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लुटेरे हुए अस्पताल, अब मजिस्ट्रेट तैनाती की नौबत:ऑक्सीजन और रेमडेसिवीर की ब्लैक मार्केटिंग करने वालों को होगी जेल, कैंसिल होगा अस्पतालों का लाइसेंस

पटना2 महीने पहले
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  • अस्पतालों की मनमानी रोकने के लिए प्रशासन की बड़ी तैयारी
  • चार हॉस्पिटल पर तैनात किए जाएंगे एक-एक मजिस्ट्रेट

महामारी के समय इंसान की फितरत गिद्ध जैसी हो जाती है। पटना में यह दिख भी रहा है। जिंदा और मुर्दा दोनों को नोचा जा रहा है। इसमें प्राइवेट अस्पताल सबसे आगे हैं। 800 के रेमडेसिवीर के एक वायल के लिए मरीजों से 20 हजार रुपए वसूल रहे हैं। ऑक्सीजन का भी कुछ ऐसा ही हाल है। प्रशासन ने ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए योजना बनाई है। अब हर चार हॉस्पिटल पर एक एक मजिस्ट्रेट तैनात करने की तैयारी है। शिकायत मिलते ही मजिस्ट्रेट जांच कर कार्रवाई के लिए जवाबदेह होंगे। पटना DM डॉ चंद्रशेखर सिंह ने कहा है कि ऐसे अस्पतालों और संचालकों के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।

समस्या हुई तो होने लगी ब्लैक मार्केटिंग

पटना में समस्या के साथ ही ब्लैक मार्केटिंग का धंधा चलने लगा है। ऑक्सीजन से लेकर रेमडेसिवीर इंजेक्शन का यही हाल है। कुछ अस्पताल इस समस्या का फायदा उठाकर कमाई कर रहे हैं। ऑक्सीजन से लेकर इंजेक्शन में मोटा पैसा दे रहे हैं। पहले हॉस्पिटल ऑक्सीजन काे लेकर सौदा नहीं करते थे, लेकिन अब तो मरीज के साथ ऑक्सीजन को लेकर भी सौदेबाजी चल रही है। ऑक्सीजन और इंजेक्शन के फेर में मरीजों की जान फंसी है।

कालाबाजारियों के आगे हारा प्रशासन

कालाबाजारियों के आगे प्रशासन की भी हालत खराब हो रही है। पटना के प्राइवेट अस्पतालों में कई ऐसे मामले आए हैं, जिसमें लोगों ने शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। प्रशासन ने भी लाख उपाय किया है, लेकिन इसके बाद भी मरीजों को अस्पतालों में मनमानी का शिकार होना पड़ रहा है। कभी ऑक्सीजन का बहाना तो कभी इंजेक्शन की कमी का बहाना बताकर अस्पताल मरीजों से मोटी कमाई कर रहे हैं।

मरीजों की शिकायत पर होगी कार्रवाई

पटना में मरीजों की शिकायत पर कार्रवाई की जाएगी। पटना DM डॉ चंद्रशेखर सिंह का कहना है कि कोरोना के इलाज को लेकर अस्पतालों का रेट तय कर दिया गया है। इस रेट से अधिक पैसा लेने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोई भी अस्पताल मनमानी करता है तो इसकी शिकायत मरीज कंट्रोल रूम को कर सकता है। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट को मामला ट्रांसफर कर दिया जाएगा, जिसके बाद जांच में आरोप सही पाया गया तो हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे अस्पतालों के खिलाफ महामारी रोग अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें संचालकों को जेल और अस्पताल का लाइसेंस भी कैंसिल किया जाएगा।

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