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तीनों पर विभिन्न थानों में मामला भी दर्ज:साईं अस्पताल में रेमडेसिविर की कालाबाजारी के मामले में पटना पुलिस करेगी अलग से जांच: आईजी

पटना5 दिन पहले
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  • राजधानी के तीन अस्पतालों पर रेमडेसिविर की कालाबाजारी का केस, एक मामले में गिरफ्तारी भी हुई थी

6 मई से 17 मई के बीच में राजधानी के तीन अस्पतालों पर रेमडेसिविर की कालाबाजारी का आरोप लगा। तीनों पर विभिन्न थानों में मामला भी दर्ज हुआ। एक अस्पताल के मामले में गिरफ्तारी भी हुई। लेकिन शुरुआती कार्रवाई के बाद जांच सुस्त पड़ गई। एफआईआर होने के कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी पुलिस इस नतीजे तक नहीं पहुंच पाई है कि इन कालाबाजारियों के पास रेमडेसिविर की सैकड़ों खेप कौन पहुंचाता था।

ऐसे समय में जब विभाग के आवंटन करने के बाद ही अस्पतालों को रेमडेसिविर मिलता था, तब कुछ खास अस्पतालों के पास सैकड़ों रेमडेसिविर कैसे पहुंचा। हालांकि, संबंधित थाना की पुलिस अब भी जांच चल रही है। आईजी सेंट्रल रेंज ने कहा कि साईं अस्पताल के मामले की पुलिस अलग से जांच करेगी।

स्वास्थ्य विभाग को मिली थी साईं और मेडिवर्सल अस्पताल की शिकायत

साईं अस्पताल और मेडिवर्सल अस्पताल मेडिवर्सल की अधिक कीमत वसूल रहा है, इसकी शिकायत स्वास्थ्य विभाग को पीड़ित ने की थी। शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के एक ओएसडी ने ड्रग कंट्रोलर को दोनों अस्पतालों की जांच करवाने के लिए मैसेज किया। इसके बाद 17 मई को ड्रग कंट्रोलर के आदेश पर तीन सदस्यीय धावा दल ने मेडिवर्सल और साईं अस्पताल की जांच की।

जांच में पाया गया कि साईं अस्पताल ने 72 वायल रेमडेसिविर इंजेक्शन खरीदा। जिसमें 65 वायल रेमडेसिविर को 3000 प्रति वायल एमआरपी होने के बाद भी 4000 प्रति वायल की दर से बेचा गया। इसके बाद डीआई की तरफ से 17 मई को ही कंकड़बाग थाने में एफआईआर कराया गया। तीन दिन बाद ही ड्रग डिपार्टमेंट की एक अलग टीम ने इसकी जांच की और साईं अस्पताल की गलतियों को मानवीय भूल करार दिया और अपनी रिपोर्ट में कहा कि इन्हें विभागीय चेतावनी देकर छोड़ा जा सकता था।

वरीय अधिकारी के आदेश का इंतजार कर रही थाने की पुलिस

15 मई को ड्रग विभाग के धावा दल ने सगुना मोड के पास स्थित समय अस्पताल में छापेमारी की। जांच में पाया गया कि अस्पताल को विभाग ने 187 वायल रेमडेसिविर इंजेक्शन आवंटित किया था। इसके बाद भी अस्पताल बिना आवंटन के ही 680 वायल रेमडेसिविर खरीद लिया। साथ ही यह भी आरोप लगा कि अस्पताल ने तीन डिस्चार्ज मरीजों के नाम पर भी रेमडेसिविर खरीदा। इन गंभीर आरोपों के बाद भी समय अस्पताल पर अबतक कोई कार्रवाई नहीं हुई। छानबीन कर रही टीम का कहना है कि हम छानबीन कर रहे हैं। वरीय अधिकारी के आदेश और सुपरविजन रिपोर्ट मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई करेंगे।

जालसाजों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस, अब ईओयू करेगी जांच
6 मई को ईओयू और गांधी मैदान थाने की पुलिस ने गांधी मैदान के पास से ही अलताफ अहमद को दो वायल रेमडेसिविर के साथ गिरफ्तार किया था। अलताफ ईओयू के एक सदस्य को ही 50 हजार में दो वायल इंजेक्शन बेच रहे थे। जांच में पता चला कि अलताफ को उसके जीजा और रेनबो अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. अशफाक ने रेमडेसिविर दिया था।

अशफाक ने बताया कि एमआर राजू ने उन्हें रेमडेसिविर उपलब्ध कराया था। पुलिस ने डाॅ. अशफाक, उनके साले अलताफ और एमआर राजू को गिरफ्तार कर लिया, पर इसके बाद मामला आगे नहीं बढ़ा। गांधी मैदान पुलिस यह पता नहीं लगा पाई कि राजू के पास रेमडेसिविर कैसे आ गया और किसने दिया। हालांकि, अब इस मामले की जांच ईओयू करेगी।

साईं अस्पताल के मामले में पटना पुलिस अपनी अलग जांच करेगी। ड्रग की टीम का एफआईआर और दूसरी जांच रिपोर्ट दोनों पुलिस के पास है। पुलिस अपने स्तर से अनुसंधान करेगी। दोनों के तथ्यों को तलाशेगी और वास्तविकता का पता लगाएगी। कुछ मामले ईओयू को चले गए हैं। जो मामले पटना पुलिस के पास हैं, उनमें तेजी आएगी। -संजय सिंह, आईजी सेंट्रल रेंज

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