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बिहार में छोटी नदियों को जोड़ा जाएगा:सीएम ने कहा- बाढ़ से बचाव का स्थायी उपाय हो, 2-3 दिन में बारिश से फसल क्षति का आकलन करें

पटना3 महीने पहले
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बैठक में अधिकारियों से फीडबैक लेने के बाद निर्देश देते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार। - Dainik Bhaskar
बैठक में अधिकारियों से फीडबैक लेने के बाद निर्देश देते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि पिछले 2-3 दिन में बारिश से हुई फसल क्षति का भी आकलन हो, ताकि कोई भी प्रभावित क्षेत्र छूटे नहीं। बाढ़ से बचाव का स्थायी उपाय किया जाए। वे बुधवार को आपदा प्रबंधन, जल संसाधन तथा कृषि विभाग के साथ पिछले दो दिनों में वर्षा के कारण उत्पन्न स्थिति एवं फसल क्षति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पिछले 5-6 माह से लगातार बारिश हुई है।

राज्य में इस मानसून अवधि के दौरान चार चरणों में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई। राहत एवं बचाव कार्य पूरी मुस्तैदी से किया गया। 15 अक्टूबर के पहले सभी जगह की रिपोर्ट लेकर हुई फसल क्षति का आकलन किया गया और उन्हें मुआवजा दिया जा रहा है।

पिछले 2-3 दिनों में भी वर्षा के कारण हुई फसल क्षति का फिर से एक बार आकलन किया जाए। सभी गांवों में हुई फसल क्षति की जानकारी ली जाए। 2007 से आपदा की स्थिति में लोगों को हर प्रकार से सहायता की जा रही है।

मुख्यमंत्री के खास निर्देश- कोई भी प्रभावित क्षेत्र नहीं छूटे, इसका ध्यान रखें
सीएम ने कहा कि जल संसाधन विभाग सिंचाई कार्य को ठीक से देखने के साथ बाढ़ से बचाव के स्थायी समाधान के लिए कार्य करे। जिन नदियों के किनारे तटबंधों का निर्माण बचा हुआ है, उसे जल्द पूरा किया जाए। नदियों की उड़ाही हो। छोटी-छोटी नदियां जोड़ी जाएं। बिहार की करीब 74 प्रतिशत आबादी की आजीविका का आधार कृषि है। फसलों की सरकारी खरीद का काम अच्छे से हो रहा है, लोगों की आमदनी बढ़ी है।

जल संसाधन विभाग के सचिव संजीव हंस, कृषि विभाग के सचिव एन. सरवन कुमार व आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने अपने-अपने विभागों की अद्यतन स्थिति की जानकारी दी। बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार व चंचल कुमार तथा सचिव अनुपम कुमार मौजूद थे।

मुख्यमंत्री के खास निर्देश

  • जल संसाधन विभाग सिंचाई कार्य को ठीक से देखे
  • जिन नदियों के किनारे तटबंधों का निर्माण बचा है, उसे जल्द पूरा किया जाए
  • नदियों की उड़ाही हो।
  • छोटी-छोटी नदियों को जोड़ा जाए, ताकि जल संरक्षण हो, किसानों को सिंचाई में सुविधा हो।
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