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सुपर-30 के आनंद कुमार का कॉलम:सफलता कितनी भी बड़ी हो, शुरुआत हमेशा छोटी ही होती है

पटनाएक महीने पहले
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आजकल इस कोविड-19 के दौर में वेबिनार के जरिए स्टूडेंट्स से बात-चीत करने का खूब मौका मिल रहा है। मैं उनके हर तरह के सवालों का जवाब देने का प्रयास भी करता हूं। एक बड़ा कॉमन सवाल पूछा जाता है कि सर मैं आपकी बातें सुनकर पूरी ताकत के साथ पढ़ाई में जुट जाता हूं। रुटीन बनाता हूं। सुबह-सुबह उठता भी हूं।

पढ़ना शुरू भी करता हूं, लेकिन कुछ ही दिनों में उत्साह ठंडा हो जाता है और फिर कुछ आगे करने का मन भी नहीं करता है। एक और अहम सवाल अक्सर मेरे सामने आता है कि समय मेरे पास या फिर सफल लोगों के पास 24 घंटे ही होता हैं, लेकिन सफल लोग उस 24 घंटे में क्या कुछ और कैसे करते हैं कि सफल हो जाते हैं और मैं अब तक कुछ नहीं कर पाया हूं। दोनों सवालों का जवाब एक ही जैसा है। दरअसल सफल लोगों को देखकर हम उनकी सफलता और उपलब्धियों से प्रवाभित हो जाते हैं। और यह भी सच है कि सफल इंसान आॅर्गेनाइज्ड तरीके से खूब मेहनत करता है। फिर क्या, हम भी उतनी बड़ी सफलता के लिए उसी तरह से उतने ही घंटे प्रयास शुरू कर देते हैं। और बहुत ही जल्दी परिणाम खोजते हैं। ऐसे लोगों की कमी नहीं है कि अभी हाथ में किताबें पकड़ी नहीं कि यूपीएससी में टॉप करने का सपना देखने लगे। हम यूपीएससी टॉपर का इंटरव्यू देखते हैं।

टॉपर अगर इंटरव्यू में बताता है कि वह प्रतिदिन 14 घंटे पढ़ाई करता था, तब उसकी देखा-देखी हम भी पहले ही दिन से 14 घंटे पढ़ाई करने की कोशिश करने लगते हैं। अगर हम कसरत करके स्वास्थ्य चाहते हैं, तब बहुत ही जल्दी फिल्मी हीरो जैसे शरीर की कल्पना करने लगते हैं। यहीं हम गलती कर बैठते हैं। फिर हम निराशा के शिकार हो जाते हैं। राह से भटक भी जाते हैं। अंतत: प्रयास भी छोड़ देते हैं। हम कभी नहीं सोचते हैं कि आज हम जिस सफलता को विशाल वृक्ष के रूप में देख रहें हैं कभी न कभी यह भी एक छोटा सा बीज रहा होगा। फिर बीज अंकुरित हुआ होगा।

एक नन्हा सा पौधा बना होगा। और फिर वही छोटा सा पौधा धीरे-धीरे विशालकाय वृक्ष का रूप धारण करता है। मेरे कहने का मतलब है कि सफलता चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, शुरुआत हमेशा बहुत ही छोटे से ही होती है। मैं अपने अनुभव के आधार पर भी आपको बता सकता हूं कि बड़ी से बड़ी सफलता के लिए भी शुरुआत छोटी होनी चाहिए। हां, इतना जरूर है कि आप ध्यान रखें कि आपका प्रयास कभी नहीं छूटे। निरंतर चलते रहे। और अगर आपने शुरुआत बहुत ही छोटी की है, तब आप थकेगें नहीं। रुकेंगें भी नहीं। आप सच में कुछ बड़ा करना चाहते हैं तब शुरुआत छोटी करें। अगर आपका दिल पढ़ाई में जरा भी नहीं लगता है और आप पढ़कर कुछ अच्छा करना चाहते हों, तब एक ऐसा रुटीन बनाएं जिसमे पहले कुछ दिनों तक आपको सिर्फ एक ही घंटा पढ़ना पड़े। लेकिन हां, उस एक घंटे को पूरी शांति से, पूरे मन से पढ़ाई में लगाएं। और जो भी विषय पढ़ना चाहते हों उस विषय की सबसे सरल पुस्तक से ही शुरुआत करें। एक बात और, जब तक विषय को पूरी तरह से समझ नहीं जाएं, आगे किसी भी हालत में नहीं बढ़ें।

धीरे-धीरे आप अभ्यास का समय अपनी सुविधा और क्षमता के अनुसार बढाएं। संभव है कि आपको प्रोग्रेस बहुत ही धीमी महसूस हो। आपको लगे कि इस रफ्तार से चलने पर आप मंजिल तक नहीं पहुंचेंगें। लेकिन, ऐसा नहीं है। आप जरूर सफल होगें। याद रहे कि इस दरम्यान बहुत ही धैर्य की जरूरत होती है। सकारात्मक भी बने रहना जरूरी होता है। बचपन में ही हम लोगों ने कछुए और खरगोश की कहानी पढ़ी थी। आज भी वह प्रासंगिक है। सबसे जरूरी यह है कि प्रयास बहुत ही छोटा हो कोई फर्क नहीं पड़ता परंतु लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।

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