नीतीश को परदेशी पसंद!:JDU ने राज्यसभा भेजने में 'बाहरियों' पर जताया भरोसा, जार्ज से लेकर हेगड़े तक पहुंचे सदन

पटना3 महीने पहले
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CM नीतीश कुमार अक्सर अपने फैसलों से चौंकाते रहे हैं। यही वजह है कि पिछले 17 सालों में उन्होंने राज्यसभा में बिहार से बाहर के लोगों को भेजा है। JDU सुप्रीमो रहते कुमार के इस फैसले का कभी विरोध भी नहीं हुआ। इस बार भी बिहार से ताल्लुक नहीं रखने वाले अनिल हेगडे को राज्यसभा भेजकर सबको चौंका दिया।

उन्होंने इससे पहले सभी समीकरण को ध्यान में रखकर ही दूसरे राज्यों के लोगों को बिहार से राज्यसभा भेजा। हालांकि, एक तर्क यह दिया जाता है कि JDU का आधार बिहार में ही है, ऐसे में दूसरे राज्यों के लोगों को यहीं से एडजेस्ट करना पड़ा। पिछले 17 सालों में जार्ज फर्नांडिस, केसी त्यागी, पवन वर्मा, हरिवंश, शरद यादव जैसे लोगों को JDU ने राज्यसभा भेजा है।

इस बार कर्नाटक के हेगड़े गए सदन

अनिल हेगडे JDU के पुराने कार्यकर्ता और संगठनकर्ता हैं। 20 मई 1960 में कर्नाटक के उडुपी में जन्म लेने वाले हेगड़े ने अपनी राजनीतिक जीवन की शुरुआत समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस के साथ की थी। जेपी आंदोलन से लेकर जब तक जॉर्ज जीवित रहे तब तक उनके साथ ईमानदारी से रहे। बीच में जॉर्ज और नीतीश कुमार के संबंधों में खटास आई तो वह पार्टी के साथ ईमानदारी से बने रहे थे। उनको इस बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ ईमानदारी से रहने का इनाम मिला है। संगठन पर उनकी पकड़ काफी ज्यादा है। चुनावी प्रक्रियाओं में माहिर और पार्टी के सभी पेपर वर्क को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी हेगड़े पर ही है।

शरद यादव और जार्ज फर्नांडिस। (दाएं)
शरद यादव और जार्ज फर्नांडिस। (दाएं)

जार्ज भी जा चुके हैं राज्यसभा

जार्ज फर्नांडिस ने आपातकाल में दुनिया की सबसे बड़ी रेल हड़ताल का नेतृत्व कर राजनीति में कदम रखा था। मुंबई का ऐतिहासिक टैक्सी आंदोलन और उससे महाराष्ट सरकार को मजदूरों की मांगों के आगे झुकाने का श्रेय भी उन्हीं के नेतृत्व को जाता है। आपातकाल के दौरान भूमिगत रहकर लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को धारदार बनाने और उसमें नौजवानों को जोड़ने का अभियान था। इस कारण ही इंदिरा सरकार ने उनको जेल में बंद कर दिया था। बाद में आपातकाल हटते ही होने वाले लोकसभा चुनाव में उन्होंने जेल में रहकर ही मुजफ्फरपुर लोकसभा चुनाव जीता। मैंगलोर के रहने वाले जार्ज फर्नांडिस JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी रहे, उसके बाद ही नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया।

2013 में त्यागी को भेजा

केसी त्यागी फिलहाल JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता है। लगातार समाजवाद की राजनीति करते हैं। त्यागी पहले जनता दल से जुड़े थे। मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के रहने वाले त्यागी 1989 में लोकसभा चुनाव जीतकर संसद गए थे। JDU के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर दिल्ली में रहकर वह लगातार JDU के पक्ष को मुखर तरीके से रखते रहे हैं। यूपी के भूमिहार जाति से आने वाले त्यागी पार्टी के लिए समर्पित रहे हैं, इसलिए 2013 में नीतीश कुमार ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।

केसी त्यागी और पवन वर्मा। (दाएं)
केसी त्यागी और पवन वर्मा। (दाएं)

दिल्ली वाले पवन वर्मा को भी मिल गया था टिकट

राजनीति में आने से पहले पवन वर्मा एक पूर्व भारतीय विदेश सेवा अधिकारी रहे हैं। साथ ही वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सलाहकार भी रहे। JDU ने उन्हें साल 2014 में राज्यसभा भेजा। जहां वे जून 2014 से जुलाई 2016 तक राज्यसभा सांसद रहे। पवन वर्मा प्रमुख अंग्रेजी अखबारों के लिए स्तंभकार भी है। वर्मा पार्टी के कद्दावर नेता माने जाते रहे। प्रशांत किशोर को पार्टी में लाने में उनकी अहम भूमिका रही। बिहार जाकर रहने से पहले वह दिल्ली में JDU के नेता रहे हैं।

अनिल हेगड़े और हरिवंश (दाएं)
अनिल हेगड़े और हरिवंश (दाएं)

पत्रकारिता छोड़ सांसद बने गए हरिवंश

हरिवंश का पूरा नाम हरिवंश नारायण सिंह है। उत्तर के बलिया के सिताब दियारा के रहने वाले हरिवंश 1989 में रांची से प्रकाशित एक अखबार के प्रधान संपादक बने। चार दशकों की सक्रिय पत्रकारिता में उन्होंने कई मीडिया संस्थानों में काम किया। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के अतिरिक्त मीडिया सलाहकार भी रहे। 2014 में JDU के उम्मीदवार के रूप में बिहार से हरिवंश को राज्यसभा के लिए निर्वाचित किया गया। पहली बार 8 अगस्त 2018 को NDA के उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा के उप सभापति के रूप में निर्वाचित हुए। दूसरी बार 14 सितंबर 2020 को वह पुनः राज्यसभा के उप सभापति निर्वाचित हुए।

चुनाव हारने के बाद शरद यादव गए सदन

शरद यादव का जन्म 1 जुलाई 1947 को मध्य प्रदेश के होशंगाबाद में एक गांव में किसान परिवार में हुआ। पढ़ाई के समय से ही राजनीति में दिलचस्पी रही और 1971 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए। पहली बार 1974 में मध्य प्रदेश की जबलपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। यह जेपी आंदोलन का समय था और हल्दर किसान के रूप में जेपी द्वारा चुने गए पहले उम्मीदवार थे। 1991 से 2014 तक शरद यादव बिहार की मधेपुरा सीट से सांसद रहे। इसी दौरान JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे। 2014 में चुनाव हारने के बाद JDU ने उन्हें राज्यसभा भेजा था।