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ऑक्सीजन के बाद इंजेक्शन का स्टॉक ड्राई:₹800 के इंजेक्शन का वसूल रहे ₹20 हजार; सरकार की निगरानी का दावा फेल

एक महीने पहले
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फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
फाइल फोटो।
  • एजेंसियों पर ड्रग इंस्पेक्टरों की तैनाती के बाद भी पटना में बढ़ी कालाबाजारी

ऑक्सीजन के बाद अब रेमडेसिवीर इंजेक्शन का स्टॉक ड्राई हो गया है। एक बॉयल के लिए 20 हजार तक लिया जा रहा है। दावा हर स्टॉकिस्ट पर निगरानी का है लेकिन कालाबाजारी जारी है। प्राइवेट हॉस्पिटल में इंजेक्शन कौन दे रहा है? इस सवाल का जवाब जिम्मेदारों के पास भी नहीं है। पटना में दो दिनों से स्टॉकिस्टों का स्टॉक तो खाली है, लेकिन प्राइवेट हॉस्पिटल मरीज को रेमडेसिवीर की व्यवस्था करा रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि सरकार की निगरानी कैसे हो रही है।

अब तो कंट्रोलर के कंट्रोल में नहीं है व्यवस्था

दवाओं का नियंत्रण औषधि नियंत्रण विभाग के पास होता है लेकिन इसमें भी सिस्टम फेल हो गया है। सरकार के साथ विभाग के आला अधिकारियों ने दावा किया था कि रेमडेसिवीर इंजेक्शन की मांग और निगरानी को लेकर विभाग को जिम्मेदारी दी है। लेकिन पटना में संक्रमण की रफ्तार बढ़ने के साथ रेमडेसिवीर की डिमांड बढ़ गई है। अब तो ड्रग कंट्रोलर के भी कंट्रोल में मामला नहीं है। पटना के बाजार में रेमडेसिवीर इंजेक्शन गायब है लेकिन प्राइवेट हॉस्पिटल और नर्सिंग होम में इसकी आपूर्ति मनमाने रेट पर हो रही है।

दो दिन से खाली है स्टॉक, आज आ सकती है इंजेक्शन

बिहार के स्टेट ड्रग कंट्रोलर रविंद्र सिन्हा का कहना है कि इंजेक्शन को लेकर पूरी सख्ती है। पटना में तीन स्टॉकिस्ट हैं तीनों सेंटर पर अलग अलग ड्रग इंस्पेक्टर को लगाया गया है। ड्रग इंस्पेक्टर की निगरानी में ही इंजेक्शन दिया जा रहा है। दो दिनों से इंजेक्शन नहीं है इस सवाल पर ड्रग कंट्रोलर का कहना है कि डिमांड अधिक है आपूर्ति कम हो रही है। रविवार को इंजेक्शन की खेप आने वाली थी लेकिन नहीं आई। अब सोमवार को आने की उम्मीद है। स्टॉक खाली होने के पीछे ड्रग कंट्रोलर का कहना है कि कंपनियों का रेट रिवाइज हो रहा था इस कारण से इंजेक्शन नहीं आ पाया है। अब इसे लेकर तैयारी की जा रही है। कालाबाजारी को लेकर ड्रग कंट्रोलर का कहना है कि ऐसा नहीं हो सकता, क्योंकि इसके लिए हॉस्पिटल का डिमांड लेटर और संबंधित मरीज का आधार कार्ड लिया जाता है। ड्रग कंट्रोल की बात मानें और इतनी सख्ती भी है तो बड़ा सवाल यह है कि प्राइवेट हॉस्पिटल को इंजेक्शन दे कौन रहा है?

नहीं हुई मदद तो कंपनी के साथ व्यापार नहीं

बिहार केमिस्ट एंड ड्र्गिस्ट एसोसिएशन ने कोरोना महामारी में रेमडेसिवीर इंजेक्शन को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। एसोसिएशन का कहना है कि अगर रेमडेसिवीर इंजेक्शन बनाने वाली कंपनियां इस काल में मदद नहीं की तो आने वाले समय में उनके साथ कोई व्यापार नहीं किया जाएगा। एसोसिएशन का कहना है कि बिहार में कोरोना बीमारी में अप्रत्याशित वृद्धि हो रही है। ऐसे में डॉक्टर मरीजों को रेमडेसिवीर इंजेक्शन की सलाह दे रहे हैं। राज्य सहित पूरे देश में इसकी आपूर्ति मुश्किल से हो रही है। पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में इन दवाओं की मांग को देखते हुए एसोसिएशन ने दवा निर्माता कंपनियों से राज्य की आबादी एवं मांग को देखते है आपूर्ति करने का आग्रह किया है । कम्पनी ने दवा की आपूर्ति तो आरंभ किया है , लेकिन मरीजों की संख्या में वृद्धि के कारण कम पड़ रही है । ऐसी परिस्थिति में दवा व्यवसायियों को विपरीत स्थिति का सामना करना पड़ रहा है । यदि इस संकट की घड़ी में जो भी दवा निर्माता कम्पनी हमारे राज्य के साथ अपेक्षित सहयोग नहीं करेंगे तो आगे समय अनुकूल होने पर हम राज्य के तमाम दवा व्यवसायी भी , उनके साथ व्यापारिक सहयोग नहीं कर सकेंगे ।

रेमडेसिवीर की इसलिए बढ़ी डिमांड

डॉक्टरों का कहना है कि रेमडेसिवीर इंजेक्शन अनेक विषाणुओं के विरुद्ध काम करता है। 2020 में कोरोना महामारी के समय विश्व के 50देशों में रेमडेसिवीर को कोविड-19 की चिकित्सा के लिए अधिकृत किया गया था। इस दवा का निर्माण हेपेटाइटिस सी के इलाज के लिए किया गया था। बाद में इबोला वायरस में भी इसका बेहतर परिणाम आया था। कोरोना वायरस के इलाज में प्रयुक्त शुरुआती दवाओं में रेमडेसिवीर को भी शामिल किया गया है। इस कारण से ही अचानक से इसकी डिमांड तेजी से बढ़ गई। हालांकि 20 नवम्बर 2020 को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना मरीजों के इलाज में डॉक्टरों को रेमडेसिवीर के इस्तेमाल से बचने को कहा था लेकिन दिसंबर 2020 में ही कैंब्रिज यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस से संक्रमित और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले एक मरीज को रेमडेसिवीर दवा दी थी। इलाज के दौरान पाया गया कि उस मरीज के स्वास्थ्य में जबरदस्त सुधार हुआ। यही नहीं, उसके शरीर से कोरोना वायरस का खात्मा भी हो गया। इस अध्ययन को नेचर कम्युनिकेशन ने प्रकाशित किया था। इसके बाद से भारत सहित कई देशों में रेमडेसिवीर के इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है और इसके बाद से ही इस इंजेक्शन की सार्टेज हुई है।

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