पहले भी सावन में ही नीतीश ने तोड़ा था गठबंधन:दो बार गठबंधन तोड़कर सरकार में बरकरार रहे, जानिए वो तरीके

पटना4 महीने पहलेलेखक: बृजम पांडेय

बिहार में 5 साल बाद फिर सावन के महीने में राजनीति करवट बदल रही है। 2017 जैसी हलचल है। नीतीश की चुप्पी भी पहले जैसी ही है। सिर्फ फर्क इतना है कि उस समय नीतीश कुमार के साथ RJD थी। इस बार BJP है। सावन महीने में अगले दो दिन काफी महत्वपूर्ण हैं। क्या नीतीश ने पांच साल पहले जो फैसले लिए थे, वही इस बार भी लेंगे? या फिर 2013 में BJP के साथ रहते जो कदम उठाए थे, उस रास्ते पर ही चलेंगे।

दैनिक भास्कर में पढ़िए नीतीश के उन दो दांवपेचों की कहानी...

साल 2017 था और महीना सावन...
2017 में नीतीश RJD के साथ सरकार चला रहे थे। लालू के छोटे बेटे उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव और बड़े बेटे तेजप्रताप कैबिनेट में थे। सावन महीने में नीतीश ने RJD से पल्ला झाड़कर BJP का दामन थाम लिया था। तब नीतीश ने राज्यपाल से मिलकर इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में मंत्रिमंडल खुद-ब-खुद भंग हो गया था।

फिर क्या हुआ... नीतीश कुमार ने BJP के समर्थन से फिर नई सरकार बनाई थी।

अब क्या... इस सावन में भी ऐसी ही चर्चा है। नीतीश खुद राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप देंगे। इससे पूरा मंत्रिमंडल ही भंग हो जाएगा। इसके बाद नीतीश RJD, वाम दल और कांग्रेस के साथ मिलकर अपना समर्थन पत्र राज्यपाल को सौंपेंगे। राज्यपाल उन्हें फ्लोर टेस्ट करने का समय देंगे। इसमें केंद्र और राजभवन की भूमिका ना के बराबर होगी।

2017 में भी जब नीतीश RJD के साथ सरकार चला रहे थे तो उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत RJD और JDU के मंत्रिमंडल को ही भंग कर दिया था। (फाइल)
2017 में भी जब नीतीश RJD के साथ सरकार चला रहे थे तो उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव समेत RJD और JDU के मंत्रिमंडल को ही भंग कर दिया था। (फाइल)

अब कहानी 2013 की...
2013 में नरेंद्र मोदी के नाम पर नीतीश कुमार ने BJP से नाता तोड़कर उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया था। तब नीतीश ने तत्कालीन डिप्टी सीएम सुशील मोदी समेत भाजपा के सारे मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया था।

फिर क्या हुआ था... नीतीश कुमार को RJD ने बाहर से समर्थन दिया था। सरकार चलती रही। हालांकि, 2014 में मोदी के पीएम बनने पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया था और जीतनराम मांझी सीएम बने थे।

अब क्या...नीतीश कुमार BJP के सभी मंत्रियों को बर्खास्त कर दें और फिर RJD, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों का समर्थन पत्र राजभवन में देकर नई सरकार बनाने की सिफारिश कर दें। RJD ने पहले ही कह दिया है कि अगर नीतीश पहल करें तो वह तैयार है।

अगर RJD सीएम पद के लिए अड़ी तो...
नीतीश कुमार NDA गठबंधन से अलग होते हैं तो RJD ही वह पार्टी है, जो उन्हें सरकार में रहने में मदद कर सकती है। कहा यह भी जा रहा है कि RJD और राबड़ी देवी तेजस्वी यादव के लिए मुख्यमंत्री पद चाहते हैं। यही एक स्थिति है, जो नीतीश को फंसा सकती है। अगर RJD नहीं मानी तो बिहार में मध्यावधि चुनाव का विकल्प है। हालांकि, इसकी संभावना बहुत ही कम है।

BJP के पास क्या है विकल्प
फिलहाल अगर गठबंधन टूटता है और JDU महागठबंधन में शामिल होती है तो उसकी प्रचंड संख्या के आगे BJP के पास कोई विकल्प नजर नहीं आता है। इसकी वजह यह है कि विधानसभा में BJP न तो सबसे बड़ी पार्टी है और न ही किसी दूसरे दल का उसके पास समर्थन है।

अगर वह दूसरी पार्टियों से कुछ विधायक तोड़ भी लेती है, जाे कांग्रेस और जदयू विधायकों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, वे भी संख्या बल को पूरा नहीं कर पाएंगे। इसकी वजह यह है कि BJP के पास 77 विधायक हैं और सरकार बनाने के लिए 122 विधायक चाहिए।

मंगलवार का दिन अहम
इन अटकलों को लेकर मंगलवार का दिन अहम साबित होने जा रहा है। इसी दिन CM नीतीश कुमार अपने विधायकों के साथ बैठक करेंगे। साथ ही इसी दिन RJD और कांग्रेस ने भी अपने विधायकों की बैठक बुला ली है। सूत्रों की जानकारी के मुताबिक नीतीश कुमार ने 2013 में जो काम किया था, उसी तरह इस बार भी करेंगे।