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28 जनवरी को बिहार बंद का ऐलान:इनौस और आइसा ने दिया रेलवे परीक्षार्थी के आंदोलन को समर्थन, निजीकरण को भी जोड़ा

पटना4 महीने पहले
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RRB-NTPC की परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप पर छात्र दो दिनों से विभिन्न रेलवे स्टेशन पर हंगामा कर रहे हैं। (फाइल) - Dainik Bhaskar
RRB-NTPC की परीक्षा के रिजल्ट में गड़बड़ी के आरोप पर छात्र दो दिनों से विभिन्न रेलवे स्टेशन पर हंगामा कर रहे हैं। (फाइल)

रेलवे परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। छात्र संगठन आइसा और नौजवान संगठन इंकलाबी नौजवान सभा ने RRB-NTPC के रिजल्ट में गड़बड़ी और ग्रुप डी की परीक्षा में तुगलकी फरमान का आरोप लगाया है। साथ ही दोनों लेफ्ट संगठनों ने आंदोलनरत अभ्यर्थियों पर बर्बर दमन, लाठीचार्ज, आंसू गैस के गोले, मुकदमा और गिरफ्तारी की निंदा की है।

आइसा के राज्य सचिव सबीर कुमार और इंकलाबी नौजवान सभा के सचिव शिवप्रकाश रंजन ने कहा है कि युवाओं का गुस्सा इसलिए भी भड़का हुआ है कि केन्द्र सरकार रेलवे का निजीकरण कर रही है। दोनों संघों ने छात्र-युवाओं के आंदोलन के समर्थन में 28 जनवरी को बिहार बंद का आह्वान भी कर दिया है। माना जा रहा है कि यह बंद व्यापक हो सकता है।

इन छात्र संगठन और नेताओं ने किया विरोध

इनौस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधायक मनोज मंजिल, आइसा के महासचिव और विधायक संदीप सौरभ, इनौस के मानद प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अजीत कुशवाहा, इनौस के राज्य अध्यक्ष आफताब आलम, आइसा के राज्य अध्यक्ष विकास यादव, इनौस के राज्य सचिव शिवप्रकाश रंजन व आइसा के राज्य सचिव सबीर कुमार ने संयुक्त रूप से कहा कि आंदोलनरत छात्र-युवा अपने आक्रोश को मोदी-नीतीश सरकार के खिलाफ मोड़ दें और चरणबद्ध आंदोलन खड़ा करते हुए रेलवे बेचने और नौकरियां खत्म करने पर आमदा मोदी सरकार को पीछे हटने पर मजबूर कर दें।

रोजगार के नए अवसर देने के बजाय कटौती में लगी है सरकार

उन्होंने कहा कि हर साल 2 करोड़ रोजगार देने का वादा करने वाली मोदी सरकार और 19 लाख रोजगार देने की बात करने वाली नीतीश सरकार बताए कि उसने छात्र-युवाओं के लिए अब तक क्या किया है? 2019 में रेल मंत्रालय द्वारा जारी 35,281 पदों के लिए हुई स्नातक स्तरीय परीक्षा का पीटी रिजल्ट 14 जनवरी 2022 को आया। पीटी के रिजल्ट में पदों के 20 गुना रिजल्ट जारी करने की बात थी। इस लिहाज से 7 लाख रिजल्ट दिया जाना चाहिए था। इसमें तकरीबन 4 लाख रिजल्ट ऐसे हैं, जिनमें कोई एक अभ्यर्थी दो से अधिक, यहां तक कि 7 पदों पर सफल हुए हैं। इस तरह वास्तविकता में महज 2 लाख 76 हजार रिजल्ट ही जारी हुआ है। अभ्यर्थियों की मांग एकदम जायज है कि एक पद के लिए एक अभ्यर्थी का ही रिजल्ट देना चाहिए।

तुगलकी फरमान नहीं चलने देंगे

छात्रों और युवा नेताओं के अनुसार, रेलवे ने जितनी वैकेंसी निकाली थी, उतनी बहाली नहीं कर रही है। अभ्यर्थी सरकार के इस खेल को खूब समझ रहे हैं। सरकार जनता को मुर्ख नहीं बना सकती। दूसरा मामला ग्रुप डी की परीक्षा का है। इसमें 1 लाख 3 हजार पदों पर बहाली होनी है, जिस पर तकरीबन एक करोड़ आवेदन आए हैं। यह अपने आप में देश में बढ़ती बेरोजगारी की दर को दिखा रहा है, जहां ग्रुप डी के पदों के लिए भी भारी मारामारी है। पहले के नोटिफिकेशन में इस परीक्षा में केवल पीटी परीक्षा लेने की बात कही गई थी, लेकिन अब एक तुगलकी फरमान निकालकर दो परीक्षाओं को आयोजित करने की बात कही जा रही है।

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