पटना बालिका गृह कांड मामले में इंचार्ज को क्लीन चिट:काली करतूत की 24 घंटे में पूरी हो गई जांच, पीड़िता को ही बताया झगड़ालू

पटना10 महीने पहले
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पटना महिला रिमांड होम पर गंभीर आरोप लगाकर सनसनी फैलाने वाली बालिकाओं के आरोपों को निराधार बताकर इंचार्ज को क्लीन चिट दे दी गई है। समाज कल्याण विभाग की जांच टीम ने पीड़िता को झगड़ालू बताते हुए मामले को नई दिशा दे दी है। जांच रिपोर्ट में आरोपी इंचार्ज तो बच गई, लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या पूरा का पूरा मामला ही फर्जी था। जांच रिपोर्ट के बाद अब अब इस गंभीर मामले में सवालों ने उलझा दिया है।

समाज कल्याण विभाग का कहना है, '30 जनवरी को वायरल वीडियो संज्ञान में आते ही तत्काल प्रभाव से मुख्यालय और जिला स्तर से जांच टीम बनाई गई। टीम को जांच का निर्देश दिया गया। 31 जनवरी को जांच में कई नई बातें सामने आई है।' विभाग का दावा है कि इस मामले की काफी सूक्ष्मता से जांच कराई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़िता का वायरल वीडियो भी काफी पुराना है।

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दोस्त के साथ भाग गई थी, इसलिए पति ने छोड़ा

जांच टीम ने कहा है, 'अभिलेखों से पता चला कि पीड़िता का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में हुआ। उसका बचपन दिल्ली के बालिका गृह में बीता है। विवाह दरभंगा के विवेकानंद पासवान के साथ हुआ। वह अपने ससुराल दरभंगा में रह रही थी, जहां उसको एक बच्चा भी हुआ। इस बीच वह अपने पति के दोस्त विक्की कुमार के साथ एक माह के लिए लापता हो गई। बाद में जब विक्की कुमार ने उसे छोड़ दिया तब वह वापस अपने ससुराल चली गई। वहां उसके पति ने अपने साथ दिल्ली ले जाने के बहाने से ट्रेन में छोड़ दिया था।'

सीवान में लावारिस मिली थी

रिपोर्ट में कहा गया है, 'लावारिस हालत में पीड़िता को सीवान GRP द्वारा चाईल्ड लाइन की मदद से रेसक्यू किया गया और किशोर न्याय ( बालकों की देख रेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 27 के तहत गठित बाल कल्याण समिति सीवान के समक्ष लाया गया। सीवान में बालिका गृह नहीं होने के कारण 4 मार्च 2020 को उसे बालिका गृह छपरा में रख दिया गया। उसकी उम्र मेडिकल बोर्ड से 18 वर्ष से अधिक प्रमाणित होने पर किशोर न्याय ( बालकों की देख रेख एवं संरक्षण ) अधिनियम, 2015 के प्रावधानों के अनुसार 19 जून 2020 को बाल कल्याण समिति सीवान के आदेश से उत्तर रक्षा गृह पटना में ट्रांसफर कर दिया गया।'

बालिका के व्यवहार पर जांच टीम का सवाल

जांच टीम ने बालिका के व्यवहार पर सवाल खड़ा किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सारण बालिका गृह में रहने के दौरान समय-समय पर की गई काउंसिलिंग से ऐसा प्रतीत होता है कि बालिका का व्यवहार स्थिर नहीं है । उसके द्वारा अपने पति एवं अन्य पर गंभीर आरोप लगाए गए थे और उन आरोपों को उसने वापस भी लिया है। गृहों में रहने की अवधि में उसका स्वभाव अत्यंत झगडालू एवं उदंड प्रवृति प्रतीत होने की बात कही गई है। जांच में यह भी कहा गया है कि विभिन्न काउंसिलिंग से यह बात भी उभरकर आती रही है कि झूठ बोलना, अन्य बालिकाओं को उकसाना, गृह के कर्मियों की शिकायत करना, साथ ही गृह के कर्मियों की नौकरी खा जाने की धमकी देना, उसके स्वभाव में शामिल होना बताया गया है। बताया गया है कि 23 मई 2020 को अपने हस्त लिखित आवेदन में महिला ने कहा है कि मैं पति से तलाक लेना चाहती हूं एवं ससुराल पक्ष पर भी प्रताड़ना एवं बच्चे को छीन लेने का आरोप लगाया गया है ।

कुछ कर लेने की धमकी का आरोप

समाज कल्याण विभाग का कहना है कि 10 जून 2020 को हुई काउंसलिंग रिपोर्ट में पीड़िता द्वारा बताया गया है कि उसकी उम्र 20 वर्ष हो चुकी है, लेकिन वह ससुराल नहीं जाना चाहती है, वह बालिका गृह सारण में भी नहीं रहना चाहती है। वह किसी दूसरी जगह जाना चाहती हैं। पीड़िता ने कहा कि यदि गृह से नहीं भेजा गया तो वह कुछ भी कर लेगी। इसके बाद बाल कल्याण समिति सीवान के पत्रांक 104 के आलोक में उसे राजकीय उत्तर रक्षा गृह, गायघाट पटना में रखा गया।

जांच में आरोपों को बताया गया निराधार

जिला और राज्यस्तरीय टीम द्वारा स्थल पहुंचकर की गई जांच के आधार पर बताया गया है कि आवासिनों (जो महिला के आवासन अवधि के समय से अब तक गृह में रह रही हैं) ने महिला के संबंध में बताया कि उसका स्वभाव उदंड एवं झगड़ालू था। गृह के कर्मियों द्वारा भी इस बात की पुष्टि की गई। उतर रक्षा गृह गायघाट पटना के सुरक्षा का जिम्मा बिहार पुलिस के 4 सशस्त्र जवान 3 होमगार्ड एवं 9 महिला सुरक्षा बल के ऊपर है, जो 24 घंटे निगरानी करती है। उतर रक्षा गृह, पटना के निगरानी 13 CCTV कैमरों के माध्यम से की जाती है, जिसकी सूक्ष्मता से जाँच की गई। जिससे वायरल वीडियो में लगाए गए गए आरोपों की पुष्टि नहीं होने की बात कही गई है।