कोरोना स्प्रेडर बना IMA, 200 डॉक्टर पॉजिटिव:देश के 5000 डॉक्टर्स और हेल्थ वर्कर हुए थे शामिल; 25 राज्यों में बढ़ा कोरोना का खतरा

पटना4 महीने पहले
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पटना में IMA कोरोना स्प्रेडर बनता दिख रहा है। IMA के कार्यक्रम में देश के 25 राज्यों के 5000 डॉक्टर्स और हेल्थ वर्कर शामिल हुए थे। कार्यक्रम के बाद बिहार में डॉक्टरों में कोरोना विस्फोट हुआ है। अकेले बिहार में करीब 200 संक्रमित मिले हैं। इसके बाद 25 राज्यों में कोरोना का खतरा बढ़ गया है। नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में कोरोना विस्फोट ने IMA के कार्यक्रम में शामिल डॉक्टरों की नींद उड़ा दी है।

अब खतरा उन राज्यों में है, जहां से आए डॉक्टर पटना में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए हैं। कोरोना संक्रमण के बीच हुए कार्यक्रम में गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया, सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क को लेकर बड़ी लापरवाही हुई है।

जानिए डॉक्टरों में कैसे बढ़ा कोरोना का खतरा
पटना में आयोजित IMA के 3 दिनों के अधिवेशन में देश के कोने-कोने से डॉक्टर आए। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के मुताबिक इस आयोजन में 5000 से ज्यादा लोग शामिल हुए हैं। इसमें बिहार में एक हजार से ज्यादा डॉक्टरों और मेडिकल स्टूडेंट्स के साथ हेल्थ वर्कर शामिल हुए। कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से आए डॉक्टरों को पुरस्कार भी दिया गया है। पुरस्कार के लिए आए डॉक्टर क्लोज संपर्क में आए। कार्यक्रम में भीड़ और संक्रमण की रफ्तार को देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से बिहार से लेकर देश के अन्य राज्यों पर कोरोना का खतरा मंडरा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान मंच पर कई लोगों ने मास्क से बनाई थी दूरी।
कार्यक्रम के दौरान मंच पर कई लोगों ने मास्क से बनाई थी दूरी।

जानिए कहां से कितने डॉक्टरों ने पटना में लिया पुरस्कार
पटना में आयोजित IMA के कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के 19, अरुणाचल प्रदेश के 1, असम के 15, बंगाल के 45, छत्तीसगढ़ के 4, दिल्ली के 12, गोवा के 3, गुजरात के 31, हरियाणा के 31 जम्मू एंड कश्मीर के 2, झारखंड के 20, कर्नाटक के 23, केरल के 46, मध्य प्रदेश के 10, महाराष्ट्र के 57, मणिपुर के 7, मेघालय के 1, ओडिशा के 14, पंजाब के 4, राजस्थान के 13, सिक्किम के 2, तमिलनाडु के 66, तेलंगाना के 41, उत्तर प्रदेश के 29 और उत्तरांचल के 6 डॉक्टरों को IMA की तरफ से सम्मानित किया गया।

इस सम्मान पाने वालों की सूची में बिहार के 37 डॉक्टर भी शामिल हुए। पुरस्कार पाने वालों को उसी मंच पर बुलाया गया जहां वीआईपी अतिथि उपस्थित रहे। आईएमए के आंकड़ों के मुताबिक कुल 589 लोगों को पुरस्कार दिया गया है।

देश के विभिन्न राज्यों से आए थे कंपनियों के प्रतिनिधि
पटना में आयोजित IMA के नेशनल कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों के डॉक्टरों के साथ दवा कंपनियों के प्रतिनिधि और कर्मचारी भी अधिक संख्या में शामिल हुए थे। पटना का एसके मेमोरियल हाल पूरा भरा हुआ था और यहां डॉक्टर के कार्यक्रम के बाद भी कोरोना की गाइडलाइन पर कोई विशेष ध्यान नहीं दिया गया।

एस के मेमोरियल से लेकर बापू सभागार में कार्यक्रम कराया गया लेकिन भीड़ में कोरोना की गाइडलाइन को लेकर विशेष सख्ती नहीं दिखाई गई। अब यही चूक कोरोना विस्फोट का कारण बन रही है। डॉक्टरों के तेजी से संक्रमित होने पर स्वास्थ्य विभाग भी सकते में है।

वर्चुअल कार्यक्रम नहीं कराया जाना बड़ी चूक
IMA के कार्यक्रम में देश के कोने कोने से लोगों को बुलाया गया। संक्रमण बाहर से आया या फिर बिहार से बाहर गया। इसका पता नहीं चल पा रहा है। बिहार में जिस तरह से डॉक्टरों में कोरोना का विस्फोट हुआ है वह कार्यक्रम से ही जुड़ रहा है। आईएमए के कार्यक्रम के 5 से 6 दिन बाद से ही संक्रमण की रफ्तार बढ़ी है। इसके बाद से डॉक्टरों में संक्रमण के मामले आए हैं और वही डॉक्टर तेजी से संक्रमित हो रहे हैं जो IMA के कार्यक्रम में शामिल हुए थे।

अब सवाल यह है कि इतने बड़े कार्यक्रम को वर्चुअल क्यों नहीं कराया गया। बड़े बड़े कान्फ्रेंस और रैली वर्चुअल आयोजित हो रहे हैं, ऐसे में IMA के कार्यक्रम को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आखिर इतना बड़े आयोजन में कोरोना को लेकर इतनी बड़ी चूक कहां से हुई जो संक्रमण के विस्फोट का कारण बना।

जानिए जिम्मेदारों के साथ डॉक्टरों ने क्या कहा
बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने कहा कि जब डॉक्टर संक्रमित होते हैं तो चिंता बढ़ जाती है। मरीजों का इलाज करने वालों का संक्रमित होना ठीक नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि गनीमत है कि संक्रमण बढ़ रहा है लेकिन गंभीरता नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि इलाज को लेकर पूरा महकमा अलर्ट मोड पर है। इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ मनीष मंडल का कहना है कि डॉक्टरों में संक्रमण का मामला काफी दुखद है। इसमें कहीं न कहीं से बड़ी चूक हुई है। कोरोना के बचाव को लेकर प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने पर ही ऐसी स्थिति होती है।