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कोरोना से रुलाने वाली कहानी में अब हैप्पी टर्न:एक माह पहले पिता दुनिया छोड़ गए, तब मां नहीं रहती थी साथ, अब बेसहारा हुई 8 साल की राधा के लिए मां ने फैलाया आंचल

पटना5 महीने पहलेलेखक: शालिनी सिंह
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मां मृदुला और बच्ची राधा। - Dainik Bhaskar
मां मृदुला और बच्ची राधा।
  • राधा को प्रभात और मृदुला ने गोद लिया था, दो साल बाद अपनी बेटी से मिलेगी मृदुला

कोरोना की त्रासदी के बीच एक तस्वीर, जिसने हर किसी को रुला दिया था, वो थी 8 साल की राधा की तस्वीर। 27 अप्रैल को अपने पिता के शव के साथ घर में अकेली बंद मिली राधा को अब उसकी मां की ममता का आंचल मिलने वाला है। बच्ची की देखरेख कर रही चाइल्ड वेलफेयर कमिटी पटना का संपर्क बच्ची की मां से हो गया है ।

राधा को प्रभात और मृदुला ने गोद लिया था

राधा की मां का नाम मृदुला है। मृदुला अभी अपने मायके में रहती हैं, जो आरा के बिहिया में है। 2014 में प्रभात और मृदुला ने राधा को गोद लिया था, तब राधा महज 6 महीने की थी। राधा को प्रभात और मृदुला ने भागलपुर दत्तक ग्रहण संस्थान से गोद लिया था। 5 साल तक राधा को उसके पिता और मां मृदुला दोनों का प्यार मिला, लेकिन 2019 के बाद पति-पत्नी का विवाद बढ़ा और फिर प्रभात अपनी बेटी के साथ अलग पटना में रहने लगे। पति-पत्नी के बीच विवाद इतना बढ़ गया था कि नौबत तलाक तक आ गई थी।

राधा के पास मिले फोन पर मां ने साधा संपर्क

प्रशासन को जब राधा पिता के शव के साथ घर में मिली थी, उस वक्त उसके पास एक मोबाइल फोन था। प्रभात के शव को घर से निकालने के बाद पुलिस ने हालांकि उस घर पर ताला लगा दिया था, लेकिन उस मोबाइल को राधा के साथ चाइल्ड वेलफेयर कमिटी को सौंप दिया था। दो दिनों बाद चाइल्ड वेलफेयर कमिटी पटना की चेयरमैन डॉ संगीता कुमारी की ने अपनी निगरानी में उस फोन को ऑन किया। फोन ऑन होने के बाद राधा की मां मृदुला का फोन नंबर मिला। मृदुला ने राधा से मिलने और उसे अपने साथ रखने की चाहत जताई। चाइल्ड वेलफेयर कमिटी पटना की चेयरमैन डॉ संगीता कुमारी के मुताबिक सभी तरह की कागजी छानबीन और पुलिस वेरिफिकेशन का काम पूरा कर लिया है और अब जल्द ही राधा को उसकी मां को सौंप दिया जाएगा ।

दो साल बाद अपनी बेटी से मिलेगी मृदुला

मृदुला और प्रभात के विवाद के कारण पिछले दो साल से मृदुला अपनी बेटी राधा से नहीं मिल पाई है। मृदुला के मुताबिक उसने कई बार राधा से मिलने की कोशिश की,लेकिन प्रभात ने किसी ना किसी बहाने उसे राधा से मिलने नहीं दिया। 18 अप्रैल को भी वो बिहिया से पटना राधा से मिलने पहुंची थी, लेकिन उस वक्त भी उसकी मुलाकात राधा से नहीं हो सकी।

16 घंटे पिता के शव के साथ घर में बंद रही थी मासूम

27 अप्रैल को रुलाने वाली घटना की तस्वीर।
27 अप्रैल को रुलाने वाली घटना की तस्वीर।

पटना के पूर्वी राम कृष्णा नगर के मधुबन कॉलोनी के रोड नंबर पांच पर स्थित एक मकान से राधा अपने पिता प्रभात कुमार के शव के साथ अकेली घर में मिली थी । 8 साल की मासूम राधा जब प्रशासन को मिली तो उसे पिता के मौत की भनक भी नहीं थी। होटल पाटलिपुत्र अशोक में कोरोना टेस्टिंग के दौरान उसने अपनी बात बताई तो हर किसी की आंखें नम हो गईं। मासूम करीब 16 घंटे तक किसी न किसी बहाने से अपने पिता को जगाती रही, लेकिन उसके पिता कभी नहीं उठे। मृतक प्रभात पटना के राजा मार्केट में गोस्वामी नाम के एक व्यक्ति के साथ हार्डवेयर की दुकान करते थे।

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