शातिर सेटर्स गैंग का मास्टर मांइड गिरफ्तार:सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं को बनाते थे शिकार, वसूलते थे 5-15 लाख, 4 हजार एडमिट कार्ड भी मिले

पटना6 महीने पहले
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पटना में पत्रकार नगर थाना की पुलिस ने शुक्रवार को सेटर्स के जिस गैंग का खुलासा किया था, उसका मास्टर माइंड नालंदा जिले के सरमेरा थाना के तहत चेरो गांव का रहने वाला 26 साल का गोपेश कुमार निकला। बड़े ही शातिराना तरीके से इसका गैंग काम करता था। गैंग ऐसे युवाओं की तलाश में रहता था, जो सरकारी नौकरी करने की चाह रखते है। वैसे युवकों की तलाश कर ये लोग उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। सरकारी नौकरी के लिए होने वाले रिटेन एग्जाम में पास करवाने की पक्की गारंटी लेते थे। इसके एवज में 5 से 15 लाख रुपए प्रति कैंडिडेट वसूल करते थे।

गोपेश कुमार का राइट हैंड इसी के गांव का रहने वाला व बिहार होमगार्ड का जवान प्रभात कुमार है। गया का रहने वाला मनोज कुमार भी गोपेश का बेहद खास साथी है। प्रभात और मनोज को गोपेश ने बड़ी जिम्मेवारी दे रखी थी। इनके बीच जिलों का बंटवारा कर दिया गया था। प्रभात को जमुई, शेखपुरा, मुंगेर तो मनोज को नालंदा, नवादा और गया जिले की जिम्मेदारी दी गई थी। इन जिलों से इन्हें वैसे बेरोजगार युवकों को जुटाने का जिम्मा दिया गया था, जो सरकारी नौकरी करने की चाह रखते हैं। थानेदार मनोरंजन भारती और उनकी टीम की जांच और गिरफ्तार सभी 4 सेटर्स से पूछताछ में यह बातें सामने आई हैं।

SBI का अकाउंट फ्रीज, तीन बैंक से मांगे डिटेल

इन शातिरों के पास कई अलग-अलग बैंकों में कई एकाउंट्स होने के डिटेल्स मिले हैं। इसमें एक अकाउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में है, जिसमें 9 लाख रुपया जमा होने की बात पुलिस को पता चली थी। इस अकाउंट को पुलिस ने फ्रीज करवा दिया है। यह अकाउंट गोपेश की भाभी के नाम पर था। जिसका इस्तेमाल गोपेश कर रहा था। इसके अलावा ICICI, एक्सिस बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा में भी इन शातिरों का अकाउंट है। पुलिस ने तीनों ही बैंकों से इनके अकाउंट्स का डिटेल तत्काल उपलब्ध कराने को कहा है। शातिरों के अकाउंट्स में हुए हर एक ट्रांजेक्शन की पड़ताल की जाएगी। रुपए कब और कहां से आए? किसने जमा किया? इस बारे में जांच की जाएगी।

सेटर्स के पास से जब्त किए गए सामान।
सेटर्स के पास से जब्त किए गए सामान।

पिछले एक साल हिस्ट्री खंगालेगी पुलिस

सरकारी नौकरी का एग्जाम पास करवाने के नाम पर सेटर्स की ठगी यह खेल दो साल से भी अधिक समय से चल रहा था। जब पुलिस ने इनके मोबाइल को चेक किया तो उसमें करीब 3 से 4 हजार कैंडिडेट्स के ऑरिजनल एडमिट कार्ड की सॉफ्ट कॉपी मिली। जो बिहार पुलिस में सिपाही के लिए वेकैंसी निकालने वाली केंद्रीय चयन पर्षद, फायर मैन और FCI के हैं। इस गैंग का कनेक्शन बिहार के अंदर का ही है। इसमें दो नए लोगों का पता चला है। एक जो दिल्ली से इन्हें ब्लूटूथ डिवाइस उपलब्ध कराता था, दूसरा वो जो इनके इशारे पर कम्प्यूटर वर्क के जरिए ऑरिजनल एडमिट कार्ड के साथ छेड़छाड़ कर असली कैंडिडेट की जगह स्कॉलर का फोटो बदल दिया करता है। पुलिस इनके पिछले एक साल की कॉल हिस्ट्री को खंगालेगी। कब और किससे बात की? इसका पता लगाएगी। इनके ईमेल और व्हाट्सएप चैट को भी खंगाला जाएगा।

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