यों की अलग समितियां होती हैं। ग्राउंड लेवल पर इसके वर्कर होते हैं। समिति के सदस्य हर तीन साल में होने वाले चुनाव से चुने जाते हैं। 2009 में PFIने अपने राजनीतिक दल SDPI (सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी आफ इंडिया) और छात्र संगठन CFI (कैंपस फ्रंट ऑफ इंडिया) का गठन किया था।