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मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला:PMCH में जिंदा मरीज को मरा बताकर दूसरे की डेड बॉडी देना पड़ा भारी, राज कुमार भगत के शव की हुई थी दुर्गति

पटनाएक महीने पहले
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PMCH की फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar
PMCH की फाइल फोटो।
  • हेल्थ मैनेजर अंजली कुमारी ने मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से की शिकायत

पटना मेडिकल कॉलेज में जिंदा मरीज को मरा बताकर परिवार वालों को दूसरे की डेड बॉडी देने का मामला अब मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है। मामले की जांच हुई तो कोरोना से मरने वाले राज कुमार को भी न्याय मिल जाएगा। जिसकी मौत के बाद शव की दुर्गति की गई। PMCH में हुए इस घटनाक्रम में निलंबित की गई हेल्थ मैनेजर ने आयोग में न्याय की गुहार लगाई है। जांच में PMCH में मरीजों और परिजनों के अधिकारों के हनन पर भी न्याय मिल सकेगा।

कार्रवाई के बाद बड़ा सवाल

पटना मेडिकल कॉलेज में जिंदा को मरा बता दूसरे की डेड बॉडी देने के मामले में PMCH द्वारा की गई कार्रवाई को लेकर भी बड़ा सवाल खड़ा किया जा रहा है। सवाल यह है कि जब हेल्थ मैनेजर को आयुक्त नियुक्त करते हैं तो फिर उस पर कार्रवाई अधीक्षक कैसे कर सकते हैं। इस मामले में अधीक्षक आयुक्त के पास संस्तुति भेज सकते हैं। पटना मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ आई स ठाकुर ने इस घटना में तत्काल प्रभाव से हेल्थ मैनेजर को टर्मिनेट कर दिया था और इसकी जानकारी भी दे दी। अब इस कार्रवाई के बाद आयुक्त के अधिकार का प्रयोग करने को लेकर चर्चा है। हालांकि इस संबंध में PMCH कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

हेल्थ मैनेजर ने लगाई मानवाधिकार से गुहार

पटना मेडिकल कॉलेज के कोविड कंट्रोल रूम में तैनात हेल्थ मैनेजर अंजली कुमारी ने मंगलवार को बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से न्याय की गुहार लगाई है। हेल्थ मैनेजर का कहना है कि 11 अप्रैल को मेडिकल कॉलेज के कोविड वार्ड में जिंदा मरीज की मौत बताकर कैरिंग सर्टिफिकेट जारी किया गया, इस मामले में दूसरे मृत की बॉडी दूसरे के जिंदा व्यक्ति के परिजनों को सौंप दी गई। इस मामले में मेरे ऊपर कार्रवाई की गई है।

हेल्थ मैनेजर ने कहा- बिना स्पष्टीकरण मांगे कार्रवाई

हेल्थ मैनेजर ने कहा है कि 11 अप्रैल को कोविड से संक्रमित मरीज का शव दूसरे के परिजनों को सौंपने का आरोप लगाकर बिना मुझसे स्पष्टीकरण मांगे या इस मामले की सच्चाई बिना जाने कार्रवाई कर दी गई। यह नियम का उल्लंघन है। 11 अप्रैल से मुझे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। हेल्थ मैनेजर का कहना है कि उसकी बर्खास्तगी का आदेश पूरी तरह से गलत और अनुचित है।

डॉक्टर की गलती पर मुझे क्यों दी गई सजा

हेल्थ मैनेजर अंजली ने पत्र में कहा है कि मृत मरीज के डेथ सर्टिफिकेट संबंधित ऑन ड्यूटी डॉक्टर द्वारा दिया जाता है तथा कोविड से संक्रमित मरीज के शव की पैकिंग टॉली मैन और वार्ड ब्वाय के द्वारा की जाती है। इन दोनों कार्य में स्वास्थ्य प्रबंधक का कोई रोल नहीं होता है। अंजली का कहना है कि 11 अप्रैल को भी ऐसा ही हुआ, जिसमें उनका कोई रोल नहीं था। कोई संलिप्तता नहीं थी। इसके बाद भी मेरे ऊपर कार्रवाई कर दी गई। इस मामले में बिना जांच किए कार्रवाई किया जाना बड़ा सवाल है। इस मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष से हेल्थ मैनेजर अंजली ने कार्रवाई की मांग की है।

PMCH की गलती से खुली पोल, तैनात करना पड़ा IAS

पटना मेडिकल कॉलेज में 11 अप्रैल को बाढ़ के चुन्नू की कोरोना से मौत बता दिया गया और पूर्णिया के राजकुमार की डेड बॉडी चुन्नू के परिजनों को सौंप दिया गया। इस मामले में पूरे देश में पटना मेडिकल कॉलेज की बदनामी हुई। इस घटना के बाद सरकार की व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा हो गया। इस घटना के बाद ही यह साबित हो गया कि पटना मेडिकल कॉलेज प्रबंधन व्यवस्था को सही से नहीं चला पा रहा है। इस घटना के बाद पटना मेडिकल कॉलेज की अक्षमता उजागर हो गई। इसके बाद सरकार को बड़ा निर्णय लेना पड़ा। सरकार ने निगरानी के और संस्थानों पर मनमानी के लिए पटना मेडिकल कॉलेज, नालंदा मेडिकल कॉलेज और पटना एम्स में IAS अधिकारियों को तैनात कर दिया गया। बदहाल हुई व्यवस्था के बाद अब ISA अफसरों को इस लिए तैनात किया गया है जिससे वह सरकार को सीधा रिपोर्ट करें।

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